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अदाणी का धमाका! खड़ी की 6.63 गीगावाट-घंटे की विशाल बैटरी स्टोरेज क्षमता; एक साथ 20 लाख घर हो सकते हैं रोशन

By IANSEdited By: Gyanendra Tiwari
Published: Thu, 01 Oct 2026 03:03 PM (IST)

अदाणी ग्रीन एनर्जी ने गुजरात के खावड़ा में अपनी ऑपरेशनल बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) क्षमता को 14 महीनों में ...और पढ़ें

अदाणी ग्रीन एनर्जी ने 14 महीनों में बैटरी स्टोरेज क्षमता को 6.63 गीगावाट-घंटा तक बढ़ाया

अदाणी ग्रीन एनर्जी ने 14 महीनों में बैटरी स्टोरेज क्षमता को 6.63 गीगावाट-घंटा तक बढ़ाया

HighLights

  1. खावड़ा में 6.63 गीगावाट-घंटे BESS क्षमता 14 महीनों में हासिल।

  2. भारत की कुल ऑपरेशनल BESS क्षमता का 50% से अधिक।

  3. 20 लाख घरों को बिजली, ग्रिड स्थिरता में सहायक।

एजेंसी, नई दिल्ली। अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (Adani Green Energy Limited) ने गुरुवार को कहा कि उसने गुजरात के खावड़ा में अपनी ऑपरेशनल बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (Battery Energy Storage System) क्षमता को जून 2026 के 3.55 गीगावाट-घंटे से बढ़ाकर 6.63 गीगावाट-घंटे कर दिया है।

देश की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी के पास अब भारत की लगभग 12.6 गीगावाट-घंटे की ऑपरेशनल बीईएसएस क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है।

सागर अदाणी ने कही यह बात

अदाणी ग्रीन एनर्जी के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी ने कहा, "सिर्फ 14 महीनों में 6.63 गीगावाट-घंटे की ऑपरेशनल बैटरी स्टोरेज क्षमता हासिल करना एजीईएल और भारत के स्वच्छ ऊर्जा बदलाव के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस स्तर पर स्टोरेज अक्षय ऊर्जा से बनने वाली बिजली को अधिक स्थिर, भरोसेमंद और जरूरत पड़ने पर ग्रिड में उपलब्ध कराने योग्य बना सकता है।"

उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे भारत में बिजली की मांग बढ़ रही है, हम बैटरी और पंप्ड स्टोरेज दोनों तरह के ऊर्जा भंडारण समाधानों का विस्तार जारी रखेंगे, ताकि अधिक मजबूत और कम कार्बन वाले बिजली ग्रिड को समर्थन दिया जा सके।"

20 लाख घरों को दी जा सकती है बिजली

6.63 गीगावाट-घंटे की बीईएसएस क्षमता इतनी स्वच्छ ऊर्जा स्टोर कर सकती है, जिससे करीब 20 लाख घरों को एक दिन तक बिजली दी जा सकती है। साथ ही, यह नागपुर, पटना या विशाखापत्तनम जैसे शहरों की पीक बिजली मांग को कई घंटों तक पूरा करने में मदद कर सकती है।

खावड़ा में यह BESS क्षमता 1.5 लाख से अधिक मध्यम आकार के इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बैटरी स्टोरेज क्षमता के बराबर है। यह प्रतिदिन इतनी ऊर्जा स्टोर कर सकती है, जो दिल्ली मेट्रो की अनुमानित दैनिक बिजली जरूरत के लगभग दोगुने के बराबर है।

कंपनी ने कहा कि बीईएसएस क्षमता को बढ़ाकर 6.63 गीगावाट-घंटे करने से अक्षय ऊर्जा को ग्रिड में बेहतर तरीके से एकीकृत करने में मदद मिलेगी। इसके जरिए स्वच्छ बिजली को स्टोर करके जरूरत पड़ने पर ग्रिड में उपलब्ध कराया जा सकता है।

यह उपलब्धि खावड़ा की स्थिति को एक ही स्थान पर दुनिया की सबसे बड़ी ऑपरेशनल बैटरी एनर्जी स्टोरेज स्थापना के रूप में और मजबूत करती है। यह बीईएसएस खावड़ा में एजीईएल के अक्षय ऊर्जा विकास प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ है। कंपनी यहां 538 वर्ग किलोमीटर के बंजर क्षेत्र में 30 गीगावाट का अक्षय ऊर्जा संयंत्र विकसित कर रही है।

BESS में लिथियम-आयन बैटरी तकनीक का हुआ है इस्तेमाल

BESS में लिथियम-आयन बैटरी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसे एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम (ईएमएस) और ऑटोमेटेड टेलीमेट्री के साथ जोड़ा गया है, जो बैटरी की चार्जिंग और डिस्चार्जिंग को नियंत्रित करने, सिस्टम के प्रदर्शन को बेहतर बनाने और ग्रिड सेवाओं में सहायता करने का काम करता है।

बैटरी स्टोरेज से ग्रिड की स्थिरता बढ़ाने, पीक डिमांड को मैनेज करने, ऊर्जा की बर्बादी कम करने और जरूरत के समय अक्षय ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। एजीईएल ने कहा कि वह वित्त वर्ष 2026-27 में 10 गीगावाट-घंटे से अधिक BESS क्षमता जोड़ने की राह पर है। कंपनी का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में 50 गीगावाट-घंटे की स्टोरेज क्षमता हासिल करना है।

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