नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। डिजिटल होने की वजह से बैंकिंग सिस्टम में काफी बदलाव आया है। अब फंड ट्रांसफर, क्रेडिट कार्ड बिल पैमेंट और कई तरह के लेनदेन ऑनलाइन ही किए जा सकते हैं। टेक्नोलॉजी की वजह से बैंकिंग सिस्टम सुविधाजनक तो हुआ है, लेकिन इससे धोखाधड़ी की संभावना भी बढ़ गई है। दुनिया में बहुत से हैकर्स ऑनलाइन लोगों का पैसा चुराने के लिए कुछ न कुछ तरकीब इस्तेमाल करते रहते हैं।

अगर आपको अपने अकाउंट में लेनदेन के दौरान धोखाधड़ी की संभावना है। आपके लगता है कि कोई आपकी जानकारी लेकर अकाउंट तक जाने की कोशिश कर रहा है तो ऐसे में ओटीपी और अन्य प्रक्रिया इससे रोकथाम करती हैं। अगर आपने अपने एसबीआई बैंक अकाउंट में किसी प्रकार के अनधिकृत लेनदेन को देखा है तो आप यह कदम उठा सकते हैं।

कॉल: टोल-फ्री नंबर 1-800-425-3800 और 1-800-11-2211 पर कॉल करके आप किसी भी अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन को लेकर सूचित कर सकते हैं।

ऑनलाइन: ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के लिए आपको यह करना है।

1. सबसे पहले एसबीआई की वेबसाइट पर जाकर 'Complaints and Compliments'पर जाना है।

2. 'Want to register an unauthorized transaction?' पर जाकर 'Register Complaint' पर क्लिक कीजिए।

3. इसके बाद शिकायत फॉर्म पर चले जाएंगे। यहां पर अकाउंट नंबर, नाम, ब्रांच कोड, मोबाइल नंबर, ग्राहक प्रकार, ईमेल आईडी, शिकायत, उत्पाद और सर्विस आदि जैसी जानकारी दर्ज कीजिए और साथ ही 500 से अधिक अक्षरों में आपकी शिकायत के बारे में बताइए।

4. कैप्चा कोड दर्ज करने के बाद सबमिट पर क्लिक कीजिए।

'Click here to check complaint status' पर क्लिक करके आप शिकायत की स्थिति के बारे में जान सकते हैं।

अनधिकृत लेनदेन पर रोक लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने 2017 में एक नोटिफिकेशन जारी की, जिसमें कहा गया है कि अनधिकृत लेनदेन से संबंधित ग्राहक शिकायतों में वृद्धि को रोकने के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

RBI की नोटिफिकेशन में अनधिकृत लेनदेन के बारे में बताया गया है

1. बैंक की तरफ से धोखाधड़ी/लापरवाही/ कमी होने पर ग्राहक को कुछ नहीं देना होता है, चाहे ग्राहक ने बैंक को लेनदेन की सूचना दी हो या नहीं।

2. थर्ड पार्टी की तरफ से होने वाली गलती में ग्राहक और बैंक की कोई जिम्मेदारी नहीं होती है, ऐसे में ग्राहक बैंक को 3 कार्य दिवसों के अंदर सूचित करता है तो उसकी कोई देयता नहीं होती है।

3. जब ग्राहक की लापरवाही से कोई नुकसान होता है, जैसे अकाउंट की जानकारी, कार्ड की जानकारी किसी से साझा करने आदि की स्थिति में ग्राहक तब तक नुकसान भरेगा जब तक वो अनधिकृत लेनदेन की शिकायत बैंक को नहीं करता। अनधिकृत लेनदेन की शिकायत के बाद होने वाला कोई भी नुकसान बैंक भरेगा।

4. ऐसी स्थिति में जहां अनधिकृत लेनदेन की जिम्मेदारी न बैंक के पास है और न ही ग्राहक के पास है, लेकिन सिस्टम में है। अगर ऐसे में ग्राहक बैंक को इसकी शिकायत करने में देरी करता है तो ग्राहक को अधिक नुकसान होता है। 

Posted By: Sajan Chauhan

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