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Bihar News : न विधायक बने, न राजनीति में आए, फिर भी लोगों के दिलों के ‘राजा’ रहे धनंजय विक्रम शाह

Published: Tue, 18 Aug 2026 07:00 AM (GMT+05:30)

Ramnagar Royal Family : राजा धनंजय विक्रम शाह का निधन हो गया है, जिन्होंने पिता के विधायक होने के बावजूद ...और पढ़ें

Raja Dhananjay Vikram Shah : राजा का महल व फाइल फोटो।

Raja Dhananjay Vikram Shah : राजा का महल व फाइल फोटो।

डिजिटल डेस्क, रामनगर (पश्चिम चंपारण)। राजसी वैभव और विरासत के बीच भी राजा धनंजय विक्रम शाह ने राजनीति की राह नहीं चुनी। पिता राजा नारायण विक्रम के चार बार विधायक रहने के बावजूद उन्होंने खुद को सियासत से दूर रखा।

इसके बजाय लोगों के सुख-दुख में साथ खड़े रहने और रामनगर राज परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाने को प्राथमिकता दी। उनके निधन से रामनगर में एक राजसी अध्याय का अंत ही नहीं, लोगों से आत्मीय रिश्ता रखने वाले एक व्यक्तित्व की कमी महसूस हो रही है।

पिता रहे चार बार विधायक

रामनगर राज परिवार का राजनीतिक प्रभाव पुराना रहा है। राजा धनंजय विक्रम शाह के पिता राजा नारायण विक्रम रामनगर विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे।

पिता की राजनीतिक विरासत उनके सामने थी, लेकिन राजा धनंजय ने सक्रिय राजनीति में आने में रुचि नहीं दिखाई। उन्होंने राजनीति के बजाय सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने को प्राथमिकता दी।

सुख-दुख में बनते थे सहारा

राज परिवार से जुड़े सदस्य राजेश चौबे बताते हैं कि राजा धनंजय से जुड़े लोगों के साथ उनका रिश्ता केवल औपचारिक नहीं था। किसी की बेटी की शादी हो या परिवार में बीमारी की स्थिति, जरूरत पड़ने पर वह आर्थिक मदद के लिए आगे आते थे। यही वजह थी कि आम लोगों के बीच उनके प्रति सम्मान लगातार बना रहा।

नेपाल सीमा तक रहा प्रभाव

रामनगर राज परिवार का प्रभाव नेपाल से सटे वाल्मीकिनगर से लेकर मैनाटांड़ तक विस्तृत क्षेत्र में रहा है। समय के साथ राजशाही का दौर समाप्त हुआ, राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और पुराने राजा भी नहीं रहे, लेकिन स्थानीय लोगों का राज परिवार के प्रति लगाव कम नहीं हुआ।

राजा के जाने से मायूसी

राजा धनंजय विक्रम शाह के निधन की खबर के बाद रामनगर में मायूसी छा गई। लोगों के बीच उनके साथ जुड़े संस्मरण चर्चा में हैं।

राज परिवार से जुड़ी पुरानी पीढ़ी के लोगों का कहना है कि राजा धनंजय ने राजनीति से दूरी जरूर बनाए रखी, लेकिन आम लोगों से अपना रिश्ता कभी दूर नहीं होने दिया। यही आत्मीयता उनके निधन के बाद लोगों की यादों में सबसे अधिक महसूस की जा रही है।

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