बिहार में 4 माह बाद खुला वीटीआर, जंगल सफारी से राफ्टिंग तक रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद
Bihar wildlife safari : वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में चार महीने बाद 17 अक्टूबर से पर्यटन गतिविधियां फिर से शुरू ...और पढ़ें

पश्चिम चंपारण में वीटीआर का बम्बू हट । जागरण
HighLights
17 अक्टूबर से वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटन गतिविधियां शुरू।
जंगल सफारी, राफ्टिंग और प्राचीन मंदिरों का आनंद ले सकेंगे पर्यटक।
वाल्मीकि आश्रम, ट्री हट, कैनोपी वॉक प्रमुख आकर्षण हैं।
सुनील कुमार गुप्ता, वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण)। मानसून सीजन के वजह से लगभग चार माह तक बंद रहा वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटन गतिविधियां 17 अक्टूबर से फिर से शुरू हो गई है। पर्यटक अब वीटीआर के वाल्मीकिनगर की सुंदर वादियों में सुकून भरे पल बिता पाएंगे।
पर्यटकों को रिझाने की लिए वाल्मीकिनगर में अनेकों पर्यटन स्थल से लेकर धार्मिक स्थल मौजूद है। इसके साथ ही वाल्मीकिनगर की सीमा से सटे नेपाल भी है। पर्यटक नारायणी नदी की कल -कल कर बहती धारा, ऊंचे पहाड़ का अवलोकन कर सकते है।
जंगल सफारी के माध्यम से वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में निवास करने वाले शाकाहारी, मांसाहारी वन्य जीव के साथ ही विभिन्न प्रकार के पशु पक्षियों को देखने का आनंद भी उठा सकते हैं। साथ ही वीटीआर के वन क्षेत्र में प्राचीन काल से स्थापित ऐतिहासिक एवं पौराणिक मंदिर का दर्शन कर सकते है। साथ ही कैनोपी वाक,गंडक नदी में राफ्टिंग का भी आनंद उठा सकते है।
पर्यटन की दृष्टि से वाल्मीकिनगर के मुख्य पर्यटन स्थल
नर देवी मंदिर : वाल्मीकिनगर के गोल चौक से सटे लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर घने वन क्षेत्र के अंदर माता नर देवी का प्राचीन मंदिर है। जहां यह आस्था है कि भक्तों की सारी मन्नतें पूरी हो जाती हैं ।यह मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना वीर आल्हा उदल ने की थी
जटाशंकर मंदिर : वाल्मीकि टाइगर रिजर्व वन प्रमंडल दो के घने वन क्षेत्र के अंदर स्थानीय गोल चौक से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर भगवान महादेव शंकर का मंदिर है। जो जटाशंकर के नाम से विख्यात है ।वाल्मीकि नगर आने वाले पर्यटक इस मंदिर के दर्शन करना नहीं भूलते हैं।
महाकालेश्वर मंदिर : नारायणी तट पर सोनहा घाट के निकट दुर्गम वन क्षेत्र में भगवान शिव का प्राचीन मंदिर स्थापित है ।जिसे महाकालेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना बेतिया राज के राजा के द्वारा की गई थी ।
वाल्मीकि आश्रम : वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के घने वन क्षेत्र के अंदर भारत नेपाल सीमा पर महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली मौजूद है। जहां माता सीता के निर्वासन के बाद इसी वाल्मीकि आश्रम में माता सीता ने आश्रय लिया था। और दोनों वीर बालक लव कुश को जन्म भी दिया था ।इसी आश्रम में महर्षि वाल्मीकि ने प्रशिक्षण देकर लव कुश को प्रशिक्षित किया था। तथा माता सीता ने यहीं पर पाताल प्रवेश भी किया था ।बाल्मीकि नगर आने वाला कोई भी पर्यटक इस आश्रम के दर्शन करना नहीं भूलता।
ट्री हट : वाल्मीकि टाइगर रिजर्व प्रशासन के द्वारा पर्यटकों की सुविधा को देखते हुए पेड़ों के ऊपर लगभग 50 से 80 फीट की ऊंचाई पर बनी आधुनिक सुविधाओं से लैस कमरे पर्यटकों को अपनी तरफ खासा आकर्षित करते हैं। जहां नए जोड़े हनीमून का सुख भी उठा सकते हैं ।
कैनोपी वाक : वाल्मीकि टाइगर रिजर्व प्रशासन के द्वारा पर्यटकों में रोमांच पैदा करने के लिए अतिथि भवन के निकट ट्री हट और बंबू हट के बाद लगभग 600 मीटर की दूरी पर कैनोपी वाक उर्फ राम झूले का निर्माण किया गया है। जो लगभग 600 मीटर लंबा है और जिस पर चलना अद्भुत रोमांच को जन्म देता है ।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा ठहरने के लिए बंबू हट बनाए गए हैं। जिन्हें देखने मात्र का लोभ पर्यटक नहीं छोड़ पाते हैं। यह कमरे आधुनिक सुविधाओं से पूरी तरह सुसज्जित होने के साथ पूरी तरह बांस के बने हैं ।जिनमें रहना अत्यंत रोमांचकारी है।
जंगल सफारी: वाल्मीकि टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा पर्यटकों की सुविधा के लिए लगभग 900 वर्ग मीटर में फैले घने वन क्षेत्र में वास करने वाले विभिन्न प्रकार के जानवरों पशु पक्षियों के साक्षात दर्शन के लिए जंगल सफारी की व्यवस्था की गई है ।
गंडक नदी में राफ्टिंग : वाल्मीकि टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा पर्यटकों के लिए गंडक नदी की धारा में राफ्टिंग की भी व्यवस्था की गई है । वही दूसरी तरफ वाल्मीकिनगर से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर विदेशी वस्तुओं का बाजार त्रिवेणी के नाम से मशहूर है ।
जहां विदेशी वस्तुएं श्रृंगार प्रसाधन, कंबल ,जैकेट, खिलौने, कॉस्मेटिक, गरम मसाले, कपड़े भारी मात्रा में उपलब्ध है । मानसून सीजन के वजह से लगभग चार माह वीटीआर में बंद रहा पर्यटन गतिविधियां फिर से 17 अक्टूबर से खुल गई है।
उम्मीद है कि इस सत्र में बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का रुख करेंगे। जिनके स्वागत के लिए वीटीआर प्रशासन पूरी तरह तैयार है।
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