बगहा। 13 अप्रैल से रामनवमी प्रारंभ हो रहा है। जिसको लेकर अभी से तैयारियां प्रारंभ होने लगी है। एक तरफ श्रद्धालु पूजा को लेकर अपनी तैयारी में लग गए हैं। वहीं दूसरी तरफ यजमानों के द्वारा पंडित की बुकिग भी प्रारंभ हो गई है। इस अवसर पर लगने वाले मेला में सामान की खरीद विक्री को लेकर छोटे छोटे दुकानदार भी अपनी तैयारी में लग गए हैं। लेकिन, सब किसी का मन अंदर ही अंदर कोरोना महामारी के भय को लेकर भी सशंकित है। सब यहीं सोचकर परेशान हो रहे हैं कि क्या पता सार्वजनिक स्थानों पर पूजा होगी या नहीं। पंडाल सजेंगे या नहीं। दुकानदारों का मन सशंकित है कि मेला लगेंगे या नहीं। दुकानें सजेंगी या नहीं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो सबकी तैयारी धरी की धरी रह जाएगी। श्रद्धालु जहां घर से ही पूजा करने में लग जाएंगे वहीं पंडितों की बुकिग भी आधी हो जाएगी। दूसरी तरफ हजारों दुकानदार बेरोजगार होने के साथ दो दिन में होने वाला लाखों का कारोबार भी प्रभावित होगा। नगर का सबसे प्रसिद्ध स्थान चंडी स्थान पर रामनवमी के अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं का आना होता है। साथ ही वहां सैकड़ों की संख्या में कलश स्थापना भी विभिन्न श्रद्धालुओं द्वारा की जाती है। इस अवसर पर पूजन सामग्री, फल-फूल से लेकर नारियल, कपूर, अगरबत्ती आदि के अलावा मेला में आए बच्चों के लिए हजारों की खरीदारी होती है। कोरोना गाइडलाइन के बीच पूजनोत्सव की तैयारी :

पुजारी उमेश मिश्र ने बताया कि कोरोना का प्रकोप पूरे देश में पुन: बढ़ने लगा है। ऐसे में इससे बचना हम सबकी जिम्मेदारी है। इसको देखते हुए अभी से तैयारी प्रारंभ कर दी गई है। आने वाले प्रत्येक श्रद्धालुओं को शारीरिक दूरी के साथ ही प्रवेश करने की अनुमति दी जा रही है। साथ ही अंदर एक व्यक्ति या एक परिवार के प्रवेश के बाद निकलने के लिए अलग मार्ग दिया गया है। उनके निकलने के बाद ही दूसरे व्यक्ति को प्रवेश दिया जा रहा है। इतना ही नहीं मंदिर परिसर की साफ सफाई दोनों शाम नियमित रूप से हो रही है। उन्होंने बताया कि नवरात्री के अवसर पर यहां पचासों दुकानें सजती है। मिठाई, फल-फूल से लेकर खिलौने आदि का हजारों का कारोबार होता है। अगर मेला का आयोजन नहीं हुआ तो उस पर ग्रहण लग जाएगा। साथ ही कई परिवार की रोजी रोटी छिन जाएगी। मिठाई विक्रेता राजेश कुमार, संजय मोदनवाल ने बताया कि यहां पिछले 15 वर्षों से यहां दुकान लगाया जाता है। प्रत्येक वर्ष रामनवमी के अवसर पर हजारों का कारोबार होता है। वहीं अन्य सामान जैसे खिलौना आदि के विक्रेता बनकटवा निवासी सोनू कुशवाहा, राजू शर्मा, विवेक कुमार ने बताया कि लोहा के घरेलू सामान व बच्चों के खिलौना से दस दिनों में 25 से 30 हजार की कमाई हो जाती है। मेला का आयोजन नहीं होने से पिछले साल भी परिवार भुखमरी का शिकार हो गया। जैसे तैसे परिवार की गाड़ी को खिच कर पटरी पर लाए तो पुन: निराशा ही हाथ लगने की संभावना बनती रही है। ऐतिहासिक है मंदिर :-

किवदंतियों के अनुसार ऐसा बताया जाता है कि यहां माता सती के शरीर का कोई अंश गिरा था। जिसपर मंदिर का निर्माण किया गया था। ग्रामीणों के अनुसार इस स्थल की चर्चा दुर्गा सप्तशती में भी मिलता है। कालांतर में यह मंदिर आसपास में कहीं अन्यत्र स्थित था। जो कतिपय कारणों से नष्ट हो गया। वर्तमान मंदिर भी काफी प्राचीन है। ऐसा बताया जाता है कि बेतिया राज की महारानी को माता के द्वारा स्वप्न में यहां मंदिर स्थापित करने का आदेश हुआ था। जिसके आलोक में महारानी के द्वारा इसका निर्माण कराया गया। अति प्राचीन मंदिर के रूप में विख्यात चंडी स्थान मंदिर की देखरेख आज भी बेतिया राज के संरक्षण में ही होता है। यहां के पुजारी का वेतन से लेकर मंदिर का रखरखाव आदि वहीं से संचालित किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहां दुकान लगाने वाले दुकानदार को कभी नुकसान नहीं होता है। साथ ही किसी दुकानदार का सामान बचकर वापस नहीं होता है। यहां पहुंचने वाले भक्तों के संबंध में बताया जाता है कि सच्चे मन से पूजा करने वाले की सारी मनोरथ बिन मांगे स्वयं ही पूरी हो जाती है।

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