पहले चेतक आया या वेस्पा, पैसों के लिए किसने तोड़ा था करार? भारत के सबसे लोकप्रिय स्कूटर के बनने की कहानी
बजाज चेतक और वेस्पा की साझेदारी 1971 में टूटने के बाद राहुल बजाज ने 1972 में स्वदेशी चेतक स्कूटर लॉन्च किया।

AI जनरेटेड फाइल इमेज
HighLights
बजाज और पियाजियो की वेस्पा साझेदारी 1971 में समाप्त हुई।
राहुल बजाज ने 1972 में अपना स्वदेशी चेतक स्कूटर पेश किया।
चेतक की भारी मांग के कारण 10 साल का वेटिंग पीरियड था।
नई दिल्ली। 80 और 90 के दशक में बजाज चेतक व LML Vespa के स्कूटर काफी मशहूर हुए। इनकी पॉपुलेरिटी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बजाज चेतक को खरीदने के लिए 10 साल का वेटिंग पीरियड था। लेकिन, क्या आप जानते हैं बजाज और वेस्पा कभी साझेदार थे लेकिन 70 के दशक में यह पार्टनरशिप टूट गई और फिर भारत में सबसे लोकप्रिय स्कूटर चेतक का उदय हुआ। दरअसल, 1960 के दशक में बजाज ऑटो, इटली की कंपनी पियाजियो (Piaggio) के साथ मिलकर भारत में 'वेस्पा' स्कूटर बनाती थी।
1971 में पियाजियो ने बजाज का लाइसेंस रिन्यू करने से मना कर दिया। इसके बाद बजाज समूह के मालिक राहुल बजाज ने इस झटके को एक अवसर के तौर पर भुनाया और खुद का स्कूटर बनाने का फैसला किया। आइये आपको बताते हैं बजाज चेतक के उदय की कहानी और वेस्पा से जुदा होने का किस्सा...
क्यों टूटी पार्टनरशिप?
60 के दशक में बजाज समूह और पियाजियो के बीच वेस्पा स्कूटर बनाने के लिए 10 साल का कमर्शियल लाइसेंस एग्रीमेंट हुआ था, और वह 1971 में पूरा हो गया। लेकिन, भारत की सख्त नीतियां और रॉयल्टी को लेकर हुए विवाद के चलते यह पार्टनरशिप टूट गई। दरअसल, भारत में उस समय 'लाइसेंस राज' का दौर था और विदेशी निवेश (FDI) व विदेशी मुद्रा को लेकर सरकार की नीतियां बहुत सख्त थीं। सरकार का जोर इस बात पर था कि विदेशी कंपनियां अपनी तकनीक पूरी तरह भारतीय कंपनियों को सौंप दें ताकि भारत आत्मनिर्भर बन सके।
वहीं, पियाजियो इस लाइसेंस को आगे बढ़ाने के लिए जो रॉयल्टी और शर्तें मांग रहा था, वे भारत सरकार के तत्कालीन नियमों के अनुकूल नहीं थीं। सरकार ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए पियाजियो की शर्तों पर लाइसेंस रिन्यू करने की मंजूरी नहीं दी। जब पियाजियो को अपनी मनमुताबिक वित्तीय शर्तें और रॉयल्टी नहीं मिली, तो उसने बजाज के साथ अपना अनुबंध रिन्यू करने से साफ इनकार कर दिया।
71 टूटा करार, 72 में चेतक का आगमन
जब 1971 में पियाजियो ने बजाज समूह से करार तोड़ा तो इसके बाद राहुल बजाज ने 1972 में अपना स्वदेशी स्कूटर 'चेतक' लॉन्च किया। स्कूटर का नाम बजाज समूह ने महान योद्धा महाराणा प्रताप के वफादार और साहसी घोड़े 'चेतक' के नाम पर रखा। खास बात है कि किसी जमाने में चेतक जिस तरह अपने बलिदान के लिए मशहूर हुआ, वैसे ही चेतक स्कूटर मजबूती और भरोसे के चलते भारतीय परिवारों में प्रसिद्ध हुआ।
10 साल का वेटिंग पीरियड
भारतीय बाजार में बजाज चेतक स्कूटर की लोकप्रियता और डिमांड इतनी बढ़ी कि उत्पादन उसके मुकाबले कम पड़ गया। एक वक्त ऐसा भी आया कि चेतक स्कूटर बुक करने के बाद डिलीवरी के लिए लोगों को 10 साल तक का इंतजार करना पड़ा।
1989 में विज्ञापन ने मचाया तहलका
बजाज चेतक को और बेहतर पहचान 1989 में आए एक विज्ञापन ने दिलाई, जिसकी लाइन थीं - बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर 'हमारा बजाज'। दरअसल, यह विज्ञापन उस समय लाया गया जब भारतीय बाजार में जापानी मोटरसाइकिल की एंट्री होने लगी, तब बजाज ने अपनी पकड़ मजबूत रखने के लिए मशहूर विज्ञापन एजेंसी लिंटास के साथ मिलकर यह एड कैंपेन तैयार किया।
