चंपारण तटबंध नहीं बना तो चुनाव नहीं लड़ूंगा, BJP विधायक का बड़ा एलान
West Champaran : भाजपा विधायक नारायण प्रसाद ने ऐलान किया है कि अगर उनके कार्यकाल में चंपारण तटबंध का उच्चीकरण ...और पढ़ें

नौतन के भाजपा विधायक नारायण प्रसाद।
HighLights
भाजपा विधायक नारायण प्रसाद ने चुनाव न लड़ने का ऐलान किया।
चंपारण तटबंध के उच्चीकरण और पक्कीकरण की रखी शर्त।
1993 से उठा रहे मुद्दा, हाल की बाढ़ से जनता आक्रोशित।
जागरण संवादाता, बेतिया (पश्चिम चंपारण)। चंपारण तटबंध टूटने से मची तबाही के बीच जनता का कोप झेल रहे नौतन के भाजपा विधायक नारायण प्रसाद आर- पार के मूड में है।
उन्होंने कहा है कि चंपारण तटबंध कट ऊंचीकरण और पक्कीकरण उनके वर्तमान कार्यकाल में नहीं हुआ तो वह अगला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। विधायक ने कहा कि वर्ष 1993 से वह इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन तीन दशक बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
हाल में बैरिया के फुलियाखांड़ में तटबंध टूटने के बाद नौतन और बैरिया प्रखंड के कई गांव बाढ़ की चपेट में आए है। विधायक ने कहा, तटबंध पुराना होने के साथ कई जगह कमजोर हो चुका है।
ग्रामीणों द्वारा तटबंध पर मवेशी बांधने तथा गोबर, लकड़ी और पुआल रखने से भी इसकी स्थिति प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि तटबंध की मजबूती के लिए स्थायी काम जरूरी है, केवल मरम्मत से समस्या का समाधान नहीं होगा।
1993 में किया था अनशन
विधायक ने बताया कि वर्ष 1993 में तटबंध टूटने के समय वह सामाजिक कार्यकर्ता थे। पक्कीकरण की मांग को लेकर उन्होंने तटबंध पर अनशन किया था।
आश्वासन मिलने के बाद अनशन समाप्त किया । वर्ष 2003 में तटबंध टूटने के समय वह जिला पार्षद थे। उस समय भी बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच पहुंचकर उन्होंने पक्कीकरण की मांग उठाई थी।
सदन में आधा दर्जन से अधिक बार उठाया मामला
विधायक ने बताया कि चंपारण तटबंध के उच्चीकरण और पक्कीकरण को लेकर पूर्व जल संसाधन मंत्री से लेकर वर्तमान मंत्री तक को लिखित आवेदन दिया गया है।
विधानसभा में भी वह आधा दर्जन से अधिक बार इस मुद्दे को उठा चुके हैं। उनका कहना है कि हर बार आश्वासन मिला, लेकिन स्थायी काम नहीं हुआ।
विधायक ने कहा कि जनता उनका परिवार है और वह क्षेत्र की इस पुरानी समस्या का समाधान चाहते हैं। उन्होंने नौतन-बैरिया प्रखंड को आपदा प्रभावित घोषित करने की मांग का भी समर्थन किया।
उल्लेखनीय है कि जीते 29 सितंबर की सुबह में तटबंधन टूटा था। उस वक्त विधायक नहीं थे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहुंचे , तब भी विधायक अनुपस्थित थे। इसको लेकर विधायक के प्रति क्षेत्र में काफी आक्रोश है।
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