3 महीने की ट्रेनिंग और फर्जी जॉइनिंग लेटर, बिहार में रेलवे ट्रैक पर धरे गए 2 फर्जी ट्रैकमैन
नरकटियागंज रेलखंड पर मुसहरवा हाल्ट के पास दो फर्जी ट्रैकमैन गिरफ्तार किए गए, जो महाराष्ट्र के निवासी हैं और उनके पास से जाली पहचान पत्र मिले हैं।

आरपीएफ की गिरफ्त में आरोपी। (जागरण)
HighLights
फर्जी ट्रैकमैन बनकर घूम रहे दो युवक गिरफ्तार।
महाराष्ट्र के युवकों से जाली रेलवे पहचान पत्र बरामद।
10-10 लाख रुपये लेकर फर्जी नौकरी का खुलासा।
संवाद सूत्र, नरकटियागंज (बेतिया)। नरकटियागंज रेलखंड में रेल ट्रैक पर आरपीएफ की टीम ने मुसहरवा हाल्ट के समीप दो फर्जी ट्रैकमैन को गिरफ्तार किया है।
दोनों युवक महाराष्ट्र के रहने वाले हैं और उनके पास से रेलवे की मिनिस्ट्री ऑफ रेलवे, भारत सरकार के नाम से बने दो पहचान पत्र, करीब चार किलो का लोहे का हथौड़ा, बांस की पट्टियां, लाल-हरे रंग के झंडे और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
प्रारंभिक जांच में दोनों के आईकार्ड फर्जी पाए गए हैं।आरपीएफ के पोस्ट कमांडर ऋतुराज कश्यप ने बताया कि बीते 25 अगस्त को दोनों की गिरफ्तारी के बाद रेल थाना नरकटियागंज में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
फरार युवक की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी हो रही है। दरअसल, बेतिया के पीडब्ल्यूआई अवधेश कुमार को की-मैन शिवपूजन साह ने सूचना दी कि मुसहरवा हाल्ट के पास तीन युवक संदिग्ध अवस्था में रेलवे ट्रैक पर घूम रहे हैं। उनके हाथ में हथौड़ा, फ्लैग और बांस की पट्टियां हैं।
सूचना पर सअनि कमलेश सिंह यादव पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। की-मैन शिवपूजन साह और साठी गैंग संख्या-25 के साथ करीब 8:40 बजे दो युवकों को पकड़ लिया।
गिरफ्तार फर्जी ट्रैकमैनों की पहचान धुले, महाराष्ट्र निवासी कुणाल आनंद (21), और जलगांव, महाराष्ट्र निवासी दिनेश बारकू धनगर (23) के रुप में हुई है। दोनों के पास से मिनिस्ट्री ऑफ रेलवे, गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के नाम से जारी आईडी कार्ड मिले हैं।
आईकार्ड पर समस्तीपुर के सीनियर डीपीओ के हस्ताक्षर है। गिरफ्तार दोनों आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
10-10 लाख रुपये लेकर नौकरी दिलाने का दावा
पूछताछ में गिरफ्तार दोनों युवकों ने पुलिस को बताया कि समस्तीपुर निवासी शैलेंद्र सिंह ने उन्हें स्पेशल स्पोर्ट्स कोटा के माध्यम से ट्रैकमैन के पद पर नियुक्त कराने के लिए 10-10 लाख रुपये लिए थे।
राशि राजू पाटिल के माध्यम से शैलेंद्र सिंह को दी गई थी। उन्हें समस्तीपुर मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय से नियुक्ति पत्र मिलने के बाद 29 नवंबर 2025 से फरवरी 2026 तक आरा रेलवे स्टेशन के समीप करीब तीन महीने का प्रशिक्षण भी दिया गया।
उनके साथ करीब 22 युवक प्रशिक्षण लिए थे। प्रशिक्षण के बाद सभी को घर भेज दिया गया। इसके बाद शैलेंद्र सिंह ने तीनों युवकों को फोन कर नरकटियागंज में ड्यूटी दिए जाने की बात कही और मुसहरवा हाल्ट की ओर ट्रैक सर्वे के लिए भेजा।
हालांकि, रेलवे के समस्तीपुर मंडल कार्यालय से आईडी कार्ड का सत्यापन कराने पर दोनों कार्ड फर्जी पाए गए। जांच में यह भी जानकारी मिली कि रेलवे में इस तरह से ट्रैकमैन की कोई भर्ती नहीं हुई है।
फर्जी नौकरी का नेटवर्क होने की आशंका
पुलिस की कार्रवाई से रेलवे में फर्जी नियुक्ति के नाम पर युवाओं से लाखों रुपये की ठगी किए जाने की आशंका गहरा गई है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि युवकों के दावे सही हैं तो उन्हें नियुक्ति पत्र, प्रशिक्षण और रेलवे से संबंधित पहचान पत्र किसने उपलब्ध कराया।
तीन महीने तक प्रशिक्षण के नाम पर उन्हें किसने और किस आधार पर प्रशिक्षण दिया, इसकी भी जांच जरूरी है। पुलिस अब कथित शैलेंद्र सिंह और राजू पाटिल की भूमिका की जांच कर रही है।
इनके अलावा प्रशिक्षण लेने वाले अन्य युवकों के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं फर्जी नियुक्ति का मामला व्यापक नेटवर्क से तो नहीं जुड़ा है।
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