नई दिल्‍ली, पीटीआइ। सस्‍ती दरों पर भी कई राज्‍य सरकारें सस्‍ते इंपोर्टेड प्‍याज खरीदने में दिलचस्‍पी नहीं ले रहे हैं और केंद्र सरकार इस बात को लेकर चिंतित है। मंगलवार को उपभोक्‍ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि हर किचन के लिए जरूरी प्‍याज हम राज्‍य सरकारों को 55 रुपये प्रति किलो की दर से ऑफर कर रहे हैं और परिवहन की लागत भी वहन कर रहे हैं। इसके बावजूद, राज्‍य सरकार इंपोर्टेड प्‍याज की खरीदारी में दिलचस्‍पी नहीं दिखा रहे। 

ज्‍यादातर शहरों में पिछले दो महीने से प्‍याज की खुदरा कीमतें 100 रुपये प्रति किलो से ऊपर चल रही थीं। अब इंपोर्टेड प्‍याज और नई खरीफ फसल के आने के बाद से इनकी कीमतों में नरमी आई है। हालांकि, प्‍याज की कीमतें अब भी सामान्‍य स्‍तर पर नहीं आई हैं। 

पासवान ने कहा, 'अभी तक हपने 36,000 टन प्‍याज का अनुबंध किया है। इसमें से 18,500 टन प्‍याज भारत पहुंच चुका है। काफी सोच-विचार के बाद राज्‍यों ने अबतक मात्र 2,000 टन प्‍याज ही उठाया है।' उन्‍होंने कहा कि कल किसी को कोर्ट जाकर यह नहीं कहना चाहिए कि आयातित प्‍याज खराब होने लगे हैं। 

जब उनसे पूछा गया कि प्‍याज के इतने अधिक आयात के बावजूद कीमतें ज्‍यादा क्‍यों हैं तो उन्‍होंने कहा कि प्‍याज का आयात घरेलू आपूर्ति को बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण के लिए किया गया है। अगर, राज्‍य सरकारें आयातित प्‍याज नहीं उठाते हैं तो फिर हम क्‍या कर सकते हैं। 

अभी तक आंध्र पदेश, केरल, तेलंगाना, उत्‍तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सरकारों ने आयातित प्‍याज उठाया है। कई राज्‍यों ने अपनी मांग वापस ले ली है। 

सूत्रों ने बताया कि आयातित प्‍याज का स्‍वाद घरेलू प्‍याज जैसा नहीं है और जब घरेलू प्‍याज भी बाजार में लगभग समान दर पर उपलब्‍ध है तो उपभोक्‍ता इसे नहीं खरीद रहे हैं।  

उपभोक्‍ता मामलों के सचिव अविनाश श्रीवास्‍तव ने कहा कि मांग कम होने के कारण 5,500 टन प्‍याज की शिपमेंट रद कर दी गई है। उन्‍होंने कहा कि अगले दो दिनों में 4,000 टन आयातित प्‍याज आ जाएगा और महीने के अंत तक 14,500 पहुंचेगा। 

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