नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। भारतीय रिजर्व बैंक ने फरवरी 2019 से बेंचमार्क रेपो रेट में 75 बेसिस प्वाइंट को घटाया है। जिसको देखते हुए बैंक भी धीरे-धीरे अपने डिपॉजिट रेट में और खासतौर पर एफडी पर ब्याज दरों को कम कर रहे हैं। हालांकि बैंकों की तरफ से एफडी की दरों में कमी रेपो रेट में गिरावट के साथ नहीं की गई। फरवरी और जून के बीच एसबीआई ने अपनी एफडी पर दी जाने वाली ब्याज दर को 5 साल की अवधि के लिए (2 करोड़ से कम) पर ब्याज दर 6.85 फीसद से घटाकर 6.60 फीसद किया है जो कि रेपो रेट के हिसाब से सिर्फ 25 बेसिस प्वाइंट कम हुए।

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बैंक डिपॉजिट पर ब्याज दर को धीरे कम क्यों कर रहे हैं? जबकि पहले देखा और रिकॉर्ड किया गया है कि बैंक गिरते रेट को देखते हुए तेजी से डिपॉजिट रेट को कम करते हैं और बेंचमार्क रेट में बढ़ोतरी होने पर डिपॉजिट रेट को बढ़ाने में उतनी जल्दी नहीं दिखाते हैं। बैंक जमा हुए पैसों का इस्तेमाल लोन देने के लिए करते हैं। पिछली कुछ तिमाहियों में डिपॉजिट के मुकाबले में लोन में अधिक ग्रोथ हो रही है। ग्रोथ और लोन की डिमांड को पूरा करने के लिए बैंकों को निवेशकों से पैसों की जरूरत होती है और इसलिए रेपो रेट में गिरावट के साथ डिपॉजिट रेट में कमी नहीं की जा रही है। आरबीआई बैंकों की लिक्विडिटी संबंधित दिक्कतों को दूर करने के लिए अन्य कार्य कर रहा है।

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कम होते हुए रेट्स उधार लेने वालों के लिए अच्छे होते हैं जबकि ऐसे में जमा करने वालों को कम रिटर्न के साथ रहना पड़ता है। एफडी रिटेल इंवेस्टर्स के लिए इंवेस्टमेंट का एक पसंदीदा तरीका है जो अपने पैसों को अधिक सुरक्षा के साथ निवेश करना चाहते हैं और उस पर गारंटीड रिटर्न चाहते हैं।

एक्सपर्ट के अनुसार, जिस तरह से रेट कम हो रहे हैं उसके देखते हुए एफडी में लंबे समय के लिए निवेश करना आदर्श रूप से सही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में रेट और ज्यादा कम होने वाले हैं, जिसको देखते हुए एफडी में अभी निवेश करना ठीक है। फाइनेंशियल प्लानर्स सलाह देते हैं कि पूरे अमाउंट को एक ही जगह निवेश नहीं करना चाहिए बल्कि अलग-अलग प्रोडक्ट में निवेश करना चाहिए।

 

Posted By: Sajan Chauhan

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