नई दिल्ली। एटीएम के बाहर लग रहीं लंबी-लंबी कतारों के पीछे की असली वजह कैश की किल्लत नहीं बल्कि कुछ और है। दरअसल, बैंकों को आरबीआई की तरफ से जो नकदी मिल रही है वो उसे एटीएम में रखने के बजाए अपने ग्राहकों के लिए बैंक में ही रख रहे हैं। गौरतलब है कि नोटबंदी के बाद एटीएम कैश की किल्लत से जूझ रहे है जिससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है।

देश के एटीएम नेटवर्क को संचालित करने वाली कंपनियां जो की एटीएम तक कैश पहुंचाती है, उनका कहना है कि उन्हें 10 फीसदी से कम नकदी मिल रही है जिसे सिस्टम में सप्लाई किया जा रहा है। बैंकों की इस होर्डिंग (जमाखोरी) के कारण देशभर के 2.2 लाख एटीएम को नए नोटों के हिसाब से तैयार करने के बाद भी लोगों की जरूरत अनुसार कैश नहीं दिया जा रहा। आम जनता की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बैंकों को चेतावनी दी है कि इस तरह की गतिविधियों में शामिल न हो और एटीएम तक पर्याप्त संख्या में कैश पहुंचाया जाए।

इकोनॉमिक अफेयर्स के सेक्रेटरी शक्तिकांत दास का कहना है कि सिर्फ अपने ग्राहकों तक कैश पहुंचाने जैसी बैंकों की गतिविधि बहुत आम है। एटीएम एक बड़ी संख्या में काम कर रहे हैं। यह कहना बिल्कुल गलत है कि महज 13 फीसदी एटीएम ही काम कर रहे हैं। हमने बैंकों को एटीएम में कैश डालने पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है।
देश के एटीएम नेटवर्क को मैनेज करने वाली कंपनी के एक अधिकारी का कहना है शुरुआत में नकदी की किल्लत थी, लेकिन अब सप्लाई एक बड़े स्तर पर बढ़ा दी गई है उसके बाद भी एटीएम में कैश कम पड़ रहा है। इसकी वजह बैंकों की ओर से कैश को अपने यहां जमा करना है। इंडस्ट्री से सूत्रों का मानना है कि देश के 90 फीसदी बड़े बैंक आरबीआई से मिल रहे कैश को केवल अपने ग्राहकों दे रहें है उसमें भी अमीर ग्राहकों को वरीयता दी जा रही है।

आरबीआई की ओर से जारी किए गए डेटा के मुताबिक 10 नवंबर से 10 दिसंबर के बीच 4.6 लाख करोड़ रुपए की करेंसी बैंक काउंटर्स और एटीएम के जरिए लोगों तक पहुंचा दी गई है। यानी कि 15000 करोड़ रुपए हर रोज पुहंचाए जा रहे थे। लेकिन अब यह आंकड़ा 20,000 करोड़ के भी पार है, इसके बाद भी एटीएम में नकदी की किल्लत हो रही है। ऐसा कैश लॉजिस्टिक कंपनी के एक अधिकारी का कहना है।

Posted By: Surbhi Jain

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