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एलन मस्क को टक्कर देने की तैयारी! Agnikul को मिले ₹200 करोड़, अब भारत बनाएगा रीयूजेबल 'अग्निबाण' रॉकेट

Published: Mon, 28 Sep 2026 03:06 PM (IST)

भारतीय स्पेस स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस को अपने रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल 'अग्निबाण आरएलवी' के विकास के लिए सरकार से 200 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली है।

स्पेस मार्केट में मचेगा तहलका

स्पेस मार्केट में मचेगा तहलका

HighLights

  1. अग्निकुल कॉसमॉस को 200 करोड़ रुपये की सरकारी फंडिंग मिली।

  2. कंपनी रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल 'अग्निबाण आरएलवी' विकसित करेगी।

  3. भारत ग्लोबल स्पेस मार्केट में अपनी जगह बनाएगा।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: अंतरिक्ष की दुनिया में भारत अब एक ऐसी लंबी छलांग लगाने जा रहा है, जो ग्लोबल स्पेस मार्केट में विदेशी कंपनियों के पसीने छुड़ा सकती है। भारतीय स्पेस स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस (Agnikul Cosmos) को अपने रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल (बार-बार इस्तेमाल होने वाले रॉकेट) को विकसित करने के लिए 200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम सरकारी फंडिंग मिली है। इस धांसू प्रोजेक्ट का नाम 'अग्निबाण आरएलवी' (Agnibaan RLV) रखा गया है।

इस 200 करोड़ की फंडिंग का सीधा सा मतलब है कि भारत अब एलन मस्क की स्पेसएक्स की तर्ज पर ऐसे रॉकेट बनाने पर आक्रामक रूप से काम कर रहा है, जो अंतरिक्ष में सैटेलाइट छोड़कर वापस धरती पर लौट आएं और उन्हें दोबारा लॉन्च के लिए इस्तेमाल किया जा सके।

200 करोड़ का मेगा एग्रीमेंट

टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) और अग्निकुल कॉसमॉस के बीच इस अहम प्रोजेक्ट के लिए 200 करोड़ रुपये का करार हुआ है। यह भारी-भरकम राशि रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फंड के तहत दी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना और भारत को कमर्शियल स्पेस लॉन्चिंग का ग्लोबल हब बनाना है।

सिर्फ पहला स्टेज नहीं, पूरा सिस्टम होगा रीयूजेबल

अग्निकुल का यह प्रोजेक्ट सिर्फ रॉकेट के पहले हिस्से (First Stage) को धरती पर वापस लाने तक सीमित नहीं है। कंपनी की तैयारी पूरे के पूरे लॉन्च सिस्टम को अधिकतम रीयूजेबल (दोबारा इस्तेमाल के लायक) बनाने की है। इससे भविष्य में रॉकेट लॉन्च की फ्रीक्वेंसी (रफ्तार) कई गुना बढ़ जाएगी।

TRL-4 से TRL-8 का सफर

इस 200 करोड़ के 'सरकारी बूस्टर' की मदद से अग्निकुल अपनी मौजूदा तकनीक को TRL-4 (टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल) से सीधे TRL-8 के एडवांस स्तर तक ले जाएगा। इसमें री-यूजेबल अपर स्टेज, सेमी-क्रायोजेनिक लिक्विड प्रोपल्शन, डीप थ्रॉटलिंग, रीस्टार्ट क्षमता और सटीक डिसेंट (वापसी) प्रोपल्शन सिस्टम जैसी हाई-टेक चीजें शामिल होंगी।

अग्निकुल का रिकॉर्ड पहले से है दमदार

सरकार ने यह 200 करोड़ का दांव किसी नौसिखिये पर नहीं खेला है। अग्निकुल कॉसमॉस ने पहले ही अपना दम दिखाया है। कंपनी ने 'अग्निलेट' नाम का दुनिया का पहला सिंगल-पीस 3D प्रिंटेड रॉकेट इंजन खुद डिजाइन और इन-हाउस बनाया है। इसके अलावा, इसी साल मई 2024 में कंपनी ने अपने सिंगल स्टेज व्हीकल 'अग्निबाण SORTED' की पहली सफल उड़ान भी पूरी की थी। इससे पहले भी छोटे सैटेलाइट व्हीकल बनाने के लिए TDB अग्निकुल की मदद कर चुका है।

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