बेतिया। बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर से सवालिया निशान खड़े हो गया हैं। सूबे की शिक्षा व्यवस्था पर इस बार शहर के रामलखन ¨सह यादव कॉलेज ने सवाल खड़ा कर दिया है। विवि द्वारा आयोजित स्नातक पार्ट टू की परीक्षा में आलम यह रहा कि खुलेआम किताब खोलकर परीक्षार्थी परीक्षा दे रहे थे। उससे न सिर्फ कदाचारमुक्त परीक्षा का माखौल उड़ा, बल्कि परीक्षा अधिनियम भी तार-तार हो गया। इस परीक्षा केंद्र पर विवि प्रशासन की परीक्षा व्यवस्था का मजाक उड़ता रहा।

सूत्रों के अनुसार शहर के रामलखन ¨सह यादव महाविद्यालय के परीक्षा केंद्र पर गुरुवार को एमआइएल हिन्दी परीक्षा का जो नजारा देखने को मिला वह हर किसी को हैरत में डालने वाला था। परीक्षार्थी बैठकर परीक्षा दे रहे थे और उन्हें कोई रोकने टोकने वाला नहीं था। एक बेंच पर पांच-पांच, छह-छह परीक्षार्थी बैठकर किताब खोलकर उत्तरपुस्तिकाओं को भर रहे थे। परीक्षा केंद्र पर कदाचार पूरी तरह से हावी था। रामलखन ¨सह यादव कॉलेज केंद्र पर कदाचार की गंगा बही और परीक्षा अधिनियम की धज्जियां उड़ाई गई। ऐसे छात्र नकल कर पास तो कर जाते हैं लेकिन इनका भविष्य क्या होता होगा? इसमें इन छात्रों की ज्यादा गलती नहीं, अपितु व्यवस्था की गलती है। बयान

परीक्षा में छात्रों की संख्या अधिक होने की वजह से एक बेंच पर कई छात्रों को बैठाना पड़ा। यहां तक कि दरी जाजिम की व्यवस्था कर फर्श पर भी छात्रों को बैठाने की विवशता बनी रही। इससे थोड़ी अव्यवस्था जरूर हुई मगर नकल की छूट नहीं थी। बावजूद इसके जिन कमरों में नकल करने की बात कही जा रही है, वहां जांचकर उन कमरों के वीक्षकों पर कार्रवाई की जाएगी।

प्रो. इश्तेयाक शम्स

प्राचार्य

रामलखन ¨सह यादव कालेज

बेतिया

Posted By: Jagran