डिग्री धारकों के पलायन के बीच मिसाल बनीं पश्चिमी चंपारण की रूपा, घर रहकर कमा रहीं 1.20 लाख महीना
Jeevika Loan Success Story: पश्चिमी चंपारण की रूपा कुमारी ने जीविका से ऋण लेकर डेयरी व्यवसाय शुरू किया, जिससे अब ...और पढ़ें

डेयरी कारोबार से हर माह सवा लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाना शुरू कर दिया है।
HighLights
रूपा कुमारी ने डेयरी व्यवसाय से प्रतिमाह सवा लाख कमाए।
जीविका ऋण से शुरू किया, अब 18 गायें, 8 भैंसें।
280 लीटर दूध उत्पादन, 8 लोगों को मिला रोजगार।
जागरण संवाददाता, बेतिया (पश्चिमी चंपारण)। Rupa Kumari Dairy Business: जहां एक तरफ बिहार से युवा उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद भी चंद हजार रुपयों की नौकरी के लिए अपने परिवार से दूर हजारों किलोमीटर पलायन करने को मजबूर हैं, वहीं बेतिया की एक महिला ने गांव में ही रहकर सफलता की नई इबारत लिख दी है।
पश्चिमी चंपारण जिले के सिकटा प्रखंड स्थित बलिरामपुर पंचायत के तुरियापुर गांव की 37 वर्षीय रूपा कुमारी ने अपने परिवार के साथ रहते हुए डेयरी कारोबार से हर माह सवा लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाना शुरू कर दिया है।
जीविका से मिली दिशा
रूपा कुमारी ने परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए वर्ष 2021 में चंदा जीविका स्वयं सहायता समूह के माध्यम से एक लाख रुपये का ऋण लिया।
उन्होंने इस राशि से केवल चार गायों के साथ पशुपालन व्यवसाय की शुरुआत की। शुरुआती दिनों में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा, लेकिन उनकी मेहनत और बेहतर देखभाल से यह छोटा सा प्रयास आज एक बड़ी डेयरी इकाई बन चुका है।
280 लीटर दूध उत्पादन
वर्तमान में रूपा कुमारी के पास 18 गायें और 8 भैंसें हैं, जिनसे उनके डेयरी फार्म में प्रतिदिन लगभग 280 लीटर दूध का उत्पादन होता है।
इस दूध को वे स्थानीय डेयरी कोऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से बाजार तक पहुंचाती हैं। दूध की बिक्री से उन्हें प्रतिमाह लगभग 3.36 लाख रुपये की कुल आय होती है।
खर्च निकालकर शुद्ध लाभ
पशुओं के चारे, दवा और रखरखाव के तमाम खर्च निकालने के बाद उन्हें दूध बिक्री से हर महीने लगभग एक लाख रुपये का शुद्ध लाभ होता है।
उन्होंने अपने इस कारोबार को केवल दूध तक सीमित नहीं रखा, बल्कि दूध से शुद्ध घी और दही बनाकर स्थानीय बाजार में बेचना शुरू किया, जिससे उन्हें 20 हजार रुपये की अतिरिक्त आय होती है।
8 लोगों को रोजगार
आज रूपा कुमारी प्रतिमाह लगभग 1.20 लाख रुपये की शुद्ध कमाई कर रही हैं। पलायन के विपरीत, उन्होंने खुद अपने घर-परिवार में रहते हुए दो जीविका दीदियों और दो पिकअप चालकों समेत आठ स्थानीय लोगों को पूर्णकालीन रोजगार भी दिया है। उनकी इस सफलता ने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर में बड़ा बदलाव लाया है।
महिलाओं के लिए प्रेरणा
ग्रामीण क्षेत्र की एक सामान्य गृहणी से सफल महिला उद्यमी बनने का रूपा का यह सफर आज आसपास के पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गया है।
रूपा कुमारी बताती हैं कि यदि महिलाओं को समय पर वित्तीय सहयोग और सही मार्गदर्शन मिले, तो वे गांव में ही रहकर किसी भी क्षेत्र में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर सकती हैं।
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