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भारत का सबसे पुराना Soft Drink ब्रांड, 160 साल पहले जब नहीं था कोक तब इस शख्स ने बनाई; ईरान से है कनेक्शन

Published: Sat, 25 Jul 2026 06:34 PM (IST)

पुणे में अर्देशिर ईरानी ने 160 साल पहले भारत का पहला कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक बनाया था, जब कोका-कोला जैसे ब्रांड ...और पढ़ें

भारत का सबसे पुराना सॉफ्ट ड्रिंक: 160 साल पहले एक ईरानी ने पुणे में रखी थी नींव

भारत का सबसे पुराना सॉफ्ट ड्रिंक: 160 साल पहले एक ईरानी ने पुणे में रखी थी नींव

HighLights

  1. अर्देशिर ईरानी ने 160 साल पहले पुणे में सोडा ड्रिंक बनाया।

  2. ब्रिटिश सैनिकों के बीच यह कार्बोनेटेड ड्रिंक तुरंत लोकप्रिय हुआ।

  3. चौथी पीढ़ी 'आर्डीज़' नाम से विरासत को आगे बढ़ा रही है।

नई दिल्ली। आज, सॉफ्ट ड्रिंक्स का नाम सुनते ही कोका-कोला और पेप्सी जैसे बड़े ब्रांड्स की याद आती है। लेकिन आइए, 160 साल पीछे उस समय में चलते हैं जब ये ग्लोबल ब्रांड्स मौजूद भी नहीं थे। पुणे की सड़कों पर, ईरान से आए एक व्यक्ति ने पानी में बुलबुले मिलाकर एक ऐसा स्वाद तैयार किया जिसने ब्रिटिश सैनिकों को अपना दीवाना बना लिया। उनका नाम अर्देशिर खोदादद ईरानी था, और उनकी छोटी सी कोशिश आगे चलकर भारत की सबसे पुरानी सोडा कंपनियों में से एक बन गई।

दिलचस्प बात यह है कि उस बोतल की कहानी लगभग डेढ़ सदी बाद भी खत्म नहीं हुई; अर्देशिर की चौथी पीढ़ी आज भी 'Ardy's' (आर्डीज़) के नाम से उस विरासत को आगे बढ़ा रही है। ईरान से भारत आए एक व्यक्ति ने आखिर कैसे सोडा का यह घरेलू कारोबार खड़ा किया? यह कहानी जितनी पुरानी है, उतनी ही दिलचस्प भी है।

दुनिया भर में कोका-कोला और पेप्सी जैसे कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक्स के मशहूर होने से पहले ही, भारतीय उपमहाद्वीप में एक और ड्रिंक बहुत लोकप्रिय थी। यह ड्रिंक ईरान से आए पारसी लोगों ने भारत के पुणे शहर में बनाई थी और यह बहुत ज़्यादा फ़िज़ी (झागदार) थी। यह कहानी अर्देशिर खोदादाद ईरानी की है, जिन्होंने कोका-कोला और पेप्सी जैसी कंपनियों के दबदबे से बहुत पहले दुनिया को शायद पहला कार्बोनेटेड ड्रिंक दिया था।

यह सब कैसे शुरू हुआ

19वीं सदी के आखिर में, यानी 1860 के दशक के आसपास, अर्देशिर को उस इलाके में हो रहे धार्मिक उत्पीड़न की वजह से ईरान छोड़कर भागना पड़ा। अर्देशिर पहले क्वेटा (जो अब पाकिस्तान में है) और फिर नौकरी की तलाश में मुंबई आए, लेकिन वहाँ बात नहीं बनी। इसके बाद, वे नए शहर में अपनी किस्मत आज़माने और रोज़ी-रोटी कमाने के लिए पुणे चले गए।

उस समय तक, पुणे ब्रिटिश सेना का एक अच्छी तरह से बसा हुआ कैंप बन चुका था, जहाँ ब्रिटिश सैनिक दिन भर काम करने के बाद आराम करने और शराब पीकर सुकून पाने के लिए इकट्ठा होते थे। उस दौर में, पुणे में सोडा वॉटर बनाने वाली सिर्फ़ एक ही कंपनी थी और उसे भी सोडा वॉटर बनाने के सामान के लिए बाहरी दुनिया पर निर्भर रहना पड़ता था। इसकी वजह से अक्सर छावनी के बार और कैंटीन में सोडा वॉटर की कमी हो जाती थी, जिससे सैनिक नाराज़ हो जाते थे।

अर्देशिर ईरानी ने इसमें बिज़नेस का मौका देखा और अपना खुद का कार्बोनेटेड ड्रिंक तैयार किया। इस नए आइडिया को आगे बढ़ाते हुए, अर्देशिर ने पुणे के कैंटोनमेंट इलाके में शरबतवाला चौक के पास अपनी सोडा कंपनी शुरू की, जो दुनिया की पहली सोडा कंपनियों में से एक थी। उन्होंने चारकोल की मदद से पानी में CO2 मिलाकर कार्बोनेटेड ड्रिंक बनाना शुरू किया।

शुरू में, अर्देशिर कम मात्रा में ड्रिंक बनाते थे और उसे कैंप में सैनिकों के बीच बांटते थे। यह तुरंत हिट हो गया। सैनिकों ने ड्रिंक को बहुत पसंद किया और वे दिन खत्म होने का इंतज़ार करते थे ताकि शाम को अर्देशिर का नया सोडा ड्रिंक पी सकें। कुछ ही महीनों में, अर्देशिर का सोडा शहर में चर्चा का विषय बन गया और अर्देशिर ईरानी ने इसे बड़े पैमाने पर बनाना शुरू कर दिया, और कैंप में सैनिकों के लिए बड़ी खेप भेजने लगे।

आज भी महाराष्ट्र में बिक रहा

अर्देशिर का सोडा आज भी महाराष्ट्र में एक नए नाम 'आर्डीज़' (Ardy's) से बिक रहा है। अर्देशिर ईरानी की चौथी पीढ़ी के मर्ज़बान ईरानी, 'द सोडा कंपनी' के तहत अपने परदादा के फिज़ी मैजिक को ज़िंदा रखे हुए हैं। हालाँकि, बिज़नेस को स्थापित विदेशी और घरेलू बेवरेज कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल रही है।

साथ ही, लॉजिस्टिक्स की चुनौतियां भी हैं। आर्डीज़ ड्रिंक सिर्फ़ कांच की बोतल में आती है। इससे लंबी दूरी तक सप्लाई करने में दिक्कत होती है क्योंकि कांच की बोतलें सिर्फ़ 200 किमी के दायरे से ही वापस लाई जा सकती हैं। कांच की बोतलों का एकमात्र विकल्प प्लास्टिक कंटेनर (या PET) है, लेकिन मर्ज़बान को चिंता है कि इससे सोडा की क्वालिटी और पर्यावरण प्रदूषण पर क्या असर पड़ेगा।

इन चुनौतियों के बावजूद, मर्ज़बान बिज़नेस को आगे बढ़ा रहे हैं और कई ऐसे फ्लेवर ला रहे हैं जो हर भारतीय की पसंद के अनुरूप हों। कोका-कोला और पेप्सी जैसे ब्रांड्स के आने से अर्देशिर ईरानी के सोडा ड्रिंक पर शायद असर पड़ा हो, लेकिन जिन लोगों ने अर्देशिर के मैजिक ड्रिंक का स्वाद चखा है, वे पुराने दिनों को याद करेंगे और इसकी पुरानी शान को वापस लाना चाहेंगे। यह एक ईरानी प्रवासी के कार्बोनेटेड ड्रिंक का असर था, जिसने सॉफ्ट ड्रिंक्स की दुनिया में नई शुरुआत की थी।

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