बेतिया। जिला मुख्यालय का हजारीमल धर्मशाला। स्वतंत्रता संग्राम का सबसे बड़ा गवाह। आंदोलन का सबसे बड़ा गवाह बनने के बाद भी यह उपेक्षा का शिकार है। पूरा धर्मशाला खंडहर में तब्दील हो गया है। दीवारों पर पेड़ उग आए है। स्वतंत्रता संग्राम के इस धरोहर की सुधि लेने वाला कोई नहीं है। महत्वपूर्ण बात यह कि यहां महात्मा गांधी, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, आचार्य कृपलानी पहुंचे थे। इस ऐतिहासिक धर्मशाला में पांच हजार किसानों ने स्वतंत्रता सेनानी राज कुमार शुक्ल की अगुवाई में गांधी जी के समक्ष निलहों के जुर्म के खिलाफ गवाही दी थी। किसानों की गवाही राजेन्द्र प्रसाद और आचार्य कृपलानी ने दर्ज की थी। बात उन दिनों की हैं जब चंपारण में अंग्रेजी हुकूमत से जुड़े निलहों ने किसानों पर नील की खेती करने के लिए प्रताड़ित किया था। किसानों को तीन कट्ठे जमीन में नील की खेती करना अनिवार्य कर दिया था। इस अभियान को अंग्रेजों ने तीन कठिया नाम दिया था। निलहों का अत्याचार जब पराकाष्ठा पर पहुंचा तो चंपारण के सतवरिया के वीर सपूत राजकुमार शुक्ल ने तीन कठिया के खिलाफ आवाज बुलंद की। राजकुमार शुक्ल ने गांधी जी को चंपारण में चलकर किसानों की दशा व दिशा देखने का अनुरोध किया। 17 अप्रैल 1917 को गांधी जी बेतिया पुराना हजारीमल धर्मशाला पहुंचे। उनके साथ डॉ. राजेंद्र प्रसाद, आचार्य कृपालानी जैसे कई दिग्गज भी थे। यहां लगभग 15 हजार किसान अंग्रेजों के जुल्म की दास्तां सुनाने पहुंचे। इनसेट वयोवृद्ध अधिवक्ता जटाशंकर सिंह ने बताया कि निलहों के खिलाफ हुई गवाही का अध्ययन करने के बाद गांधी जी ने चंपारण की भूमि पर अहिसक आंदोलन सत्याग्रह का बिगुल बजा दिया था। देशप्रेमियों के महान आंदोलन व महान बलिदान के बाद देश स्वतंत्र हो गया। लेकिन अफसोस इस बात का है कि जिस भवन से पूरे देश में सत्याग्रह का बिगुल बजा। वह खंडहर बना हुआ है। इसके लिए केंद्र व राज्य सरकार दोनों जिम्मेवार है। उन्होंने जोर देकर कहा हजारीमल धर्मशाला को राष्ट्रीय स्मारक बनाने का बुद्धिजीवियों ने बहुत प्रयास किया। लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है।

Posted By: Jagran

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