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BIRC 2026: 150 देशों के खरीदारों के सामने चावल का स्टॉल लगाने का आखिरी मौका, लास्ट टाइम में यहां करें रजिस्ट्रेशन! फीस कितनी?

Published: Mon, 19 Oct 2026 04:22 PM (IST)

भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (BIRC) 2026 का आयोजन 23-25 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगा, जिसका उद्देश्य ...और पढ़ें

BIRC में चावल का स्टॉल लगाने का तरीका

BIRC में चावल का स्टॉल लगाने का तरीका

HighLights

  1. भारत मंडपम में 23-25 अक्टूबर को BIRC 2026 का आयोजन।

  2. 150 से अधिक देशों के खरीदार, 2000 से ज्यादा B2B बैठकें।

  3. वैश्विक चावल बाजार, निर्यात अवसरों पर विशेषज्ञ करेंगे गहन चर्चा।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत के चावल एक्सपोर्ट के बिजनेस को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से और अधिक बढ़ाने के लिए भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (BIRC) 2026 का आयोजन 23 से 25 अक्टूबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जाएगा। सम्मेलन शुरू होने से पहले ही इसमें कारोबारियों और इंटरनेशनल बायर्स की अच्छी भागीदारी देखने को मिल रही है। आयोजकों के मुताबिक, अब तक 150 से अधिक देशों के 4,649 खरीदारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जबकि भाग लेने वाली कंपनियों और खरीदारों के बीच 2,038 बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) बैठकें तय की जा चुकी हैं।

इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में भारत की राइस इंडस्ट्री से जुड़ी 180 से अधिक कंपनियां अपने उत्पादों और कारोबार से जुड़ी क्षमताओं को प्रदर्शित करेंगी। प्रदर्शनी के लिए उपलब्ध जगह लगातार दूसरे साल पूरी तरह बुक हो चुकी हैं। यह आयोजन भारत के चावल निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधे जुड़ने और नए कारोबारी अवसर तलाशने का मंच उपलब्ध कराएगा।

150 से अधिक देशों के खरीदारों की भागीदारी

BIRC 2026 में कुवैत, दक्षिण अफ्रीका, बेनिन, नाइजीरिया, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब समेत चावल इंपोर्ट करने वाले कई महत्वपूर्ण बाजारों से खरीदारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। आयोजकों के मुताबिक, BIRC के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कंपनियों और खरीदारों के बीच बैठकों का समय तय किया गया है। आयोजन के दौरान EY की टीम इन बैठकों के समन्वय में मदद करेगी, ताकि भारतीय सप्लायर्स संभावित अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के साथ सीधे बातचीत कर सकें।

इस इवेंट में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक समेत देश के कई प्रमुख चावल उत्पादक, मिलिंग और कारोबार केंद्रों की भागीदारी रहेगी।

IREF के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देव गर्ग के अनुसार, सम्मेलन के राज्यवार आंकड़ों में दर्ज रजिस्ट्रेशन में करीब 91 प्रतिशत भागीदारी दिल्ली के बाहर से है। महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 13.1 प्रतिशत, दिल्ली की 9.2 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की 8.4-8.4 प्रतिशत, गुजरात की 8.2 प्रतिशत, तमिलनाडु की 6.2 प्रतिशत, मध्य प्रदेश की 5.2 प्रतिशत और कर्नाटक की 5.1 प्रतिशत है।

खुद का स्टॉल कैसे बुक करें?

अगर आप भी अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन में खुद की प्रदर्शनी लगाना चाहते हैं तो इसके लिए ऑनलाइन बुकिंग करा सकते हैं। इसके लिए www.birc.in पर विजिट करें यहां आपको बायर या सप्लायर जैसे विकल्प चुनने का ऑप्शन दिखेगा। इसके अलावा आपको पर्सनल डिटेल भी फिल करनी होगी। कीमत की बात करें तो अलग-अलग तरीके के स्टॉल का ऑप्शन है। वेबसाइट पर दिख रहे रेट लिस्ट में तीन दिन के लिए स्टॉल बुकिंग की शुरुआत 3 × 3 m का स्टॉल ₹1,57,500 + GST के साथ बुक होगा। इसकी कीमत ₹6 लाख के आसपास तक हैं। आप वेबसाइट पर अपने पसंदीदा स्टॉल का साइज और रेट देख सकते हैं।

2027 में चावल के ग्लोबल मार्केट पर रहेगी नजर

सम्मेलन के दौरान 23 और 24 अक्टूबर को कुल 9 सेशन आयोजित किए जाएंगे। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल की डिमांड और सप्लाई, कीमतों में उतार-चढ़ाव, एक्सपोर्ट की चुनौतियों और कारोबार बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा होगी।

प्रमुख सेशन में से एक का विषय है, ‘2027 में वैश्विक चावल की मांग और आपूर्ति का अनुमान: कीमतों में गिरावट या तेजी का नया दौर?’ इसमें S&P Global, BigMint, EY और IREF के विशेषज्ञ वैश्विक चावल बाजार की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। इसमें कीमतों के संभावित रुझानों को तेजी, सामान्य स्थिति और गिरावट जैसे तीन अलग-अलग सेनैरियो के आधार पर समझने की कोशिश की जाएगी।

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इसके अलावा, सम्मेलन में 2027 में नजर रखने योग्य चावल के शीर्ष 10 बाजारों की सूची भी पेश की जाएगी। इसका उद्देश्य भारतीय बासमती और गैर-बासमती चावल के लिए संभावनाओं वाले अंतरराष्ट्रीय बाजारों की पहचान करना है। इसमें मांग, प्रतिस्पर्धा, कीमतों, बाजार तक पहुंच और भुगतान से जुड़े जोखिमों जैसे पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

अन्य सत्रों में निर्यात भुगतान और बीमा, समुद्री माल ढुलाई की लागत, क्वालिटी और सर्टिफिकेशन, सरकारी पॉलिसी और इन्सेंटिव, टिकाऊ उत्पादन, चावल मिलिंग को लाभदायक बनाने और मूल्यवर्धित चावल उत्पादों के कारोबार पर चर्चा होगी।