नई दिल्ली, पवन जायसवाल। डेटा चोरी इस समय एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। उसमें भी अगर डेटा बैंकिंग से जुड़ा हो, तो इससे काफी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित होते हैं। आईबीए ग्रुप के साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर्स ने इस साल की सबसे बड़ी साइबर चोरी का पता लगाया है, जो कि बैंकिंग सेक्टर से जुड़ी है। पता लगा है कि करीब 13 लाख भारतीयों के डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स का डेटा ऑनलाइन जोकर्स स्टैश पर बेचा जा रहा है। यह डेटा ATM और POS मशीनों में स्किमिंग डिवाइस लगा कर चुराया गया है। इसमें ट्रैक-2 लेवल का डेटा भी है, जो कार्ड की चुम्बकीय परत में होता है। ट्रैक- 2 लेवल के डेटा में ग्राहक की प्रोफाइल व ट्रांजेक्शन से जुड़ी अहम जानकारियां होती हैं।

इस खुलासे से साफ पता चलता है कि इस डिजिटल होती दुनिया में डेटा को सुरक्षित रख पाना मुश्किल होता जा रहा है। आपके बैंक कार्ड के डेटा को चोरी करने के पीछे अपराधियों का एकमात्र उद्देश्य आपके बैंक अकाउंट को खाली करना होता है। इसलिए कार्ड धारक को सावचेत रहने की जरूरत है। साइबर एक्सपर्ट प्रिया सांखला के अनुसार, ग्राहक कुछ बातों का ध्यान रखकर अपने बैंक डेटा की सुरक्षा कर सकते है। आइए जानते हैं कि एक कार्डधारक को किन-किन बातों का खयाल रखना चाहिए-

1. बैंक कार्डधारक को कभी भी अपने क्रेडिट, डेबिट कार्ड की फोटो को कहीं पर पोस्ट नहीं करना चाहिए।

2. कार्डधारक को अपने क्रेडिट या डेबिट कार्ड से ट्रांजेक्शन केवल सुरक्षित और विश्वसनीय वेबसाइट (https:) पर ही करना चाहिए।

3. कार्डधारक को ऑनलाइन कार्ड की डिटेल डालते समय ऑटोफिल को डिसेबल रखना चाहिए और समय-समय पर वेब ब्राउज़र की कैशे मेमोरी डिलीट करते रहना चाहिए।

4. कार्डधारक को अपना कार्ड कभी भी वेबसाइट पर सेव करके नहीं रखना चाहिए।

5. याद रखें कि पब्लिक और फ्री वाई-फाई इंटरनेट का प्रयोग करते समय अपने बैंक कार्ड की डिटेल नहीं डालें।

6. कुछ बैंक अनसिक्योर कार्ड भी इश्यू करते हैं। इन कार्ड्स से स्वाइप मशीन पर बिना ओटीपी या पिन के भी ट्रांजेक्शन हो जाता है। कार्डधारक को ऐसे में बैंक से संपर्क करके अपना कार्ड बदलवा लेना चाहिए।

7. ग्राहक को अपने ऑनलाइन वॉलेट का पासवर्ड और कार्ड का पिन नंबर समय-समय पर बदलते रहना चाहिए।

8. ग्राहक को अपने बैंकिंग अकाउंट पर या ऑनलाइन शॉपिंग के समय ट्रांजेक्शन होने के बाद लॉग-आउट कर लेना चाहिए।

9. ग्राहक को अपने कंप्यूटर या लैपटॉप में हमेशा लेटेस्ट और पेड एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का उपयोग करना चाहिए।

10. ग्राहक को फिशिंग ई-मेल और फर्जी फोन कॉल्स को लेकर सचेत रहना चाहिए। ध्यान रखें कि कोई भी बैंक, वेबसाइट या इंश्योरेंस कंपनी आपके क्रेडिट-डेबिट कार्ड की डिटेल या सीवीवी नहीं मांगती है।

11. हमेशा स्मार्टफोन पर ऐप इंस्टॉल करते समय उसे जरूरत के हिसाब से ही एक्सेस दें। एसएमएस, कॉल और गैलरी का एक्सेस मांगने वाले ऐप्स का यूज ना करने की कोशिश करें। अगर इस तरह के ऐप का यूज करना जरूरी है, तो उन्हें 'allow once' के लिए एक्सेस दें और अकाउंट वेरिफाई होने के बाद एक्सेस रद्द कर दें।

आसानी से आपके सीवीवी का पता लगा लेते हैं अपराधी

ग्राहक को कभी भी अपने बैंक के डेबिट या क्रेडिट कार्ड की फोटो को किसी वेबसाइट, मेल या कहीं पर भी अपलोड नहीं करनी चाहिए। साइबर अपराधी आपके क्रेडिट कार्ड नंबर, कार्ड की एक्सपायरी डेट और सीवीवी नंबर के जरिए आपका अकाउंट खाली कर सकते हैं। यहां तक की अगर साइबर अपराधी को आपके क्रेडिट कार्ड के फ्रंट लुक की फोटो भी मिल जाती है, तो वे आपके कार्ड का सीवीवी नंबर पता लगा सकते हैं। दरअसल, क्रेडिट कार्ड के सीवीवी नंबर का पहला डिजिट आपके कार्ड नंबर का ही पहला डिजिट होता है और दूसरे दो डिजिट उस कार्ड नंबर के ही कोई दो डिजिट होते हैं, जिन्हें अपराधी कुछ सॉफ्टवेयर्स की मदद से पता कर सकते हैं।

अनसिक्योर कार्ड को कहें ना

बैंक द्वारा कुछ अनसिक्योर डेबिट और क्रेडिट कार्ड भी जारी किये जाते हैं। इन कार्ड्स से स्वाइप मशीन पर बिना ओटीपी के भी ट्रांजेक्शन हो जाता है। हालांकि, इसमें अमाउंट की एक लिमिट होती है। ऐसे में मान लीजिए कि कभी आपका कार्ड चोरी हो जाता है, तो अपराधी बिना ओटीपी के ही आपके अकाउंट से ट्रांजेक्शन कर सकता है।नुकसान से बचने के लिए ग्राहक को ऐसे कार्ड्स को बदलवा लेना चाहिए।

क्या करें अगर अकाउंट से निकल जाएं पैसे

प्रिया सांखला बताती हैं कि अगर आपके बैंक अकाउंट से अज्ञात ट्रांजेक्शन में पैसा निकल जाए, तो आपको तुरंत बैंक से संपर्क करना चाहिए। साथ ही आपको उस वेबसाइट से भी संपर्क करना चाहिए जिसके पेमेंट गेटवे से पैसा गुजरा है। अगर आप पैसा निकल जाने के 5 से 6 घंटे के अंदर बैंक और वेबसाइट से संपर्क करते हैं, तो आप 80 से 100 फीसद तक अपना पैसा वापस पा सकते हैं।   

Posted By: Pawan Jayaswal

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप