बेतिया। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाएं मानक से कोसों दूर हैं। मरीज की बात कौन कहे चिकित्सक व ड्यूटी पर तैनात स्टाफ तक के लिए व्यवस्था नहीं हैं। कहीं बेड तो कहीं शौचालय पानी की दरकार हैं। चिकित्सक कक्ष, सीटी स्कैन, आईसीयू, ड्यूटी कक्ष तक की घोर किल्लत हैं। इसकी पोल उस वक्त खुल गई जब एमसीआई की मॉक टीम बुधवार को मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण कर रही थी। टीम में श्रीकृष्ण मेमोरियल मेडिकल कॉलेज मुजफ्फरपुर के डा. धीरेन्द्र त्रिपाठी, डा. अरविन्द कुमार और गुजरात के डा. आनंद कुमार मिश्र शामिल थे। तीन सदस्यीय टीम ने आउटडोर, हल्वे वार्ड, प्रसव वार्ड, एसएनसीयू, आईसीयू, सर्जिकल वार्ड, मेल मेडिकल वार्ड सहित विभिन्न वार्ड का निरीक्षण किया। यहां बहाल व्यवस्था की पड़ताल की। हल्वे वार्ड में निरीक्षण के दौरान टीम ने ट्रीटमेंट रूम, चिकित्सक रूम, ड्यूटी कक्ष की जानकारी प्राप्त की। चिकित्सक व मरीजों के लिए बहाल व्यवस्था की पड़ताल की। जब चिकित्सक कक्ष और उनके लिए बहाल व्यवस्था के संदर्भ में जानकारी प्राप्त की तो पता चला यहां न तो चिकित्सक रूम है और न ही उनके लिए शौचालय की व्यवस्था हैं। इतना ही नहीं टीम का जोर मरीजों की संख्या, बेड, चिकित्सकों की संख्या और उनकी उपस्थिति पर रहा। मानक के अनुसार उक्त कॉलेज में क्या व्यवस्था हैं इससे संबंधित एक-एक जानकारी टीम के सदस्यों ने विभिन्न विभागाध्यक्षों, चिकित्सकों एवं संबंधित अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की। हालांकि इस संदर्भ में टीम के सदस्य खुल कर कुछ बताने से कतराते रहे लेकिन

इशारों ही इशारों में सदस्यों ने बहुत कुछ बयां कर दिया। बता दें कुछ दिन बाद एमसीआई की टीम आने वाली हैं। टीम की ओर से कॉलेज का निरीक्षण किया जाना हैं। इस दौरान किसी तरह की छेद दिखाई न दें, इसके लिए विभाग की ओर से लगातार कॉलेज का निरीक्षण एवं व्यवस्था से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा रही हैं। एक-एक व्यवस्थाओं को अपडेट करने का प्रयास किया जा रहा हैं। इसी कड़ी में एमसीआई की मॉक टीम ने बुधवार को कॉलेज के व्यवस्था की पड़ताल की। ताकि कमियों की रिपोर्ट विभाग को की जा सके और ससमय उसका निराकरण भी किया जा सके। मौके पर विभागाध्यक्ष डा. अवधेश कुमार ¨सह, धर्मेन्द्र कुमार, डा. संतोष कुमार, डा. जेपी नारायण, डा. विन्देश्वर प्रियदर्शी आदि उपस्थित रहे।

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इनसेट

टूटा हुआ था बेसिन, नल से टपक रहा था पानी

बेतिया: एमसीआई की मॉक टीम द्वारा मेडिकल कॉलेज के निरीक्षण के दौरान कई छेद दिख गए। टीम के सदस्य जब हल्वे वार्ड के निरीक्षण के दौरान जैसे ही चिकित्सकों के लिए शौचालय आदि की जानकारी प्राप्त की। इससे संबंधित सवाल विभागाध्यक्ष से पूछा उनकी नजर मरीजों के लिए बहाल व्यवस्था पर पड़ी। यहां लगाया गया बेसिन काफी गंदा, टूटा हुआ और नल से लगातार पानी टपक रहा था। हालत ऐसी थी कि मरीज को कौन कहे आम आदमी तक बीमार पड़ जाए।

Posted By: Jagran