Bihar News : बगहा में रात को दिल का दौरा पड़ा तो दवा के लिए करना होगा सुबह का इंतजार!
बगहा अनुमंडल अस्पताल में रात के समय गंभीर मरीजों को दवाओं और ईसीजी जैसी आवश्यक सुविधाओं की कमी का सामना ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
बगहा अस्पताल में रात में दवाओं की कमी।
हृदयाघात मरीज को नहीं मिली जीवनरक्षक दवा।
निजी दुकानें बंद, जन औषधि केंद्र अपर्याप्त।
अबु साबीर, बगहा (पश्चिम चंपारण)। यहां रात में बीमार होना मना है। सुबह तक दिल को संभालें रखें, दिमाग पर भी जोर न डालें, ठंडा रखें ताकि आघात जैसा कुछ न हो। इनमें से कुछ भी हुआ तो शायद ही दवा मिले। यह पश्चिम चंपारण के बगहा का अनुमंडल अस्पताल है। यहां रात में गंभीर रूप से बीमार मरीजों के उपचार में दवाओं की उपलब्धता बड़ी बाधा है।
सोमवार की रात बगहा-एक निवासी 45 वर्षीय सौरभ कुमार को हृदयाघात हुआ। स्वजन उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे, ईसीजी की सुविधा नहीं मिली। जीवनरक्षक इंजेक्शन जन औषधि दुकान में नहीं मिली।
चिकित्सक ने रेफर कर दिया। रात करीब दो बजे निजी दुकान खोलवाकर जीवनरक्षक इंजेक्शन उपलब्ध कराया, तब जान बची। सप्ताह में चार-पांच केस ऐसे आ जाते हैं। पहले अस्पताल परिसर के आसपास स्थित दवा दुकानें रोस्टर के अनुसार रात में खुलती थीं।
इससे आपात स्थिति में मरीजों को दवाएं उपलब्ध हो जाती थीं। अस्पताल परिसर में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खुलने के बाद रात्रि रोस्टर के अनुसार दवा दुकानों का संचालन धीरे-धीरे बंद हो गया।
दवा दुकानदारों का कहना था कि जन औषधि केंद्र पर दवाएं उपलब्ध और सस्ती होने के कारण रात में उनकी दुकानों पर बिक्री ठप हो गई। इससे दुकानदारों ने रात्रि सेवा बंद कर दी।
हालांकि, गंभीर मरीजों के उपचार में जरूरी सभी दवाएं और जीवनरक्षक इंजेक्शन जन औषधि केंद्र पर उपलब्ध नहीं होना भी एक समस्या है। सोमवार को भी यही हुआ। हृदयाघात के मरीज को औषधि केंद्र पर दवा मिली नहीं और बाहर की सभी निजी दुकानें बंद थीं। ऐसे में जान पर बन आई।
निजी दुकानदारों के लिए बनाया गया था अनिवार्य रोस्टर
अनुमंडल अस्पताल परिसर के बाहर दवाओं की 10 निजी दुकानें हैं। साल 2011 में तत्कालीन एसडीएम अनिमेष परासर ने सात दुकानों को चयनित कर रोस्टर बनाया था। इसके अनुसार दुकानों का रात में संचालन अनिवार्य था, लेकिन करीब चार साल पहले अस्पताल में परिसर में जन औषधि केंद्र खुलने से इनकी बिक्री प्रभावित होने लगी।
दुकानदारों की रात में दुकान खोलने में रुचि घटने लगी और अब तो बंद ही हो गई। बगहा ड्रग्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित कुमार कहते हैं कि समन्वय और संवाद से फिर से दुकानें खुल सकती हैं।
ईसीजी और आपातकालीन उपचार पर भी सवाल
रात में हार्ट अटैक समेत अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में समय पर ईसीजी, जीवनरक्षक दवाओं और प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता बेहद जरूरी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात में कभी ईसीजी की सुविधा मिलती है तो कभी इसके लिए भटकना पड़ता है।
गंभीर मरीजों को तत्काल रेफर कर दिए जाने से स्वजन की चिंता बढ़ जाती है। बगहा से बेतिया की दूरी 60 से 65 किलोमीटर है। ऐसे में गंभीर मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिलने पर जान संकट में पड़ जाती है।
सात प्रखंडों के मरीज इस अस्पताल पर निर्भर हैं। रात में दवा की उपलब्धता को लेकर मरीजों और उनके स्वजन के साथ कई बार विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो चुकी है।
स्थानीय लोगों ने पूर्व की व्यवस्था बहाल करते हुए दवा दुकानों को रोस्टर के अनुसार रात में खोलने की मांग की है। साथ ही, आपातकालीन सेवा में ईसीजी संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त कर्मियों की तैनाती और गंभीर मरीजों के इलाज के लिए जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।
जन औषधि केंद्र खुलने के बाद पहले रोस्टर के अनुसार रात में खुलने वाली निजी दवा दुकानें बंद हो गई हैं। फिर से रोस्टर के अनुसार दुकानों का रात में संचालन शुरू कराने के लिए अनुमंडल पदाधिकारी सह रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष से पत्राचार किया जाएगा।
डा. एके तिवारी
प्रभारी उपाधीक्षक, अनुमंडल अस्पताल, बगहा
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