Job Alert: सरकारी नौकरी की तैयारी करने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी, केंद्र सरकार के 1.83 लाख से अधिक पदों पर भर्ती शुरू; देखिए लिस्ट
Government Job Vacancies Alert: केंद्र सरकार ने युवाओं के लिए 1.83 लाख से अधिक सरकारी पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू ...और पढ़ें

1.83 लाख सरकारी पद खाली, भर्ती प्रक्रिया हुई शुरू
HighLights
केंद्र सरकार में 1.83 लाख से अधिक पदों पर भर्ती।
रेलवे, SSC, UPSC में निकली बंपर सरकारी नौकरियां।
पेपर लीक रोकने, पारदर्शिता बढ़ाने पर संसदीय पैनल का जोर।
नई दिल्ली: देश के युवाओं और सरकारी नौकरी (Government Jobs) की तैयारी कर रहे अभ्यार्थियों (Candidates) के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार (Central Government) के विभिन्न विभागों में 1.83 लाख (1,83,595) से अधिक रिक्त पदों (Vacancies) को भरने की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी गई है। शीर्ष केंद्रीय आधिकारियों ने हाल ही में एक संसदीय पैनल को इस महत्वपूर्ण कदम की जानकारी दी।
बैठक में क्या हुआ फैसला
हाल के दिनों में हुए पेपर लीक (Paper Leak) मामलों को देखते हुए, इस बैठक में सांसदों (MPs) ने आगामी परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने पर विशेष जोर दिया। पैनल के सदस्यों ने लीक की घटनाओं को रोकने और सुरक्षा की अतिरिक्त परतें जोड़ने के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं ( CBT) के विकल्प को व्यापक रूप से अपनाने का सुझाव दिया है।
किस विभाग में कितनी नौकरियां?
संसदीय पैनल को सौंपे गए आंकड़ों के अनुसार, इस मेगा भर्ती अभियान के तहत सबसे बड़ी हिस्सेदारी भारतीय रेलवे की है:
1. रेलवे (RRBs): सबसे अधिक 1,08,129 पदों पर भर्तियां रेलवे भर्ती बोर्ड द्वारा की जा रही हैं।
2. कर्मचारी चयन आयोग (SSC): दूसरे स्थान पर SSC है, जिसके माध्यम से 65,331 पदों को भरा जाएगा।
3. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC): सिविल सर्विसेज और अन्य शीर्ष स्तर के 10,135 पदों पर नियुक्तियां UPSC के जरिए की जा रही हैं।
| विभाग / एजेंसी | खाली पदों की संख्या | भर्ती का माध्यम |
| रेलवे (RRBs) | 1,08,129 | रेलवे भर्ती बोर्ड |
| SSC | 65,331 | SSC परीक्षाएं |
| कुल केंद्रीय पद | 1.83 लाख+ | विभिन्न एजेंसियां |
| UPSC | 10,135 | सिविस सर्विस भर्ती बोर्ड |
भर्ती को पारदर्शी बनाने के लिए नए प्रस्ताव
बैठक के दौरान कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) तथा UPSC के शीर्ष अधिकारियों ने संसदीय स्थायी समिति को जानकारी दी। इस दौरान पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझावों पर बहस हुई। भाजपा सासंद बृजलाल सहित कुछ समिति सदस्यों ने सुझाव दिया कि UPSC को परीक्षा के तुरंत बाद "फाइनल आंसर की" सार्वजनिक कर देनी चाहिए, न कि परिणाम घोषित होने का इंतजार करना चाहिए। हालांकि, UPSC अधिकारियों ने इस पर असहमति जताते हुए तर्क दिया कि ऐसा करने से अदालती मुकदमों (Litigation) की बाढ़ आ सकती है, जिससे सिविल सेवा परीक्षा का कड़ा शेड्यूल बाधित होने का खतरा रहेगा।
पैनल ने यह भी कहा कि भर्ती एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय (Coordination) होना चाहिए और रिजल्ट जारी करने में देरी को कम किया जाना चाहिए। कई मामलों में परीक्षा और नियुक्ति के बीच लंबा गैप देखने को मिलता है, जिससे उम्मीदवारों को नुकसान होता है
