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जीवित्पुत्रिका व्रत शनिवार को, संतान की दीर्घायु और समृद्धि के लिए माताएं रखेंगी निर्जला उपवास

Published: Thu, 01 Oct 2026 12:15 PM (IST)

Jivitputrika Vrat Paran Time: संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए जीवित्पुत्रिका (जीउतिया) व्रत शनिवार को मनाया जाएगा, जिसमें माताएं ...और पढ़ें

शनिवार को माताएं प्रात:काल से ही निर्जला व्रत रखेंगी।

शनिवार को माताएं प्रात:काल से ही निर्जला व्रत रखेंगी।

संवाद सूत्र, बगहा (पश्चिम चंपारण)। Jivitputrika Vrat 2026: संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना का महापर्व जीवित्पुत्रिका (जीउतिया) व्रत शनिवार को मनाया जाएगा। इस अवसर पर माताएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगी।

आचार्य डॉ. अशोक मिश्रा ने बताया कि हृषीकेश पंचांग, महावीर पंचांग और विश्व पंचांग के अनुसार शनिवार को ही व्रत की तिथि निर्धारित है।

शुक्रवार से नहाय खाय

शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ इस कठिन व्रत की शुरुआत होगी। इसके बाद शनिवार को माताएं प्रात:काल से ही निर्जला व्रत रखेंगी।

मध्याह्न काल में नदी, तालाब या घर पर स्नान करने के बाद राजा जीमूतवाहन और जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा का श्रवण किया जाएगा।

रविवार को शुभ पारण

आचार्य डॉ. मिश्रा के अनुसार रविवार को प्रात:काल 7:30 बजे के बाद पारण का शुभ मुहूर्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा में गंधर्वराज जीमूतवाहन के त्याग और परोपकार का विशेष महत्व बताया गया है। राजा जीमूतवाहन अत्यंत दयालु और परोपकारी प्रवृत्ति के थे।

जीमूतवाहन के त्याग की कथा

राजा जीमूतवाहन ने नागवंश के एक बालक की रक्षा के लिए स्वयं को गरुड़ के सामने प्रस्तुत कर दिया था। उनके इस अद्भुत त्याग से प्रभावित होकर गरुड़ ने नाग बालक को जीवनदान दे दिया।

इसी कथा के माध्यम से संतान की रक्षा, दीर्घायु और मातृत्व के त्याग का संदेश जुड़ा हुआ है।

चील और सियारिन कथा

जीवित्पुत्रिका व्रत के साथ चील और सियारिन की कथा भी परंपरागत रूप से सुनी जाती है। इस कथा में व्रत की निष्ठा और नियमों के पालन का विशेष महत्व बताया गया है। आचार्य ने श्रद्धालुओं से प्रमाणित पंचांग के अनुसार निर्धारित तिथि पर ही व्रत करने की अपील की है।

चार अक्टूबर को पारण

चार अक्टूबर को निर्धारित समय के बाद पारण करने की सलाह दी गई है। श्रद्धालुओं से किसी भी प्रकार के भ्रम में न आने और पंचांग के अनुसार ही व्रत का पालन करने को कहा गया है। राजा जीमूतवाहन की जयजयकार के साथ माताएं संतान की लंबी उम्र की कामना करेंगी।

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