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West Champaran : पिंकी की मौत पर कोर्ट का फैसला, दहेज हत्या में बरी पति-ससुर आत्महत्या के लिए उकसाने में दोषी

By Vinod RaoEdited By: Dharmendra Singh
Published: Thu, 01 Oct 2026 05:46 PM (IST)

Dowry death case : बगहा कोर्ट ने डेढ़ साल पुराने पिंकी देवी मौत मामले में पति और ससुर को दहेज ...और पढ़ें

कोर्ट का फैसला आने के बाद पुलिस की गिरफ्त में आरोपित।

कोर्ट का फैसला आने के बाद पुलिस की गिरफ्त में आरोपित।

HighLights

  1. पति और ससुर दहेज हत्या के आरोप से बरी हुए।

  2. आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में दोषी करार।

  3. नए कानून बीएनएस की धारा 108 के तहत फैसला।

जागण संवाददाता, बगहा (पश्चिम चंपारण)। लौकरिया थाना क्षेत्र के जरार गांव में डेढ़ साल पहले विवाहिता पिंकी देवी की मौत के मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्रा की अदालत ने गुरुवार को फैसला सुनाया।

अदालत ने दहेज हत्या के आरोप में आरोपित पति राहुल यादव और ससुर कृष्णा यादव को दोषमुक्त कर दिया, लेकिन दोनों को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में नए कानून बीएनएस की धारा 108 के तहत दोषी करार दिया। मामले में आरोपित मामा गम्हा यादव को साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने बरी कर दिया। दोषी करार दिए गए दोनों आरोपितों की सजा के बिंदु पर तीन अक्टूबर को सुनवाई होगी।

चार लाख रुपये और वाहन की मांग का था आरोप

अभियोजन के अनुसार पिपराडीह निवासी राजदेव यादव ने अपनी बेटी पिंकी देवी की शादी 26 फरवरी 2024 को जरार गांव निवासी कृष्णा यादव के पुत्र राहुल यादव के साथ की थी। आरोप था कि शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग दहेज में चार लाख रुपये और वाहन की मांग को लेकर पिंकी को प्रताड़ित करते थे।

27 मई 2025 को राजदेव यादव ने लौकरिया थाने में आवेदन देकर बेटी की दहेज के लिए हत्या किए जाने का आरोप लगाया था। सूचना मिलने के बाद वह बेटी के ससुराल पहुंचे, जहां पिंकी मृत अवस्था में मिली थी। इसके बाद पति राहुल यादव, ससुर कृष्णा यादव और अन्य लोगों के खिलाफ लौकरिया थाना कांड संख्या 61/2025 दर्ज किया गया था।

10 गवाहों की हुई गवाही, नौ दस्तावेज किए गए प्रस्तुत

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 10 गवाहों की गवाही कराई। इनमें सूचक राजदेव यादव, चिकित्सक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद अग्रवाल और दोनों अनुसंधानकर्ता सहित अन्य गवाह शामिल थे।

अभियोजन की ओर से प्राथमिकी, मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गिरफ्तारी ज्ञापन और आरोप पत्र समेत नौ दस्तावेज अदालत में प्रदर्श के रूप में प्रस्तुत किए गए। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से भी तीन गवाहों की गवाही कराई गई।

अभियोजन पक्ष की ओर से अभियोजन अधिकारी जितेंद्र भारती के साथ अधिवक्ता देवेंद्र मणि मिश्रा, लोकेश कुमार मिश्रा, पीयूष पाठक और मुकुंद मणि मिश्रा ने मामले में पैरवी की।

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