बैंकों ने बनाई किसानों को लोन देने से दूरी, L&T ने भी घटाया फाइनेंस! ये हैं कर्ज न देने के बड़े कारण
बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) कृषि क्षेत्र को कर्ज देने में सतर्कता बरत रही हैं। RBL बैंक और फेडरल ...और पढ़ें

एग्री सेक्टर के लोन में कमी
HighLights
बैंक और NBFCs कृषि क्षेत्र को कर्ज देने में बरत रहे सतर्कता।
RBL और फेडरल बैंक के कृषि ऋण पोर्टफोलियो में आई गिरावट।
बारिश की कमी, सूखा और अल-नीनो मुख्य चिंता के विषय।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) कृषि और ग्रामीण क्षेत्र में कर्ज देने को लेकर सतर्क रुख अपना रही हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2026) के अब तक घोषित नतीजों से पता चलता है कि कई बैंकों के कुल कर्ज में एग्री सेक्टर की हिस्सेदारी घटी है। कुछ बैंकों के कृषि कर्ज में गिरावट आई है, जबकि अन्य बैंकों में इसकी वृद्धि कुल कर्ज की तुलना में धीमी रही है।
मीडिया रिपोर्ट की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक इसका सबसे बड़ा असर RBL बैंक के कृषि कर्ज पोर्टफोलियो में दिखाई दिया। वहीं, फेडरल बैंक के एग्री लोन में भी गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, एक्सिस बैंक और HDFC बैंक ने एग्री लोन में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन उनके कुल कर्ज में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी फिर भी कम हुई। वित्तीय संस्थानों की यह सतर्कता ऐसे समय में सामने आई है, जब देश के कई राज्यों में बारिश की कमी और खरीफ फसलों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
RBL बैंक के कृषि कर्ज में करीब 12% की गिरावट
RBL बैंक के एग्री लोन पोर्टफोलियो में सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की दूसरी तिमाही में बैंक का कृषि कर्ज सालाना आधार पर करीब 12 प्रतिशत घटकर ₹1,367 करोड़ रह गया। एक साल पहले यह उसके कुल कर्ज का 1.54 प्रतिशत था, जो सितंबर 2026 की तिमाही में घटकर 0.96 प्रतिशत रह गया।
महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति ने कृषि क्षेत्र से जुड़े लोन लेने वाले किसानों की चिंताएं बढ़ाई हैं। राज्य सरकार ने 305 उप-जिलों में सूखा घोषित किया है। RBL बैंक के कृषि कर्ज में आई गिरावट के पीछे क्षेत्रीय परिस्थितियों का असर भी एक अहम पहलू माना जा रहा है।
फेडरल बैंक ने भी कृषि कर्ज देने में दिखाई सतर्कता
फेडरल बैंक के कृषि क्षेत्र को दिए गए कर्ज में भी गिरावट आई है। दूसरी तिमाही में बैंक का कृषि कर्ज सालाना आधार पर करीब 3 प्रतिशत घटकर ₹8,065 करोड़ रह गया। एक साल पहले की तुलना में कुल कर्ज में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 0.50 प्रतिशत अंक घटकर 2.7 प्रतिशत रह गई।
फेडरल बैंक के MD और CEO केवीएस मणियन ने विश्लेषकों के साथ बातचीत में कहा कि बैंक कुछ सेक्टर्स में कर्ज बढ़ाने को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं। कृषि कर्ज के मामले में भी बैंक ने तेजी से विस्तार करने के बजाय सावधानी बरती है। बैंक अल नीनो के असर, भू-राजनीतिक परिस्थितियों, ब्याज दरों और महंगाई पर नजर बनाए हुए है। इनका असर कर्ज की मांग और उसे चुकाने की क्षमता पर पड़ सकता है।
इन बैंकों में मामूली बढ़ोतरी
ICICI बैंक के कृषि कर्ज में वृद्धि जरूर हुई, लेकिन रफ्तार सीमित रही। बैंक का कृषि कर्ज सितंबर 2026 में समाप्त दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 1.7 प्रतिशत बढ़कर ₹32,333 करोड़ पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह ₹31,799 करोड़ था। वहीं कृषि और ग्रामीण कर्ज के मामले में एक्सिस बैंक और HDFC बैंक बाकी बैंकों से अलग दिखाई दिए। दोनों बैंकों ने सालाना आधार पर अपने कृषि कर्ज पोर्टफोलियो में बढ़ोतरी की।
इसके अलावा AXIX बैंक के कृषि कर्ज में सालाना आधार पर 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, बैंक के कुल कर्ज में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 2025-26 की दूसरी तिमाही के 9.3 प्रतिशत से घटकर 2026-27 की दूसरी तिमाही में 8.9 प्रतिशत रह गई। HDFC बैंक का कृषि कर्ज सालाना आधार पर 6.5 प्रतिशत बढ़कर करीब ₹1.3 लाख करोड़ पहुंच गया। इसके बावजूद बैंक के कुल कर्ज में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी एक साल पहले के 4.43 प्रतिशत से घटकर 4 प्रतिशत रह गई।
L&T फाइनेंस ने भी घटाया किसानों को कर्ज देने का डिस्ट्रिब्यूशन
कृषि कर्ज को लेकर सतर्कता का रुझान गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में भी दिखाई दिया। L&T फाइनेंस के किसान फाइनेंशिंग कारोबार के तहत कर्ज डिस्ट्रिब्यूशन में सालाना आधार पर 1% की गिरावट आई। दूसरी तिमाही में यह घटकर ₹1,643 करोड़ रह गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी के कुल कर्ज डिस्ट्रिब्यूशन में किसान फाइनेंस की हिस्सेदारी भी कम हुई। सितंबर 2026 की तिमाही में यह घटकर 6.8 प्रतिशत रह गई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 8.7 प्रतिशत थी।
एग्री लोन घटने के बड़े कारण
एग्री सेक्टर में कर्ज देने वाली वित्तीय कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बारिश की कमी का असर पूरे देश में समान नहीं है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में सूखे की स्थिति कुछ क्षेत्रों के क्रेडिटर्स के लिए जोखिम बढ़ा सकती है। वहीं, देश के कई राज्यों में काम करने वाले बड़े और विविध भौगोलिक क्षेत्रों में फैले बैंकों पर इसका असर अलग हो सकता है।
सिस्टमैटिक्स ग्रुप में बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के प्रमुख एनालिस्ट सिद्धार्थ राजपुरोहित के मुताबिक, समस्या मुख्य रूप से तीन राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि सूखे का असर उन कंपनियों पर अधिक पड़ सकता है, जिनका कारोबार इन क्षेत्रों में केंद्रित है। सभी कंपनियों पर इसका एक जैसा प्रभाव पड़ना जरूरी नहीं है।
यह अंतर कृषि कर्ज के आंकड़ों में भी दिखाई देता है। जहां RBL बैंक और फेडरल बैंक के कृषि कर्ज में गिरावट दर्ज की गई, वहीं एक्सिस बैंक और HDFC बैंक ने अपने कृषि कर्ज पोर्टफोलियो में वृद्धि बनाए रखी।
अल नीनो और रबी सीजन पर रहेगी नजर
वित्तीय संस्थानों के लिए मौसम से जुड़ी अनिश्चितता एक प्रमुख चिंता बनी हुई है। वर्ष 2026 में सुपर अल नीनो की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है। अल नीनो, अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) से जुड़ी एक जलवायु घटना है, जिसका असर समुद्र के तापमान और दुनिया के कई हिस्सों में मौसम के पैटर्न पर पड़ सकता है।
अर्थव्यवस्था के जानकारों के मुताबिक, अब रबी सीजन की बुवाई और बारिश की स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। यदि बारिश की कमी आगे भी बनी रहती है, तो इसका असर रबी फसलों की बुवाई और पैदावार पर पड़ सकता है। इससे किसानों की आमदनी और उनके कर्ज चुकाने की क्षमता प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ सकती है।
