नई दिल्ली। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग [सीसीआइ] ने बाजार में दवाओं की कीमतें और आपूर्ति प्रभावित करने के मामले में बंगाल केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन [बीसीडीए] पर 18 करोड़ रुपये का मोटा जुर्माना लगाया है। आयोग ने अपने फैसले में कहा कि बीसीडीए और इसके अधिकारी गड़बड़ियों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। सीसीआइ ने संघ और इसके अधिकारियों को प्रतिस्पर्धारोधी गतिविधियां तुरंत रोकने और प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया है।

आयोग ने कुछ केमिस्टों की शिकायत के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। नियामक ने कहा कि बीसीडीए और इसकी जिला एवं जोनल समितियां दवा बिक्री कीमत तय करने व बाजार में इन दवाओं की आपूर्ति नियंत्रित करने में प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर जुड़ी रही हैं। यह काम प्रतिस्पर्धा विरोधी है। एसोसिएशन की पिछले तीन साल की आय की 10 फीसद रकम का जुर्माना बीसीडीए पर और एक्जीक्यूटिव कमेटी सदस्यों पर सात फीसद रकम का जुर्माना लगाया गया है। संघ की कुल 79 इकाइयों पर यह जुर्माना लगा है। साठ दिन के भीतर संघ को इस जुर्माने का भुगतान करना होगा। बीसीडीए पश्चिम बंगाल के थोक एवं रिटेल दवा विक्रेताओं का संगठन है।

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आइसीएआइ की जांच

प्राथमिक जांच में नियमों के उल्लंघन के सुबूत मिलने पर सीसीआइ ने अकाउंटिंग नियामक आइसीएआइ की विस्तृत जांच का आदेश दिया है। आइसीएआइ की ओर से इसके सदस्यों के लिए संचालित किए जाने वाले प्रोफेशनल एजुकेशन प्रोग्रामों में भेदभावपूर्ण व्यवहार के आरोप लगे हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट अरुण आनंदगिरी ने शिकायत की है कि कंटीन्यूइंग प्रोफेशनल एजुकेशन स्कीम [सीपीएसई] को लेकर इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया [आइसीएआइ] की नीतियां भेदभावपूर्ण और अपमानजनक हैं।

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