अदाणी के खिलाफ लामबंद हुईं एयरलाइंस, कहा- दिखाओ 6 साल का रिकॉर्ड, तब तक नवी मुंबई शिफ्ट नहीं होंगी फ्लाइट्स!
Navi Mumbai International Airport News: अदाणी समूह और एयरलाइंस के बीच नवी मुंबई एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स शिफ्ट करने को लेकर ...और पढ़ें

'पहले 6 साल का रिकॉर्ड दिखाओ', अदाणी के खिलाफ एयरलाइंस लामबंद; नवी मुंबई शिफ्ट न होने पर क्यों अड़ी कंपनियां?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मौजूदा फ्लाइट्स शिफ्ट करने को लेकर अदाणी समूह और एयरलाइंस के बीच विवाद बढ़ गया है। एयरलाइन ऑपरेटर कमेटी (AOC) ने मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 (T1) के रीडेवलपमेंट को लेकर 2020 से हुई सभी बैठकों, बातचीत और फैसलों का रिकॉर्ड मांगा है।
एयरलाइंस का कहना है कि, "जरूरी डेटा और विस्तृत प्लान सामने आने तक मौजूदा इंटरनेशनल फ्लाइट्स को नवी मुंबई शिफ्ट करने पर सहमति नहीं दी जा सकती।"
मुंबई और नवी मुंबई दोनों एयरपोर्ट अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (AAHL) के नियंत्रण में हैं। एएएचएल ने शनिवार यानी 3 अक्टूबर को कहा था कि मुंबई एयरपोर्ट के करीब 60 साल पुराने टर्मिनल-1 को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं हैं। इसलिए एयरलाइंस से कहा गया है कि वह अपनी करीब 33% इंटरनेशनल सर्विस को 25 अक्टूबर तक नवी मुंबई एयरपोर्ट पर शिफ्ट करें।
6 साल की बातचीत का रिकॉर्ड मांगा
एयरलाइंस ऑपरेटर्स कमेटी ने एएएचएल से पूछा है कि, "अगर T1 के भविष्य और उसके पुनर्विकास पर 2020 से ही बड़े स्तर पर बातचीत हो रही थी, तो उस बातचीत का रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।"
एओसी ने 2020 से हुई बैठकों के मिनट्स की मीटिंग (MoM), बातचीत के रिकॉर्ड और डॉक्यूमेंटेड नतीजे सभी संबंधित पक्षों के साथ साझा करने की मांग की है। एयरलाइंस ने यह भी याद दिलाया कि
"अदाणी समूह ने मुंबई एयरपोर्ट का संचालन 2021 के मध्य में संभाला था। ऐसे में 2020 से हुई बातचीत के दावे के आधार और उसमें अदाणी समूह की भूमिका को स्पष्ट करने की जरूरत है।"
33% फ्लाइट शिफ्ट करने का आधार क्या?
एयरलाइंस की सबसे बड़ी आपत्ति 33% इंटरनेशनल ट्रैफिक को नवी मुंबई भेजने के फैसले को लेकर है। एओसी ने पूछा है कि 33% का आंकड़ा आखिर किस आधार पर तय किया गया है। कमेटी जानना चाहती है कि इस आंकड़े का आधार क्या है। इसे लेकर 5 पॉइंट्स में जवाब भी मांगे हैं।
- टर्मिनल की क्षमता पर आधारित है या यात्री ट्रैफिक पर?
- उड़ानों या एयरपोर्ट स्लॉट के आधार पर तय किया गया है?
- क्षमता का आकलन किस तरीके से किया गया?
- किस बैठक में एयरलाइंस के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई?
- क्या स्लॉट में बदलाव के लिए IATA की अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइंस को ध्यान में रखा गया?
एओसी ने कहा है कि एयरलाइंस T1 के सुरक्षित और समय पर पुनर्विकास का समर्थन करती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बिना पर्याप्त डेटा और बातचीत के मौजूदा उड़ानों या स्लॉट में कटौती को मंजूरी दे दी जाए।
टर्मिलन-1 (T1) की क्षमता पर भी सवाल
एएएचएल के मुताबिक, टर्मिनल-1 से करीब 50 लाख घरेलू यात्रियों की सालाना क्षमता को टर्मिलन-2 (T2) में शिफ्ट करना होगा। इसके चलते T2 से संचालित करीब 33% इंटरनेशनल उड़ानों को नवी मुंबई भेजने की जरूरत बताई गई है। लेकिन AOC ने मुंबई एयरपोर्ट के T1 और T2 के 2026 के हर महीने के वास्तविक क्षमता उपयोग का डेटा मांगा है। साथ ही दोनों टर्मिनलों की मौजूदा और घोषित यात्री क्षमता भी मांगी गई है। एयरलाइंस का कहना है कि,
"T1 अभी करीब 1 करोड़ यात्री सालाना संभाल रहा है, जबकि इसकी घोषित क्षमता करीब 1.5 करोड़ यात्री सालाना है। इसलिए फ्लाइट्स को नवी मुंबई भेजने की जरूरत का विस्तृत आधार सामने आना चाहिए।"
नवी मुंबई एयरपोर्ट के इंसेंटिव भी काम नहीं आए
एएएचएल ने एयरलाइंस को नवी मुंबई एयरपोर्ट पर नई इंटरनेशनल उड़ानों के लिए लैंडिंग फीस में 100% छूट और दोनों एयरपोर्ट के UDF अंतर को कम करने के लिए कैश वाउचर देने की बात कही है।
हालांकि, AOC का कहना है कि फिलहाल एयरलाइंस की प्राथमिकता इंसेंटिव नहीं, बल्कि T1 के रीडेवलपमेंट का पूरा प्लान, समय-सीमा, क्षमता का आकलन और ऑपरेशनल बदलावों की जानकारी है। एयरलाइंस ने साफ कहा है कि,
"जरूरी डेटा और विस्तृत प्लान मिलने तथा उचित बातचीत होने तक वह अपनी मौजूदा उड़ानों या स्लॉट में एकतरफा कटौती, कैंसिलेशन या नवी मुंबई में शिफ्टिंग को मंजूरी नहीं दे सकतीं।"
एओसी का कहना है कि उसका उद्देश्य T1 के पुनर्विकास का विरोध करना नहीं है। वह चाहती है कि नवी मुंबई एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स शिफ्ट करने का फैसला पारदर्शी प्रक्रिया, पर्याप्त डेटा और एयरलाइंस से उचित बातचीत के आधार पर हो, ताकि यात्रियों की कनेक्टिविटी और मौजूदा एयरलाइन ऑपरेशन्स पर अनावश्यक असर न पड़े।
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