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मुजफ्फरपुर के मां बगलामुखी मंदिर में क्यों चढ़ाया जाता है हल्दी और दही, यहां गुरुवार का विशेष महत्व

Published: Sun, 18 Oct 2026 12:58 PM (IST)

Maa Baglamukhi Temple Muzaffarpur : मुजफ्फरपुर के मां पीतांबरी बगलामुखी सिद्धपीठ में हर गुरुवार को हल्दी और दही चढ़ाकर श्रद्धालु ...और पढ़ें

मां पीतांबरी बगलामुखी सिद्धपीठ, मंदिर के मंहत देवराज व पुजारी देवनारायण मिश्र। जागरण

मां पीतांबरी बगलामुखी सिद्धपीठ, मंदिर के मंहत देवराज व पुजारी देवनारायण मिश्र। जागरण

HighLights

  1. मुजफ्फरपुर के मां बगलामुखी सिद्धपीठ में हल्दी-दही अर्पित।

  2. 250 वर्ष पुराना मंदिर, अष्टधातु की दस भुजाओं वाली प्रतिमा।

  3. ग्रह शांति, विवाह, नौकरी के लिए श्रद्धालु करते हैं प्रार्थना।

अमरेन्द्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। Haldi and Curd Offering Tradition: पीली हल्दी, दही और मन में मनोकामना पूरी होने की आस। मुजफ्फरपुर के कच्ची सराय रोड स्थित मां पीतांबरी बगलामुखी सिद्धपीठ में हर गुरुवार को कुछ ऐसा ही आस्था का नजारा देखने को मिलता है।

कोई ग्रह शांति की कामना लेकर पहुंचता है तो कोई विवाह, नौकरी और कारोबार में तरक्की की प्रार्थना करता है।

श्रद्धालु माता को हल्दी और दही अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। करीब 250 वर्ष पुराने इस मंदिर में पूजा-अर्चना की विशेष परंपराएं हैं। तांत्रिक साधना के लिए भी इस सिद्धपीठ की अपनी पहचान है।

Maa Baglamukhi

करीब 250 वर्ष पुराना है मंदिर का इतिहास

कच्ची सराय रोड स्थित मां पीतांबरी बगलामुखी सिद्धपीठ श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर की स्थापना करीब 250 वर्ष पुरानी बताई जाती है। महंत देवराज के पूर्वज ने कलकत्ता के कारीगरों से मां बगलामुखी की प्रतिमा का निर्माण कराया था। वर्ष 1993-94 में मंदिर को वर्तमान स्वरूप देने की नींव रखी गई।

अष्टधातु की दस भुजाओं वाली प्रतिमा

मंदिर के गर्भगृह में अष्टधातु से निर्मित मां बगलामुखी की दस भुजाओं वाली प्रतिमा स्थापित है। माता पंच प्रेतासन पर विराजमान हैं। श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता के दर्शन करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

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हल्दी और दही चढ़ाने की विशेष परंपरा

मां बगलामुखी के दरबार में हल्दी और दही अर्पित करने की विशेष परंपरा है। श्रद्धालु ग्रह शांति, विवाह, नौकरी, व्यवसाय में उन्नति और परिवार में सुख-शांति की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में मनोकामना पूरी होने की आस में धागा बांधने की परंपरा भी है। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु दही, हल्दी, प्रसाद और नारियल अर्पित करते हैं।

वाम और दक्षिण मार्ग से होती है पूजा

मंदिर की विशेष पहचान यहां होने वाली धार्मिक साधना और तांत्रिक अनुष्ठान भी हैं। यहां वाम मार्ग और दक्षिण मार्ग, दोनों पद्धतियों से पूजा-अर्चना की जाती है। माता के गर्भगृह के नीचे सहस्रदल महायंत्र स्थापित है। प्रतिदिन सुबह और शाम माता की आरती होती है। ग्रह शांति और मनोकामना की पूर्ति के लिए श्रद्धालु हवन भी कराते हैं।

परिसर में अन्य देवी-देवताओं के भी दर्शन

मंदिर परिसर में मां बगलामुखी के साथ मां त्रिपुर सुंदरी, मां तारा, काल भैरव, भोले बाबा, ब्रह्म बाबा, काली माई और हनुमान जी के भी दर्शन किए जा सकते हैं। परिसर में प्रतिदिन मंत्र जाप और हवन होता है। श्रद्धालु संकल्प लेकर पूजा-अर्चना कराते हैं।

रेलवे स्टेशन से दो किलोमीटर दूर है मंदिर

पुजारी देवनारायण मिश्र ने बताया कि मंदिर परिसर में बगलामुखी माता के साथ मां त्रिपुर सुंदरी, मां तारा और काल भैरव, भोले बाबा, ब्रहम बाबा, काली माई, हनुमान जी के भी दर्शन किए जा सकते हैं। मनोकामना की पूर्ति के लिए श्रद्धालु परिसर में धागा बांधते हैं।

मां पीतांबरी बगलामुखी सिद्धपीठ मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। रामदयालु बस स्टैंड से मंदिर लगभग तीन किलोमीटर और भगवानपुर बस स्टैंड से करीब चार किलोमीटर दूर है। श्रद्धालु रिक्शा, ऑटो या निजी वाहन से मंदिर पहुंच सकते हैं।

माता को हल्दी और दही चढ़ाने की विशेष परंपरा है। श्रद्धालु दर्शन-पूजन के बाद अपनी मनोकामना लेकर माता के दरबार में पहुंचते हैं। खासकर प्रेत बाधा, ग्रह शांति, शादी-विवाह, नौकरी, व्यवसाय की उन्नति, परिवार में शांति की कामना लेकर यहां पर भक्त आते है। उनकी मनोकामना पूरी होती है।
मंहत देवराज, बगलामुखी मंदिर

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