बेतिया। पांच साल तक विकास का रट लगाने वाली जनता अचानक मतदान के वक्त मुद्दे को किनारे कर देती है। जाति लोगों पर हावी हो जाता है। चुनावी मैदान में कूदे प्रत्याशी भी जाति के नाम पर वोट मांगने लगते हैं। सड़क, पुल, पुलिया, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित लोग जातीय लहर पर मतदान करने लगते हैं। ऐसे में विकास का मुद्दा गौण हो जाता, लेकिन अगले 5 सालों तक लोग विकास-विकास की रट ही लगाते हैं। रविवार को नगर के कोइरीटोला स्थित लक्ष्य कोचिग कैंपस में दैनिक जागरण की ओर से आयोजित चुनावी चौपाल में नगर के गणमान्य लोगों ने खुलकर अपनी बात रखी। लोगों ने कहा जाति नहीं इस बार विकास ही चुनावी मुद्दा होगा। जात के नाम पर वोट मांगने वाले प्रत्याशियों का बहिष्कार किया जाएगा। चौपाल में शामिल दुर्गादत्त पाठक ने कहा कि शिक्षित तबका जातीय समीकरण पर वोट नहीं करता है। जातीय समीकरण समाज के लिए घातक है। कुछ लोग जात के नाम पर जरूर वोट देते हैं। लेकिन ऐसे लोगों को बाद में निराशा हाथ लगती है। राहुल राज ने कहा कि जात के नाम पर वोट करने वाले लोग अप्रत्यक्ष रूप से समाज का नुकसान करते हैं। वे सोचते हैं कि वोटिग तो वह कर रहे हैं। लेकिन इसका खामियाजा पूरे समाज को भुगतना पड़ता है। जगमोहन कुमार ने कहा कि कई राजनैतिक पार्टियां जातिगत समीकरण को ध्यान में रखकर टिकट देती है। जात की राजनीति करने वालों की अगर जनता बहिष्कार कर दे तो समाज और देश विकास के शिखर पर पहुंच जाएगा। राजनीतिक दल के आकाओं को भी अपने फैसले पर विचार करना पड़ेगा। मुख्तार पटेल ने कहा कि चुनाव में राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र हित को ध्यान में रखकर मतदान करेंगे। जाति के नाम पर वोट मांगने वालों का बहिष्कार होगा। नीतू कुमारी ने कहा कि प्रत्याशियों को भी शिक्षित होना चाहिए। अशिक्षित जनप्रतिनिधि समाज के सर्वांगीण विकास नहीं कर सकते। चौपाल में आकृति कुमारी वर्मा, इंजीनियर अविनाश तिवारी, मनीष तिवारी, त्रिपुरारी शरण चौबे, भी आनंद सहित कई लोग शामिल रहे।

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