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गंडक नदी के कटाव से बेबस हुए किसान, 20 एकड़ फसल नदी में समाई; खेत बचाने के लिए अधपकी धान काटने को मजबूर 

Published: Wed, 23 Sep 2026 01:40 PM (IST)

पश्चिमी चंपारण के ठकराहा प्रखंड में गंडक नदी के तेज कटाव से किसान बेबस हैं, जहाँ करीब 20 एकड़ खेत ...और पढ़ें

गंडक नदी के कटाव से बेबस हुए किसान

गंडक नदी के कटाव से बेबस हुए किसान

HighLights

  1. गंडक नदी के कटाव से ठकराहा प्रखंड के किसान परेशान।

  2. करीब 20 एकड़ खेत और फसल नदी में समा गई।

  3. किसान अधपकी धान काटकर पशुओं के चारे में उपयोग कर रहे।

संवाद सूत्र, ठकराहा। ठकराहा प्रखंड के नवका टोला में गंडक का कटाव किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। खेत और जमीन नदी में समाने के डर से किसान अधपकी धान काटकर मवेशियों के चारे के लिए घर ले जाने को मजबूर हैं। कई किसान सुबह करीब तीन बजे ही खेतों में पहुंचकर फसल काटने में जुट जा रहे हैं। खेत बचाने की उम्मीद टूटने लगी तो किसानों के सामने अब एक ही सवाल है। फसल बचाएं या जमीन? 

पिछले दो दिनों में करीब 500 मीटर क्षेत्र में गंडक की तेज धार ने लगभग 20 एकड़ खेत और उसमें लगी धान व गन्ने की फसल को अपनी धारा में समा लिया है। कटाव की रफ्तार देखकर किसान तैयार फसल की कटनी का इंतजार भी नहीं कर पा रहे हैं। अधपकी धान काटकर पशुओं को खिलाना उनके लिए मजबूरी बन गई है। 

किसान छोटन यादव,दिनेश यादव,कैलाश यादव, भुलन यादव आदि का कहना है कि जब खेत ही नदी में समा रहा है तो कम से कम इस आखिरी फसल से अपने पशुओं की भूख तो मिटाई जा सके।

आंखों के सामने बह रही जमीन, बेबस किसान

कटाव स्थल पर किसानों की स्थिति विचलित करने वाली है। जिस खेत में कुछ दिन बाद तैयार धान की कटनी होनी थी, वहां अब जमीन का किनारा टूटकर गंडक में समा रहा है। किसान कभी खेत की मेड़ पर खड़े होकर कटाव देखते हैं तो कभी बची हुई फसल काटने में जुट जाते हैं। 

किसानों का कहना है कि वर्षों की मेहनत से तैयार की गई फसल और पुश्तैनी जमीन आंखों के सामने नदी में जा रही है, लेकिन वे इसे रोक पाने में खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।

हाई टेंशन टावर के अप स्ट्रीम में बढ़ रहा कटाव, आबादी पर भी खतरा

हाई टेंशन टावर के अप स्ट्रीम और पुराने एंटी-रोजन कार्य के पीछे कटाव तेजी से बढ़ रहा है। कटाव स्थल पीपी तटबंध से करीब 800 से 900 मीटर दूर बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार समय रहते प्रभावी कटावरोधी कार्य नहीं हुआ तो करीब एक हजार एकड़ कृषि भूमि के साथ बिजली टावर और हरख टोला व शिवपुर मुसहरी की आबादी भी प्रभावित हो सकती है। 

ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र की सुरक्षा पर पहले ही 25 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। कटाव रोकने के लिए बालू-मिट्टी की बोरियां, झाड़ियां और जियो बैग लगाए जा रहे हैं। हालांकि किसानों का कहना है कि गंडक की तेज धार के सामने ये उपाय पर्याप्त नहीं हैं। 

उनका आरोप है कि जिस स्थान पर नया कटाव तेजी से बढ़ रहा है, वहां प्रभावी बचाव कार्य शुरू करने के बजाय विभाग पुराने एंटी- रोजन कार्य के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत तक सीमित है।

किसानों की मांग, नए कटाव स्थल पर हो प्रभावी बचाव कार्य

किसानों का कहना है कि पुराने कार्य की मरम्मत जरूरी है, लेकिन इससे नए सिरे से हो रहे कटाव का समाधान नहीं होगा। जिस तेजी से गंडक खेतों को काट रही है, उस रफ्तार से बचाव कार्य नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है। किसानों ने नए कटाव स्थल पर तत्काल प्रभावी कटावरोधी कार्य कराने की मांग की है।

तटबंध और आबादी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्षतिग्रस्त एंटी-रोजन कार्य की मरम्मत कराई जा रही है। विभागीय स्तर पर आवश्यकतानुसार काम जारी है। - प्रवीण कुमार झा, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग।

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