किसानों की खाद के लिए चीन के भरोसे नहीं रहेगा भारत, ACFI ने बनाया गजब का रोडमैप! सरकार से मांगे ₹7,500 करोड़
भारत अपनी आधी से अधिक रासायनिक उर्वरक निर्भरता चीन पर कम करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। एग्रो ...और पढ़ें

ACFI की सालाना आम बैठक
HighLights
ACFI ने ₹7,500 करोड़ के विशेष सहायता कार्यक्रम की मांग की।
घरेलू एग्रोकेमिकल उत्पादन बढ़ाकर चीन पर निर्भरता कम करना लक्ष्य।
आठ साल का रोडमैप, इंसेंटिव और सब्सिडी की सिफारिशें शामिल।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत ईंधन की ही तरह केमिकल फर्जिलाइजर का भी बड़ा आयातक देश है। इसके लिए हमारी आधे से अधिक निर्भरता चीन पर है। एग्रो केम फेडरेशन ऑफ इंडिया (ACFI) ने केंद्र सरकार से फसल सुरक्षा उद्योग को मजबूत करने के लिए ₹5,000 से ₹7,500 करोड़ के विशेष सहायता कार्यक्रम की मांग की है। संगठन का कहना है कि इस तरह की लक्षित और समयबद्ध नीति से देश में एग्रोकेमिकल टेक्निकल्स और इंटरमीडिएट्स के घरेलू प्रोडक्शन को बढ़ावा मिलेगा साथ ही चीन पर निर्भरता कम होगी और भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेगा।
ACFI और KPMG इंडिया द्वारा जारी नॉलेज पेपर “रीडिफाइनिंग इंडियन क्रॉप प्रोटेक्शन थ्रू इनोवेशन: फ्रॉम स्केल टू साइंस” में कहा गया है कि भारतीय एग्रोकेमिकल इंडस्ट्री ग्लोबल मैन्यूफैक्चरिंग केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है, लेकिन भविष्य की प्रतिस्पर्धा केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने से नहीं, बल्कि आधुनिकता, जैविक समाधान, डिजिटल कृषि और उन्नत तकनीकों को अपनाने से तय होगी।
8 सालों का रोडमैप रेडी
ACFI के चेयरमैन राहुल धानुका ने कहा कि किसानों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आधुनिकता, मजबूत सप्लाई चेन, डिजिटलाइजेशन और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी तकनीक की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उसे किसानों तक कितनी प्रभावी, आसान और भरोसेमंद तरीके से पहुंचाया जा सकता है।
रिपोर्ट में सात से आठ सालों की सहायता अवधि का प्रस्ताव दिया गया है। इसके तहत प्लांट्स स्थापित करने के लिए शुरुआती दो से तीन साल और उसके बाद प्रोडक्शन आधारित सहायता देने की सिफारिश की गई है। प्रस्तावित स्ट्रक्चर में बड़े उद्योगों के साथ-साथ MSMEs को भी शामिल करने की बात कही गई है। यह व्यवस्था ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड दोनों तरह की परियोजनाओं पर लागू हो सकती है।
इंसेंटिव और सब्सिडी की मांग
रिपोर्ट के अनुसार, चीन को मिलने वाले लागत लाभ का मुकाबला करने के लिए अतिरिक्त बिक्री पर 5-8% इंसेंटिव, औद्योगिक बिजली पर 30-40 प्रतिशत सब्सिडी और साझा कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) के उपयोग पर सहायता दी जानी चाहिए। इसके अलावा PLI जैसी योजना, अनुसंधान एवं विकास के लिए पूंजीगत अनुदान और उपयोगिता लागत में राहत देने की भी सिफारिश की गई है।
ACFI-KPMG रिपोर्ट में विशेष एग्रोकेमिकल मैन्युफैक्चरिंग पार्क, क्लस्टर आधारित पर्यावरणीय बुनियादी ढांचे, लॉन्ग टर्म फाइनेंस और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इंटरमीडिएट्स में बैकवर्ड इंटीग्रेशन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। साथ ही केंद्र और राज्य स्तर की मंजूरियों के लिए सिंगल-विंडो डिजिटल व्यवस्था तथा जैविक फसल सुरक्षा उत्पादों के लिए स्पष्ट नियामक ढांचा विकसित करने की जरूरत बताई गई है।
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रिपोर्ट में बायोलॉजिकल क्रॉप प्रोटेक्शन को भारत के लिए बड़ा अवसर बताया गया है। इसमें कहा गया है कि देश की जैव विविधता, वैज्ञानिक क्षमता और कृषि आधार इस क्षेत्र में भारत को वैश्विक बढ़त दिला सकते हैं। हालांकि बड़े पैमाने पर व्यावसायीकरण के लिए गुणवत्ता की एकरूपता, फॉर्मुलेशन स्थिरता, फील्ड वैलिडेशन और किसानों द्वारा व्यापक स्वीकृति सुनिश्चित करनी होगी।
एक्सपर्ट्स ने दी सलाह
ACFI की सालाना आम बैठक (AGM) के बाद आयोजित एक पैनल चर्चा में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने मॉडर्न एग्रीकल्चर, जैव प्रौद्योगिकी, नैनो टेक्नोलॉजी और डिजिटल कृषि की भूमिका पर चर्चा की। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कृषि के भविष्य के लिए फसल सुरक्षा, बायोलॉजिकल्स, बेहतर बीज, पोषण और डिजिटल तकनीकों को एकीकृत रूप से विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि किसानों का भरोसा जीतने वाले, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और टिकाऊ समाधान ही भविष्य में सफल होंगे।
रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि भारत को ग्लोबल लेबल पर प्रतिस्पर्धी फसल सुरक्षा इकोसिस्टम बनाने के लिए सरकार, उद्योग, अनुसंधान संस्थानों, निवेशकों और किसानों के बीच मजबूत सहयोग की जरूरत होगी। तभी देश विनिर्माण के साथ-साथ नवाचार और वैश्विक बाजारों के लिए नए समाधान विकसित करने में अग्रणी भूमिका निभा सकेगा।
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