नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। लॉकडाउन को चरणबद्ध तरीके से खोलने के बाद अपनी कई जरूरतों को तत्काल तौर पर पूरा करने के लिए 77 फीसद एमएसएमई को इमरजेंसी फंड की जरूरत है। जबकि 62 फीसद एमएसएमई नौकरी में कटौती कर सकती हैं। यह खुलासा फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज (फिस्मे), स्कॉच कंसल्टेंसी, भारतीय वित्त सलाहकार समिति (बीवीएसएस) और टैक्सलॉ एडुकेयर सोसायटी द्वारा संयुक्त रूप से कराए गए सर्वे की रिपोर्ट में किया गया। सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत पैकेज की घोषणा के बाद यह सर्वे कराया गया। 

रिपोर्ट के मुताबिक 77 फीसद एमएसएमई को अपने स्टाफ को सैलरी देने, वेंडर के बकाए भुगतान व अन्य फिक्स्ड शुल्क के भुगतान के लिए इमरजेंसी फंड की जरूरत है। सर्वे में भाग लेने वाले 86 फीसद एमएसएमई विभिन्न प्रकार के राहत पैकेज के बदले सीधे अपने खाते में राशि भेजे जाने के पक्ष में दिखे। उनका कहना था कि तत्काल होने वाले खर्च को पूरा करने के लिए सरकार को ऐसा करना चाहिए था। 

रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे में भाग लेने वाले 62 फीसद एमएसएमई ने बताया कि बिगड़ते हालात के मद्देनजर वे अपने यहां नौकरी में कटौती करने जा रही हैं। इनमें 6 फीसद एमएसएमई ने कहा कि वे अपने सभी कर्मचारियों को नौकरी से हटा देंगे। 30 फीसद ने कहा कि उनके यहां 50 फीसद नौकरी खत्म करने की योजना है तो 26 फीसद ने कहा कि एक चौथाई नौकरियां समाप्त की जाएंगी।

सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक मई-जुलाई के बीच एमएसएमई में काम करने वाले कर्मचारियों को अपनी सैलरी में कटौती की पीड़ा झेलनी पड़ सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक मई-जुलाई के दौरान 78 फीसद एमएसएमई कर्मचारियों की सैलरी में कटौती करेंगी। इनमें से 43 फीसद ने 50 फीसद तक तो 25 फीसद एक चौथाई तक सैलरी में कटौती करने की बता बताई। 10 फीसद ने कहा कि वे मई-जुलाई के दौरान अपने कर्मचारियों को कोई सैलरी नहीं देंगे। 

Posted By: Manish Mishra

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