बगहा । सृजन और निर्माण के देवता भगवान विश्वकर्मा जयंती मनाने को लेकर वाल्मीकिनगर में तैयारियां पूरी हो गई हैं। सृजन के आदि देव भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना के लिए जगह-जगह प्रतिमा स्थापित करने पूजा करने की तैयारी है। विशेषकर पावर हाउस ,गंडक बराज नियंत्रण कक्ष, आटा चक्की मिल, गैराज, मोबाइल सेंटर, हार्डवेयर, वाहन शोरूम समेत छोटे-बड़े व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में भगवान विश्वकर्मा की पूजा के लिए लोग तैयारियों में जुटे हुए है। हालांकि मूर्तिकार विश्व शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति को आधुनिक साज सज्जा के साथ अंतिम रूप देने में जोर-शोर से लगे हुए हैं। पूजा को लेकर फूल, माला, झालर व अन्य सजावट के सामानों की दर्जनों छोटी-बड़ी दुकानें सज गई है। जहां दुकानों पर ग्राहक उमड़ पड़े हैं। इस बाबत पंडित सत्यानंद मिश्र ने बताया कि शिल्प शास्त्र के देवता भगवान विश्वकर्मा को शिल्पकार माना गया है।भगवान विश्वकर्मा ने ही इंद्रपुरी, द्वारिका, हस्तिनापुर, स्वर्गलोक, लंका और जगन्नाथपुरी का निर्माण करवाया था। उन्होंने ही भगवान शिव का त्रिशूल और विष्णु भगवान का सुदर्शन चक्र तैयार किया था। यही वजह है कि सभी इंजीनियर और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोग देव शिल्पी विश्वकर्मा को अपना भगवान मानते हैं और हर साल विश्वकर्मा जयंती पर उनकी पूजा करते हैं। प्रतिवर्ष विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। इस दिन सभी कारखानों, मोटर गैरेज, सभी सर्विस सेंटर आदि स्थानों पर विशेष पूजा की जाती है। छोटे-बड़े दुकान, गैरेज विश्वकर्मा मंदिर में पूजा को लेकर साफ-सफाई एवं रंग रोगन जारी है। भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा को कलाकारों की ओर से अंतिम रूप दिया जा रहा है।देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा को लेकर शहर से लेकर गांव तक तैयारी शुरू हो गई है। विशेषकर आटा चक्की मिल, गैरेज, मोबाइल सेंटर, हार्डवेयर, वाहन शोरूम, लकड़ी मिल समेत छोटे-बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भगवान विश्वकर्मा की धूमधाम से पूजा की जाती है। विश्वकर्मा पूजा के पूर्व वाशिग सेंटरों में वाहन मालिक अपने दो पहिया, चारपहिया एवं अन्य वाहनों की साफ-सफाई को लेकर बुकिग करवा रहे हैं। जबकि, भीड़-भाड़ से बचने के लिए कई वाहन मालिक अपने घर में ही वाहनों की साफ-सफाई कर पूजा-अर्चना करते हैं।

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