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10000 KM लंबा, 4200 करोड़ लागत, टाटा समूह बनाने जा रहा AI सुपर हाईवे; जानिए क्या बदलाव लाएगा ये प्रोजेक्ट?

Published: Mon, 26 Oct 2026 05:06 PM (IST)

टाटा कम्युनिकेशंस भारत में 'AI सुपर हाईवे' बनाने के लिए अगले 3-5 वर्षों में $450 मिलियन तक का निवेश करेगी।

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HighLights

  1. टाटा कम्युनिकेशंस $450 मिलियन का निवेश करेगी 'AI सुपर हाईवे' में।

  2. भारत के डेटा सेंटरों और AI हब को जोड़ेगा 10,000 KM नेटवर्क।

  3. डेटा सेंटर कनेक्टिविटी मार्केट में 30-40% हिस्सेदारी का लक्ष्य।

नई दिल्ली। टाटा समूह की कंपनी टाटा कम्युनिकेशन्स, "AI सुपर हाईवे" बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है और इसके लिए अगले तीन से पांच वर्षों में 450 मिलियन डॉलर (42,83,15,17,500 रुपये) तक का निवेश करने की योजना बना रही है। इस प्रोजेक्ट का मकसद भारत के प्रमुख डेटा सेंटरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हब को आपस में जोड़ना होगा।

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट एंड ग्लोबल बिजनेस हेड, रुपेश चोकसी ने बताया कि कंपनी 10,000 किलोमीटर लंबा AI-रेडी फाइबर नेटवर्क बनाने की योजना बना रही है। साथ ही, डेटा सेंटर से डेटा सेंटर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में कंपनी 30-40 प्रतिशत मार्केट शेयर हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

कंपनी ने और क्या बताया?

रुपेश चोकसी ने कहा, "जैसे-जैसे हम अपनी क्षमता बढ़ा रहे हैं, हमारा लक्ष्य उन कामों में लगभग 30 से 40 प्रतिशत मार्केट शेयर हासिल करना है, जिनके लिए हम प्रयास कर सकते हैं।" उन्होंने बताया कि कंपनी अपने प्रस्तावित 'AI सुपर हाईवे' के लिए ग्राहकों के साथ बातचीत के एडवांस फेज में है, लेकिन अभी तक इस नेटवर्क के लिए किसी कॉन्ट्रैक्ट का एलान नहीं किया गया है।

इस निवेश का मुख्य उपयोग उन शहरों को जोड़ने वाले लॉन्ग-हॉल और मेट्रो टेरेस्ट्रियल फाइबर नेटवर्क के लिए किया जाएगा, जहाँ AI डेटा सेंटर और एप्लिकेशन हब स्थित हैं। कंपनी के व्यापक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर के ज़रिए, सबसी कनेक्टिविटी इस पहल को और मज़बूत बनाएगी।

टाटा कम्युनिकेशंस का अनुमान है कि AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते निवेश के चलते, मध्यम अवधि में भारत का 'डेटा सेंटर-टू-डेटा सेंटर कनेक्टिविटी' मार्केट 1 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है। कंपनी की योजना तीन से पांच वर्षों में पूंजी लगाने की है। इसमें ट्रैफिक के अनुमान, क्षमता की जरूरत और डेटा सेंटर के विकास की गति के आधार पर अलग-अलग कॉरिडोर को प्राथमिकता दी जाएगी।

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चोकसी ने बताया कि इस तरह के निवेश से आमतौर पर 15-20 प्रतिशत का रिटर्न मिलता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इसमें शामिल एसेट्स (संपत्तियां) और ग्राहकों के साथ किए गए अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) लंबे समय के लिए होते हैं।