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चीन की नई चाल, सप्लाई चेन को बना रहा हथियार; भारत के ₹11429370000000 के मैन्युफैक्चरिंग प्लान पर लग सकता है ब्रेक?

Published: Mon, 25 May 2026 06:04 PM (IST)

China Export Ban India: चीन के नए निर्यात नियमों (डिक्री 834, 835) ने भारत के 120 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स ...और पढ़ें

सप्लाई चेन को हथियार बना रहा चीन, भारत के 120 अरब डॉलर के मैन्युफैक्चरिंग प्लान पर ब्रेक।

सप्लाई चेन को हथियार बना रहा चीन, भारत के 120 अरब डॉलर के मैन्युफैक्चरिंग प्लान पर ब्रेक।

HighLights

  1. चीन के नए निर्यात नियम भारत के लिए चुनौती।

  2. इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो सेक्टर पर सीधा असर।

  3. भारत को घरेलू सप्लाई चेन मजबूत करनी होगी।

नई दिल्ली| कोरोना महामारी के बाद भारत ने खुद को दुनिया की अगली मैन्युफैक्चरिंग ताकत के तौर पर पेश किया। एपल सप्लायर्स ने भारत में विस्तार शुरू किया, सेमीकंडक्टर प्लांट्स के ऐलान हुए और इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ा। लेकिन अब चीन के एक नए फैसले (China New Export Rules) ने भारत के 120 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स सपने पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

चीन ने नए स्टेट काउंसिल डिक्रीस 834 और 835 लागू किए (China Decrees 834 835) हैं, जिनके तहत कई अहम मशीनों, रेयर अर्थ एलिमेंट्स ( Rare Earth Ban India) और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी के एक्सपोर्ट पर सख्ती बढ़ा दी गई है। इसका असर सीधे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो सेक्टर (India Auto China Dependence) पर पड़ सकता है।

भारत की फैक्ट्रियां चीन पर निर्भर

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट 2015 में 8.6 अरब डॉलर था, जो 2025 में बढ़कर 47 अरब डॉलर तक पहुंच गया। सरकार को उम्मीद है कि 2026 के आखिर तक यह आंकड़ा 120 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। लेकिन बड़ी समस्या यह है कि भारत की फैक्ट्रियां अभी भी चीन की मशीनों, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स और कच्चे माल पर काफी हद तक निर्भर हैं।

इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि चीन के नए नियमों के बाद कई कंपनियों ने चीनी सप्लायर्स के साथ इमरजेंसी बातचीत शुरू कर दी है। कंपनियों को डर है कि जरूरी मशीनों और कंपोनेंट्स की सप्लाई प्रभावित हुई तो निवेश, प्रोडक्शन और नए प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ सकता है।

ऑटो सेक्टर में स्थिति और गंभीर

ऑटो सेक्टर में स्थिति और गंभीर मानी जा रही है। भारत वित्त वर्ष 2025 (FY25) में अपने करीब 26 फीसदी ऑटो कंपोनेंट्स चीन से आयात करता है। इनमें हाई-वैल्यू इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप्स शामिल हैं। कार्स अनलिमिटेड के फाउंडर मुस्तफा सिंगापुरवाला के मुताबिक,

आज की आधुनिक कारों में 3000 तक चिप्स इस्तेमाल होते हैं। सप्लाई प्रभावित हुई तो सिर्फ कीमतें नहीं बढ़ेंगी, बल्कि नई गाड़ियों की लॉन्चिंग में देरी, लंबा वेटिंग पीरियड और फीचर्स में कटौती भी देखने को मिल सकती है।"

उन्होंने चेतावनी दी कि चीन अब सिर्फ व्यापारिक दबाव नहीं बना रहा, बल्कि सप्लाई चेन को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। नए नियमों के तहत चीन उन कंपनियों और अधिकारियों पर भी कार्रवाई कर सकता है, जो प्रोडक्शन चीन से बाहर शिफ्ट करने की कोशिश करेंगे।

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50 इंडस्ट्रियल पार्क बनेंगे चीन की काट

केंद्र सरकार ने भी इस खतरे को गंभीरता से लिया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि,

सरकार अब कुछ खास देशों पर निर्भरता कम करने के लिए सेक्टर-आधारित निवेश योजनाएं तैयार कर रही है। इसके साथ ही ₹33,660 करोड़ की 'भारत औद्योगिक विकास योजना' के तहत अगले तीन साल में 50 इंडस्ट्रियल पार्क शुरू करने की तैयारी है।"

एक्सपर्ट बोले- रिसर्च-टेक्नोलॉजी मजबूत करे भारत

हालांकि, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सिर्फ असेंबली यूनिट लगाने से काम नहीं चलेगा। भारत को अपने कंपोनेंट्स, रिसर्च और टेक्नोलॉजी क्षमता भी मजबूत करनी होगी। NXTCELL Mobility के सीईओ अतुल विवेक का कहना है कि भारत के पास मौका जरूर है, लेकिन इसके लिए मजबूत घरेलू सप्लाई नेटवर्क और लॉन्ग-टर्म रणनीति जरूरी होगी।

LEDX Technology के एमडी संकेत रामभिया के मुताबिक दुनिया अब चीन पर पूरी तरह निर्भर रहने के खतरे को समझ चुकी है। कई ग्लोबल कंपनियां चीन से बाहर विकल्प तलाश रही हैं और भारत के पास इस मौके को पकड़ने का बड़ा अवसर है।

हालांकि, यह साफ है कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उतना ही बड़ा खतरा चीन की सप्लाई चेन पकड़ से भी बना हुआ है।