8th Pay Commission: ₹18000 बेसिक वालों की सैलरी होगी ₹94000? यह कितना संभव, एम राघवैया ने समझा दिया पूरा गणित
8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग पर केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी बढ़ोतरी की चर्चा तेज है। NFIR के एम. राघवैया ...और पढ़ें
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8th Pay Commission: ₹18000 बेसिक वालों की सैलरी ₹94000 होगी? यह कितना संभव, एम राघवैया ने समझा दिया पूरा गणित
HighLights
वेतन आयोग का उद्देश्य सेवा गुणवत्ता, योगदान का आकलन।
कठिन परिस्थितियों में कार्यरत कर्मचारियों का मूल्यांकन आवश्यक है।
कर्मचारियों के जोखिम और योगदान को अनदेखा नहीं करना चाहिए।
नई दिल्ली| देश में आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के बीच चर्चाएं तेज हैं। लेकिन इस वक्त उस संभावना पर बहस हो रही है, जिसमें 18,000 रुपए बेसिक वेतन पाने वाले कर्मचारी की ग्रॉस सैलरी बढ़कर करीब 94,000 रुपए तक पहुंच सकती है। इस मुद्दे पर नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (NFIR) के जनरल सेक्रेटरी एम राघवैया ने अपनी राय रखी है।
इंटरव्यू के दौरान जब यह गणना सामने रखी गई कि 18,000 रुपए बेसिक वेतन वाले कर्मचारी का बेसिक वेतन बढ़कर करीब 69,000 रुपए हो सकता है और उसकी कुल ग्रॉस सैलरी लगभग 94,000 रुपए तक पहुंच सकती है, तब सवाल उठाया गया कि क्या इतनी बड़ी बढ़ोतरी वास्तव में संभव है।
एम राघवैया ने क्या-क्या समझा दिया?
इस पर एम. राघवैया ने कहा कि,
वेतन आयोग का मुख्य उद्देश्य केवल वेतन बढ़ाना नहीं, बल्कि कर्मचारियों की सेवा की गुणवत्ता और उनके योगदान का सही आकलन करना है। देश के बड़ी संख्या में केंद्रीय कर्मचारी कठिन और दूरदराज के इलाकों में काम करते हैं, जहां बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं होतीं। कई कर्मचारी ऐसे क्षेत्रों में तैनात रहते हैं, जहां अच्छे अस्पताल, बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल, टाउनशिप और अन्य नागरिक सुविधाएं नहीं हैं। इसके बावजूद वे लगातार सेवाएं देते हैं, उत्पादकता बनाए रखते हैं और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में योगदान करते हैं। ऐसे योगदान का मूल्यांकन वेतन निर्धारण में होना चाहिए।"
रेलवे कर्मचारियों का दिया उदाहरण
राघवैया के अनुसार, लगभग 85 प्रतिशत कर्मचारी फील्ड में काम करते हैं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। इसलिए कर्मचारियों की सेवा, जोखिम और कार्य परिस्थितियों को भी वेतन आयोग द्वारा मापा और आंका जाना चाहिए।
उन्होंने रेलवे कर्मचारियों का उदाहरण देते हुए कहा कि ट्रैक निरीक्षण करने वाले कर्मचारी कई किलोमीटर तक पैदल चलकर पटरियों की जांच करते हैं। वे भारी उपकरण लेकर चलते हैं, खामियों की पहचान करते हैं और उन्हें ठीक करते हैं। इस दौरान उनकी जान को भी खतरा रहता है। कई बार ड्यूटी के दौरान दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं।
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आठवां वेतन आयोग ही करेगा तय
NFIR नेता का कहना है कि मानव जीवन के जोखिम, स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव और वर्षों तक कठिन परिस्थितियों में दी गई सेवा को ध्यान में रखते हुए वेतन आयोग को अध्ययन करना चाहिए। अंतिम वेतन कितना होगा, यह आयोग की सिफारिशों और सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा, लेकिन कर्मचारियों के योगदान और जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
