नेपाल त्रासदी : किसी ने नहीं किया अंतिम संस्कार, पश्चिम चंपारण में गंडक में मिले 140 शवों को दी गई अंतिम जगह
नेपाल के रसुवा में आई बाढ़ के बाद गंडक नदी में बहकर आए 195 शवों में से 140 शवों को ...और पढ़ें
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शवों का व्यवस्थापन करते नेपाल के अधिकारी। सौजन्य -नेपाल पुलिस प्रशासन
HighLights
नेपाल बाढ़ से गंडक में बहकर आए 195 शव मिले।
नवलपरासी में 140 अज्ञात शवों का व्यवस्थापन किया गया।
शवों की पहचान हेतु फोटो और टैग सुरक्षित रखे गए।
संवाद सूत्र, वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण)। गंडक नदी के तेज बहाव के साथ बहकर आए इन शवों की कहानी जितनी भयावह है, उतनी ही मार्मिक भी। कोई अपना इन्हें लेने नहीं आया, किसी ने इनका नाम तक नहीं पूछा और न ही अंतिम विदाई देने वाला कोई मिला।
नेपाल के रसुवा में आई बाढ़ के बाद गंडक के रास्ते सुस्ता क्षेत्र और भारतीय सीमा तक पहुंचे शवों को लंबे इंतजार के बाद अब अंतिम ठौर दे दिया गया है। नवलपरासी के परासी स्थित पृथ्वीचंद अस्पताल में रखे 140 शवों का स्थानीय सरकार के सहयोग से व्यवस्थापन कर दिया गया है।
195 शव हुए थे बरामद
जिला पुलिस कार्यालय नवलपरासी के सूचना अधिकारी सह डीएसपी मदन थापा ने बताया कि रसुवा में आई बाढ़ के बाद सुस्ता क्षेत्र और भारतीय सीमा से कुल 195 शव बरामद किए गए थे। इनमें पांच शवों की पहचान उनके स्वजन ने कर ली थी। पहचान के बाद उन्हें उनके परिवार को सौंप दिया गया।
140 शवों का हुआ व्यवस्थापन
शेष 190 शवों में से 140 शव परासी स्थित पृथ्वीचंद अस्पताल में रखे गए थे। कई दिनों तक शवों के अस्पताल में रखे रहने से दुर्गंध बढ़ने लगी। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने व्यवस्थापन की प्रक्रिया तेज कर दी। गुरुवार तक सभी 140 शवों को फोटो सहित टैग लगाकर निर्धारित स्थानों पर पहुंचा दिया गया।
पहचान के लिए फोटो सहित टैग
प्रशासन ने शवों के व्यवस्थापन से पहले उनकी पहचान संबंधी जानकारी सुरक्षित रखने का प्रयास किया। सभी शवों पर फोटो सहित टैग लगाए गए, ताकि भविष्य में कोई स्वजन उनकी पहचान कर सके। इसके बाद निर्धारित स्थानों पर उनका व्यवस्थापन किया गया।
दो सामुदायिक वन में दी गई जगह
नवलपरासी जिले की सुनवल नगरपालिका के वार्ड नंबर चार स्थित मूल सामुदायिक वन के अलकत्रा क्षेत्र तथा बर्दघाट नगरपालिका के वार्ड नंबर दो स्थित चिसापानी सामुदायिक वन क्षेत्र में हाईटेंशन के पास शवों का व्यवस्थापन किया गया। इस दौरान स्थानीय सरकार और प्रशासन की ओर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई।
50 शव अब भी अस्पतालों में
डीएसपी मदन थापा ने बताया कि अभी 50 शव तीन अस्पतालों में सुरक्षित रखे गए हैं। इनमें भीम अस्पताल भैरहवा, प्रादेशिक अस्पताल बुटवल और पिपरा अस्पताल कपिलवस्तु शामिल हैं। इन शवों के भी व्यवस्थापन की तैयारी की जा रही है।
अपनों की पहचान का अब भी इंतजार
बाढ़ की विभीषिका में अपनों को खोने वाले परिवारों की पीड़ा इन शवों के साथ और गहरी हो गई है। पांच शवों की पहचान हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में शव ऐसे हैं जिनकी पहचान अब तक नहीं हो सकी। प्रशासन ने फोटो और टैग सुरक्षित रखे हैं, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने बिछड़े सदस्य की पहचान करने में मदद मिल सके।
