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Tourism vs Nature : पर्यटन को बढ़ाने की दौड़ में प्रकृति को भूलता गया नेपाल, अब नदियों-पहाड़ों की तबाही से बढ़ी चिंता

By Sanjay Kumar UpadhyayEdited By: Dharmendra Singh
Published: Thu, 03 Sep 2026 08:16 PM (IST)

Nepal Flood : पर्यटन को बढ़ावा देने की होड़ में नेपाल ने प्रकृति को नजरअंदाज किया, जिससे नदियों और पहाड़ों ...और पढ़ें

Nepal Tourism : पहाड़ों से निकले प्राकृतिक झरने के पानी का प्रबंधन नहीं होने के कारण पर्वत पर बने घर व झरने की धार से गुजरते वाहन। जागरण

Nepal Tourism : पहाड़ों से निकले प्राकृतिक झरने के पानी का प्रबंधन नहीं होने के कारण पर्वत पर बने घर व झरने की धार से गुजरते वाहन। जागरण

HighLights

  1. पर्यटन विस्तार में प्रकृति की अनदेखी से आपदाएं बढ़ीं।

  2. नदियों के कटाव से बस्तियां और संरचनाएं तबाह हुईं।

  3. पर्यटकों की सुरक्षा को त्वरित प्रतिक्रिया टीमें गठित।

संजय कुमार उपाध्याय, धादिंग (नेपाल)। Mountain Disaster Nepal : झील, नदी व पर्वत शृंखलाओं से सजा नेपाल दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का बड़ा योगदान है, इसलिए इसे बढ़ावा देने की दिशा में लगातार काम हुए। लेकिन, पर्यटन को बढ़ावा देने की होड़ में नेपाल प्रकृति को भूलता चला गया।

जाने-अनजाने हुई भूल नेपाल को प्राकृतिक आपदा की आग में झुलसाती रही। पर्यटकीय विस्तार से पहले ऐसा कोई अध्ययन नहीं किया गया कि इस विकास से प्रकृति को तो नुकसान नहीं पहुंच रहा।

नेपाल-तिब्बत सीमा से उठी जलधारा के कारण भोटेकोशी व त्रिशूली नदियों के कटाव से जब बस्तियां वीरान हुईं, होटल-रेस्तरां, सड़कें, संचार व बिजली से जुड़ी आधारभूत संरचनाएं तबाह हुईं तो सरकार की चिंता बढ़ी है।

नेपाल में दुनिया के अलग-अलग देशों से आनेवाले पर्यटकों के मनोनुकूल होटल-रेस्तरां डिजाइन किए गए हैं। पर्यटन केंद्रों की ओर जानेवाली सभी सड़कों, पर्वत, नदी व झील के किनारे छोटे-बड़े निर्माण होते चले गए। पर्यटन से आमदनी बढ़ी, देश में औद्योगिक इकाइयों का भी विकास हुआ, पर सुरक्षा मानकों का ध्यान नहीं रहा।

सुरक्षा मानकों पर नहीं हुआ काम

व्यवसायी कहते हैं, ये तो होना ही था। नेपाल को दुनिया भर के पर्यटकों ने रोजगार दिया, लेकिन जोखिम बढ़ता चला गया। नेपाल के प्रमुख पर्यटन केंद्र काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर, स्वयंभूनाथ स्तूप, ललितपुर, भक्तपुर, मनोकामना मंदिर, पोखरा का फेवा ताल, सराङकोट, डेविड्स फाल, लुंबिनी, चितवन राष्ट्रीय निकुंज, सगरमाथा क्षेत्र (दुनिया की सबसे ऊंची चोटी जो ट्रैकिंग के लिए प्रसिद्ध है) के अतिरिक्त कैलाश मानसरोवर को जोड़ने वाले इलाके प्रमुख हैं।

अनगिनत पर्यटन स्थलों के स्वामित्व वाले इस देश के नेतृत्व ने पर्यटकीय विस्तार के दौरान जान का खतरा कम करने की कोशिशों पर अपेक्षित काम नहीं किया, नतीजा आज आपदाओं का सामना करना पड़ रहा है।

काठमांडू के रानी पोखरी स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय के त्रिचंड कालेज स्थित वनस्पति विज्ञान के प्रो. कौशल किशोर चौधरी अनियोजित विस्तार पर चिंता जताते हुए कहते हैं, यहां का अव्यवस्थित शहरीकरण, गांवों में पर्वत व नदियों के जल अधिग्रहण क्षेत्र में होनेवाले निर्माण के कारण जान का खतरा बढ़ा है।

हिमताल से जलनिकासी का इंतजाम नाकाफी रहा, इस कारण जब कभी भी पहाड़ में जमा पानी अपने वेग के साथ उतरता है तो तबाही मचती है।

जीडीपी में सात व रोजगार में 15 प्रतिशत का योगदान

आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक नेपाल के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में पर्यटन का अहम योगदान है। कुल जीडीपी में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कुल सात प्रतिशत योगदान पर्यटन का है। 100 में से करीब 15 प्रतिशत रोजगार पर्यटन ने लोगों को दिया।

नेपाल पर्यटन बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल विभिन्न देशों से करीब 11 लाख पर्यटक नेपाल आए थे। 45 वर्षों से पर्यटन के क्षेत्र में काम कर रहे रामनायण चौधरी बताते हैं कि इस बार पर्यटकों की संख्या में काफी गिरावट आई है। आमतौर पर अकेले बाबा पशुपतिनाथ दर्शन के लिए हजार लोग प्रतिदिन आ जाते थे। अभी उनकी संख्या आधा से भी कम हो गई है।

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने बनाई क्विक रिस्पांस टीम

नेपाल पर्यटन बोर्ड की साइट पर दी गई जानकारी में साफ किया गया है कि अब नेपाल आनेवाले पर्यटकों के लिए क्विक रिस्पांस टीम काम करेगी। यह पूरी तरह से पर्यटकों को समर्पित रहेगी।

एनबीटी की ओर से जारी की गई सूचना के मुताबिक अब पर्यटन व होटल सेवाएं बहाल हैं। प्रमुख सड़क व हवाई सेवाएं सामान्य हैं। काठमांडू एयरपोर्ट से घरेलू व अंतरराष्ट्रीय उड़ानें चल रही हैं।

नेपाल के संस्कृति, पर्यटन व नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने क्विक रिस्पांस टीम बनाई है। एनबीटी ने पर्यटक सूचना डेस्क बनाया है। सरकार इसकी मानीटरिंग कर रही है।

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