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वीटीआर की शान दूसरे जंगलों को कर रहे आबाद, बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व भेजे जाएंगे एक बाघ और दो बाघिन

Published: Wed, 07 Oct 2026 02:32 PM (IST)

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में बाघों की बढ़ती संख्या के कारण अब उन्हें दूसरे जंगलों में भेजा जा रहा है। ...और पढ़ें

वीटीआर की शान दूसरे जंगलों को कर रहे आबाद

वीटीआर की शान दूसरे जंगलों को कर रहे आबाद

HighLights

  1. वीटीआर से एक बाघिन बक्सा टाइगर रिजर्व भेजी गई।

  2. एक नर बाघ और दो बाघिन बक्सा भेजे जाएंगे।

  3. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

जागरण संवाददाता, बगहा। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में बाघों की बढ़ती संख्या नये प्रबंधन को समृद्ध कर रही। वर्ष 1989-90 में देश के 18वें टाइगर रिजर्व के रूप में गठित वीटीआर में उस समय गिने-चुने बाघ थे। बेहतर संरक्षण, पानी और भोजन की उपलब्धता तथा शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या बढ़ने से बाघों की संख्या लगातार बढ़ती गई। 

अब यहां के बाघ दूसरे जंगल को आबाद कर रहे हैं। एक सप्ताह पहले वीटीआर की एक बाघिन को बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व भेजा गया है। दूसरे और तीसरे चरण में एक और बाघ तथा दो बाघिन को बक्सा भेजने की तैयारी है।

चार महीने में एक बाघ व दो बाघिन जाएंगी बक्सा टाइगर रिजर्व

पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले स्थित बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने की कवायद तेज हो गई है। बक्सा में पहले से छोड़ी गई बाघिन के लिए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) से अगले 25 दिनों के भीतर एक नर बाघ भेजे जाने की तैयारी है। इसके बाद अगले चार माह के भीतर वीटीआर से दो और बाघिनों को बक्सा भेजने की योजना है।

बाघों के स्थानांतरण को लेकर वीटीआर में उपयुक्त बाघों की पहचान भी कर ली गई है। योजना के तहत बक्सा में नर और मादा बाघों की संख्या बढ़ाकर उनके प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जाएगा। इससे भविष्य में बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी। अधिकारियों के स्तर पर बाघों के चयन और स्थानांतरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।

2006 में वीटीआर में थे छह बाघ

वर्ष 2006 में वीटीआर में छह थे, वर्ष 2010 में यह संख्या बढ़कर आठ, 2014 में 28 और 2018 में 31 हो गई। 2022-23 में इनकी संख्या 54 तक पहुंची। वर्ष 2026 में यह संख्या 70 से अधिक बताई जा रही। हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा होनी बाकी है। 

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बाघों की बढ़ती संख्या के बीच उनके लिए पर्याप्त क्षेत्र उपलब्ध कराना चुनौती बन रहा है। एक नर बाघ को करीब 100 से 120 वर्ग किलोमीटर और बाघिन को 60 से 70 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की जरूरत होती है। क्षेत्र पर दबाव बढ़ने से बाघों के रिहायशी इलाकों की ओर पहुंचने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।

टाइगर रिजर्व से एक बाघ व दो बाघिन को ले जाने के लिए वरीय अधिकारियों के द्वारा बक्सा टाइगर रिजर्व में भेजने की योजना है। इसके लिए इन बाघिन व बाघ की पहचान भी कर ली गई है। आने वाले दिनों में मौसम ने साथ दिया तो संबंधित विभाग के वरीय अधिकारी व एक्सपर्ट बिहार आएंगे। जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - विकास अहलावत , डीएफओ, वन प्रमंडल दो, बेतिया।

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