बेतिया। नगर निकाय के चुनाव में नगर में आदर्श आचार संहिता की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। अब तक किसी भी प्रत्याशी पर प्रशासनिक नकेल नहीं कसे जाने के कारण कुछ प्रत्याशियों का मनोबल उंचा है। उनके द्वारा जहां देर रात तक वाहनों के माध्यम से प्रचार प्रसार किये जा रहे है। काफी पावर के ध्वनि विस्तारक यंत्र लगा दिये जाने के कारण लोगों को दिन भर की थकान के बाद रात में भी आराम नहीं मिल रहा है। कारण कि एक तो चुनाव प्रचार का शोर तो दूसरी ओर मतदाताओं के सोने के बाद एक के बाद एक प्रत्याशी उनके घर पहुंच जा रहे है। जबकि शहरी क्षेत्र होने के कारण शहर की ज्यादातर आबादी या तो नौकरी पेशा में है या फिर व्यवसाय का काम करते है। पूरे दिन वे कड़ी मेहनत करते है पर रात में भी उन्हें चैन का नींद नसीब नहीं हो रहा है। सजग लोगों का मानना है कि भले ही प्रशासन दिन में वाहनों की जांच अभियान चला रही है पर रात में भी वाहनों की जांच जरुरी है। कारण कि चर्चा यह भी है कि रात में कुछ लोग मतदाताओं को पटाने के लिए बाइक की डिक्की में मादक पदार्थ व रुपए लेकर भी मतदाताओं के घर की ओर रुख कर रहे है। भले ही प्रशासन की नजर में ऐसे मामले प्रकाश में नहीं आये है पर चौक चौराहों पर इसकी चर्चा चारों तरफ है। इतना ही नहीं होटल में भी खाने खिलाने का दौर चल रहा है। कुछ तो अपने घरों पर ही होटल चला रहे है। प्रचार वाहनों का भी गलत उपयोग किया जा रहा है। मानक के अनुसार न तो इस पर बाजा बज रहे है नहीं समय का ही पालन किया जा रहा है। वाहनों पर देशभक्ति के साथ साथ फूहड़ भोजपुरी गानों को भी बजा कर वोट मांगने का कार्य किया जा रहा है।

इनसेट

पहचान पत्र के लिए अब भी कसरत कर रहे प्रत्याशी

नगर परिषद मैदान में उतरे प्रत्याशी अब पहचान पत्र बनाने के लिए कसरत कर रहे है। कुछ ने तो इसमें सफलता हासिल कर ली है पर जो बाकि है वे चाह रहे है कि कितना जल्दी उन्हें भी पहचान पत्र मिल जाए। बताते है कि पहचान पत्र का होना भी आवश्यक है। ताकि किसी भी समय वे किसी भी सरकारी पदाधिकारी को दिखा सके कि वे प्रत्याशी है। साथ ही पहचान पत्र से यह भी तय हो जाएगा कि वे किस वार्ड से प्रत्याशी है। कुछ तो अब से ही चुनाव एजेंट का भी पहचान पत्र बनाने के लिए प्रयास कर रहे है।

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अब तक किसी ने भी नहीं दिया वाट्सऐप व फेसबुक पर खर्च का ब्योरा

अब तक करीब करीब सभी प्रत्याशियों ने चुनाव खर्च का अब तक का व्योरा दे रखा है। पर किसी भी प्रत्याशी ने वाट्सएप व फेसबुक पर कर रहे प्रचार के खर्च का ब्योरा नहीं दिया है। जबकि ज्यादातर लोग इसका उपयोग प्रचार प्रसार के लिए कर रहे है। जाहिर है कि इसमें भी बगैर ईजी कराये या फिर मोबाइल को रिचार्ज कराये वाट्सऐप या फिर फेसबुक नहीं चला रहे है। फिर इसको क्यों छुपाकर रखा जा रहा है। इसकी भी जांच की जरुरत है। ताकि चुनाव कार्य में अधिक धन के खर्च पर लगाम कसने के साथ साथ ब्योरा प्रस्तुत नहीं करने वालों पर कार्रवाई किया जा सके। जानकारों की माने तो वाट्सएप व फेसबुक पर प्रचार प्रसार से जो नगर के मतदाता नहीं है वे भी परेशान है। कारण कि उन्हें भी प्रत्याशियों के प्रचार प्रसार को झेलने की विवशता बन गई है।

इनसेट बयान

आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामले कही से भी पकड़ में आते है तो वैसे प्रत्याशियों व विधिसम्मत कार्रवाई होगी।

सुनील कुमार

एसडीएम सह निर्वाची पदाधिकारी, बेतिया

Posted By: Jagran

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