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रात के अंधेरे में खैरटवा के पास टूटा चंपारण तटबंध, 15 गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा

Published: Mon, 28 Sep 2026 09:52 PM (IST)

गंडक नदी में बाढ़ के कारण सोमवार रात खैरटवा के पास चंपारण तटबंध टूट गया, जिससे लगभग 15 गांवों में ...और पढ़ें

पश्चिम चंपारण जिले में कई जगहों पर बाढ़ से परेशानी बढ़ गई है।  सेमरा लबेदहा पंचायत में गिरी झोपड़ी । ग्रामीण

पश्चिम चंपारण जिले में कई जगहों पर बाढ़ से परेशानी बढ़ गई है। सेमरा लबेदहा पंचायत में गिरी झोपड़ी । ग्रामीण 

HighLights

  1. सोमवार रात खैरटवा के पास चंपारण तटबंध टूट गया।

  2. गंडक नदी में पानी बढ़ने से 15 गांवों पर बाढ़ का खतरा।

  3. ग्रामीणों ने तत्काल तटबंध मरम्मत की मांग की, फसल क्षति आशंका।

जागरण संवाददाता, बगहा (पश्चिम चंपारण)। गंडक नदी की बाढ़ के बीच सोमवार की रात खैरटवा के पास अचानक चंपारण तटबंध टूट गया। रात करीब 8:30 बजे तेज बहाव के बीच लगभग 15 मीटर तटबंध टूटने से आसपास के गांवों में अफरातफरी मच गई।

तटबंध टूटने की सूचना मिलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके की ओर दौड़ पड़े। लोगों को अब गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश करने की चिंता सताने लगी है।

तेज आवाज सुनकर पहुंचे ग्रामीण

ग्रामीणों के अनुसार रात में तटबंध की ओर से पानी के तेज बहाव की आवाज सुनाई दी। कुछ लोग तत्काल तटबंध पर पहुंचे तो वहां पानी तेजी से तटबंध को तोड़कर बहता दिखा। देखते ही देखते इसकी सूचना आसपास के गांवों तक पहुंच गई। इसके बाद लोगों के बीच दहशत का माहौल बन गया।

15 गांवों पर मंडराया खतरा

तटबंध टूटने से चंदरपुर, रतवल, भिड़ारी, पतिलार, भठहिया, बरियारवा, चौबरिया, बड़ा लगुनाहा, चूड़िहरवा और विशुनपुवा समेत करीब 15 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों को बड़े पैमाने पर फसल क्षति की आशंका है। लोगों का कहना है कि पानी का बहाव बढ़ा तो खेतों के साथ आबादी वाले इलाकों में भी पानी प्रवेश कर सकता है।

टूटने के कारण पर सवाल

ग्रामीणों के अनुसार, गंडक नदी में बढ़े पानी के दबाव के कारण तटबंध टूटा है। हालांकि, कुछ ग्रामीणों ने तटबंध काटे जाने की आशंका भी जताई है। इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। पिछले वर्ष भी इसी क्षेत्र के आसपास तटबंध टूटने से भारी नुकसान हुआ था।

तत्काल मरम्मत की मांग

तटबंध टूटने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल मरम्मत कार्य शुरू कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि समय रहते टूटे हिस्से को नहीं संभाला गया तो पानी का फैलाव बढ़ सकता है और कई गांवों के साथ बड़ी मात्रा में फसल प्रभावित हो सकती है। ग्रामीण रात से ही संभावित खतरे को लेकर सतर्क हैं।

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