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30+ देशों की 'क्रिटिकल मिनरल्स फौज' से टूटेगा चीन का तिलिस्म, भारत भी शामिल; बिखर जाएगा ड्रैगन का साम्राज्य!

Published: Fri, 29 May 2026 05:47 PM (IST)

भारत 30 से अधिक देशों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण खनिजों की वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला बना रहा है ताकि चीन (China ...और पढ़ें

भारत 30+ देशों संग वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला बना रहा

भारत 30+ देशों संग वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला बना रहा

HighLights

  1. चीन का महत्वपूर्ण खनिजों पर 70% से अधिक नियंत्रण।

  2. भारत 30+ देशों संग वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला बना रहा।

  3. भारत के पास रेयर अर्थ का तीसरा सबसे बड़ा भंडार।

नई दिल्ली। मध्य पूर्व संघर्ष का असर दुनिया पर साफ दिख रहा है। कई देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका खासा असर पड़ा है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। हालांकि वैश्विक तनाव के इतर भारत अपने क्रिटिकल मिनरल्स प्रोजेक्ट को रफ्तार दे रहा है। हिंदुस्तान इसमें अकेला नहीं है। भारत के साथ 30 से ज्यादा देश है।

यह बदलाव आने वाले समय में बड़े स्तर पर देखने को मिल सकता है। दरअसल, क्रिटिकल मिनरल्स (critical minerals alliance) पर चीन का दबदबा है। या यूं कहें कि उसी का एकक्षत्र राज है।

अफ्रीका सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 20 सबसे जरूरी खनिजों में से 19 की रिफाइनिंग क्षमता का 70% से ज्यादा हिस्सा चीन के पास है। और कई खनिजों की माइनिंग पर भी उसका ही राज है। कुछ खास खनिजों की प्रोसेसिंग पर चीन की मोनोपॉली लगभग 90-100% तक है।

इसकी वजह से इलेक्ट्रॉनिक्स, EVs और डिफेंस सेक्टर की सप्लाई चेन पर उसका बेजोड़ कंट्रोल हो जाता है। चीन ने 2025 में कुछ जरूरी खनिजों के निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। यही कारण है कि भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देश इस पर तेजी से काम कर रहे हैं।

भारत में क्रिटिकल मिनरल्स क्षेत्र से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि भारत 30 से अधिक देशों के साथ मिलकर इलेक्ट्रिक वाहनों, स्मार्टफोन और रक्षा उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले जरूरी खनिजों के लिए एक वैकल्पिक सप्लाई चेन बनाने पर काम कर रहा है।

आने वाले समय में 30 से अधिक देशों की 'क्रिटिकल मिनरल फौज' अगर अच्छा काम करती है तो जाहिर है कि चीन का तिलिस्म टूट सकता है। इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि आखिर क्या है क्रिटिकल मिनरल्स यानी महत्वपूर्ण खनिज और कैसे भारत इसके सप्लाई चैन का लीडर बन सकता है।

क्या है क्रिटिकल मिनरल्स?

जब भी क्रिटिकल मिनरल्स की बात होती है तो उसमें रेयर अर्थ मेटल अपने आप आ जाता है। क्योंकि रेयर अर्थ मेटल के अंदर आने वाले 17 एलिमेंट्स इसी के अंदर आते हैं। ऐसे में अगर हम क्रिटिकल मिनरल्स को परिभाषित करना चाहें तो इसकी परिभाषा होगी- महत्वपूर्ण खनिज वे होते हैं जिन्हें कोई देश अपनी अर्थव्यवस्था या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक मानता है, लेकिन जिन्हें प्राप्त करने में उसे कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। 

भारत के मिनिस्ट्री ऑफ माइंस के अनुसार यह परिभाषा कुछ इस प्रकार है- महत्वपूर्ण खनिज वे खनिज हैं जो आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य हैं। इन खनिजों की अनुपलब्धता, या यहां तक कि कुछ ही भौगोलिक स्थानों पर इनके अस्तित्व, खनन या प्रसंस्करण का केंद्रित होना, आपूर्ति श्रृंखला में कमजोरी और व्यवधान का कारण बन सकता है।" 

भारत के पास रेयर अर्थ मेटल का तीसरा सबसे बड़ा भंडार, प्रोडक्शन में 5वें पर

अगर हम महत्वपूर्ण खनिजों की थोड़ा गहराई में चलें और रेयर अर्थ मेटल्स (rare earth supply chain) की बात करें तो भारत के पास इसका तीसरा सबसे बड़ा भंडार है। पहले पर चीन और दूसरे पर ब्राजील है। चीन के पास 44 मिलियन मीट्रिक टन दुर्लभ खनिज का भंडार है। ब्राजील के पास 21 मिलियन मीट्रिक टन दुर्लभ खनिज का भंडार है। और भारत के पास 6.9 बिलियन मीट्रिक टन दुर्लभ खनिज भंडार है।

भले ही रेयर अर्थ के भंडार के मामले में तीसरे नंबर पर आते हैं, लेकिन उत्पादन के मामले में हम पांचवे नंबर पर आते है। उत्पादन में चीन का दबदबा है। 2025 के डेटा के अनुसार चीन सालाना 270,000 मीट्रिक टन दुर्लभ खनिज उत्पादित करता है। और भारत मात्र 2,900 मिट्रिक टन दुर्लभ खनिज का उत्पादन करता है।

क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन का लीडर बनेगा भारत?

भारत क्रिटिकल मिनरल्स के उत्पादन के गैप को पाटने के लिए 30 से अधिक देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है। हाल ही में हुई नई दिल्ली हुई क्वाड देशों (भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका) की बैठक में इस बात को लेकर चारों देशों ने विस्तार पूर्वक बात की। भारत, चिली, कनाडा, जापान, ऑस्ट्रेलिया और दूसरे देशों से बातचीत कर रहा है ताकि उन्हें एक मजबूत क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन बनाने के लिए साथ लाया जा सके।

इस मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा, "भारत, 30-40 अन्य देशों के साथ मिलकर, चीन पर आयात निर्भरता को कम करने के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के लिए एक वैकल्पिक बाजारर और आपूर्ति श्रृंखला बनाने की कोशिश कर रहा है।"

क्वाड देशों की बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर एक बड़ा टार्गेट भी सेट किया गया। चारों देश इसके तहत वे सरकारी और प्राइवेट सेक्टर से $20 अरब तक की मदद जुटाएंगे ताकि क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षित सप्लाई चेन बनाई जा सके, बड़े सप्लायर्स पर निर्भरता कम हो और क्षेत्रीय इंडस्ट्री मजबूत हो।

ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका के विदेश मंत्रियों ने फिजी में मिलकर एक बंदरगाह बनाने पर सहमति जताई और महत्वपूर्ण खनिजों तथा ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि QUAD ने हिंद-प्रशांत ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए एक रूपरेखा पर पहल शुरू करने पर सहमति व्यक्त की।

भारतीय एजेंसियां खनिज निष्कर्षण और प्रसंस्करण (Mineral Extraction and Processing) में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए ऑस्ट्रेलिया के अनुसंधान संस्थानों के साथ साझेदारी की संभावनाएं भी तलाश रही हैं।

बजट में हुई थी रेयर अर्थ कॉरिडोर की घोषणा

भारत ने अपने क्रेंदीय बजट 2026-27 में ओडिशा, केरलम, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में 'रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट' (REPMs) के खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और विनिर्माण के लिए समर्पित 'रेयर अर्थ कॉरिडोर' की घोषणा की गई है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए, सरकार ने नवंबर 2025 में 6000 MTPA की एकीकृत रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (Rare Earth Permanent Magnets) निर्माण क्षमता विकसित करने के लिए ₹7280 करोड़ की एक योजना को मंजूरी दी थी, जिसमें रेयर-अर्थ ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक की पूरी वैल्यू चेन शामिल है।

रेयर अर्थ एलिमेंट्स में ये 17 मेटल्स

क्रिटिकल मिनरल्स के अंदर आने वाले रेयर अर्थ मेटल्स में जो 17 एलिमेंट्स आते हैं वो हैं- सेरियम (Ce), डिस्प्रोसियम (Dy), अर्बियम (Er), युरोपियम (Eu), गैडोलीनियम (Gd), होल्मियम (Ho), लैंथेनम (La), ल्यूटेटियम (Lu), नियोडिमियम (Nd), प्रेसियोडिमियम (Pr), प्रोमेथियम (Pm), समैरियम (Sm), स्कैंडियम (Sc), टेरबियम (Tb), थ्यूलियम (Tm), येटरबियम (Yb), और येट्रियम (Y)।

भारत सरकार ने 2023 में जारी की थी क्रिटिकल मिनरल्स की लिस्ट

मिनिस्ट्री ऑफ माइंस ने 2023 में 30 क्रिटिकल मिनरल्स की लिस्ट जारी की थी। इनमें - एंटीमनी, बेरिलियम, बिस्मथ, कोबाल्ट, तांबा, गैलियम, जर्मेनियम, ग्रेफाइट, हैफनियम, इंडियम, लिथियम, मोलिब्डेनम, नाइओबियम, निकेल, PGE, फास्फोरस, पोटाश, REE, रेनियम, सिलिकॉन, स्ट्रोंटियम, टैंटलम, टेल्यूरियम, टिन, टाइटेनियम, टंगस्टन, वैनेडियम, जिरकोनियम, सेलेनियम और कैडमियम शामिल है। (Source- PIB)

अलग-अलग देशों के लिए क्रिटिकल मिनरल्स की लिस्ट अलग-अलग हो सकती है।

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