नेपाल में बाढ़ के बाद राहत के संकेत, पश्चिम चंपारण में गंडक का असर नगण्य रहने की उम्मीद
नेपाल में नदियों का जलस्तर घटने से पश्चिम चंपारण में बाढ़ का खतरा कम हो गया है। प्रशासन के अनुसार, ...और पढ़ें

नेपाल में बाढ़ के बाद अब राहत।
HighLights
नेपाल में नदियों का जलस्तर अब घट रहा है।
पश्चिम चंपारण में बाढ़ का असर नगण्य रहेगा।
गंडक बैराज पर निगरानी और सतर्कता जरूरी है।
जागरण संवाददाता, बेतिया (पश्चिम चंपारण)। नेपाल में अचानक बढ़े नदी के जलस्तर से पश्चिम चंपारण में बाढ़ की आशंका के बीच राहत के संकेत मिलने लगे हैं। नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में जलस्तर में वृद्धि के बाद अब गिरावट दर्ज की जा रही है।
इससे गंडक नदी के रास्ते बिहार पहुंचने वाले बाढ़ के पानी का वेग कम रहने की उम्मीद है। प्रशासन के आकलन के अनुसार, पश्चिम चंपारण में इसका प्रभाव नगण्य रहने की संभावना है।
हालांकि, वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज में पानी की आवक थोड़ी बढ़ सकती है। इसे देखते हुए नदी किनारे और निचले इलाकों में निगरानी बनाए रखने की जरूरत है।
नेपाल में घटने लगा जलस्तर
नेपाल के आरूघाट स्थित बूढ़ी गंडकी नदी में पहले जलस्तर में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई थी। अब वहां के जल-वैज्ञानिक अवलोकन केंद्रों से जलस्तर में गिरावट के संकेत मिल रहे हैं। इससे बाढ़ के पानी का दबाव कम होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, ऊपरी क्षेत्रों में जलस्तर में बदलाव पर नजर रखना जरूरी है।
भारतीय सीमा तक कमजोर पड़ सकता है पानी का वेग
केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी), नई दिल्ली की ओर से जारी एडवाइजरी के बाद जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने बताया कि बाढ़ का पानी गंडक नदी के रास्ते नीचे की ओर बहेगा। भारतीय सीमा तक पहुंचते-पहुंचते इसके वेग में काफी कमी आने की संभावना है। इसी आधार पर जिले में बाढ़ का प्रभाव नगण्य रहने का अनुमान लगाया गया है।
गंडक बैराज में बढ़ सकती है आवक
केंद्रीय जल आयोग ने वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज में पानी की आवक में मामूली वृद्धि होने की संभावना जताई है। इसे देखते हुए संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने और नदी की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने की सलाह दी गई है।
निचले इलाकों में सतर्कता जरूरी
भारत-नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों के साथ बिहार और उत्तर प्रदेश में गंडक के तटीय इलाकों पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है। फिलहाल बड़े बाढ़ प्रभाव की आशंका कम है, लेकिन नदी किनारे बसे गांवों में सतर्कता जरूरी है। जलस्तर में अचानक बदलाव होने पर स्थानीय प्रशासन को स्थिति के अनुरूप कदम उठाने होंगे।
