बगहा अस्पताल में रात को जान बचाने वाली दवाओं का अकाल, हार्ट अटैक के मरीज को नहीं मिला इंजेक्शन
बगहा अनुमंडलीय अस्पताल में रात के समय गंभीर मरीजों के लिए जीवनरक्षक दवाओं की कमी एक बड़ी समस्या बन गई ...और पढ़ें

बगहा अस्पताल में रात को जान बचाने वाली दवाओं का अकाल
HighLights
बगहा अस्पताल में रात में जीवनरक्षक दवाओं का गंभीर अभाव।
हार्ट अटैक मरीज को इंजेक्शन न मिलने से जान पर संकट।
जन औषधि केंद्र के कारण निजी दुकानें रात में बंद हुईं।
संवाद सहयोगी, बगहा। अनुमंडलीय अस्पताल बगहा में रात के समय गंभीर मरीजों के इलाज में दवाओं की कमी परेशानी का सबब बन रही है। सोमवार की रात हृदयाघात के एक गंभीर मरीज को अस्पताल में इनोक्सापैरिन सोडियम इंजेक्शन (40 एमजी) उपलब्ध नहीं हो सका।
जीवनरक्षक इंजेक्शन के अभाव में मरीज की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई। ऐसे में रात करीब दो बजे मनोज मेडिकल के संचालक सुधीर कुमार ने मानवता दिखाते हुए अपनी दुकान खुलवाकर इंजेक्शन उपलब्ध कराया। इसके बाद मरीज को बेहतर इलाज के लिए बेतिया के निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां उसकी जान बचाई जा सकी।
जन औषधि केंद्र खुलने के बाद बंद हुआ रात का रोस्टर
स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले अस्पताल परिसर के आसपास स्थित मनोज मेडिकल, एकता मेडिकल, शुक्ला मेडिकल, मेडिको फार्मा और मेडिसिन सेंटर सहित अन्य दवा दुकानें रोस्टर के अनुसार रात में खुलती थी। इससे आपात स्थिति में मरीजों को दवाएं उपलब्ध हो जाती थीं।
हालांकि, अस्पताल परिसर में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खुलने के बाद रात्रि रोस्टर के अनुसार दवा दुकानों का संचालन धीरे-धीरे बंद हो गया।
जन औषधि केंद्र पर कई दवाएं उपलब्ध
दवा दुकानदारों का कहना है कि जन औषधि केंद्र पर कई दवाएं उपलब्ध होने के कारण रात में उनकी दुकानों पर बिक्री नहीं हो रही थी। इसी वजह से उन्होंने रात्रि सेवा बंद कर दी। हालांकि, गंभीर मरीजों के इलाज में जरूरी सभी दवाएं और जीवनरक्षक सूई जन औषधि केंद्र पर उपलब्ध नहीं होने से परेशानी बढ़ गई है।
वहीं दूसरी ओर रात में रोस्टर की पहले से लागू व्यवस्था को लेकर बगहा भाजपा जिलाध्यक्ष अचिंत्य कुमार लल्ला ने सिविल सर्जन बेतिया से संपर्क कर पूर्व की व्यवस्था गंभीर मरीजों के जान बचाने की पहल करने की बात की। सीएस ने जिलाध्यक्ष को आश्वस्त किया कि ड्रग इंस्पेक्टर से बात करके शीघ्र ही रात में पूर्व की भांति दवा दुकानें संचालित की जाएगी।
ईसीजी और आपातकालीन इलाज पर भी सवाल
रात में हार्ट अटैक समेत अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में समय पर ईसीजी जांच, जीवनरक्षक दवाओं और प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता बेहद जरूरी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात में कभी ईसीजी की सुविधा मिलती है तो कभी इसके लिए परेशानी उठानी पड़ती है। गंभीर मरीजों को तत्काल रेफर कर दिए जाने से स्वजन की चिंता बढ़ जाती है। बगहा से बेतिया की दूरी करीब 60 से 65 किलोमीटर है। ऐसे में गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिलने पर उनकी जान जोखिम में पड़ सकती है।
सात प्रखंडों के मरीज अस्पताल पर निर्भर
सात प्रखंडों के मरीज इस अस्पताल पर निर्भर हैं। रात में दवा की उपलब्धता को लेकर मरीजों और उनके स्वजन के साथ कई बार विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो चुकी है।
स्थानीय लोगों ने पूर्व की व्यवस्था बहाल करते हुए दवा दुकानों को रोस्टर के अनुसार रात में खोलने की मांग की है। साथ ही आपातकालीन सेवा में ईसीजी संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त कर्मियों की तैनाती और गंभीर मरीजों के इलाज के लिए जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।
जन औषधि केंद्र खुलने के बाद पहले रोस्टर के अनुसार रात में खुलने वाली दवा दुकानें बंद हो गई हैं। अब फिर से रोस्टर के अनुसार दुकानों का रात में संचालन शुरू कराने के लिए अनुमंडल पदाधिकारी सह रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष से पत्राचार किया जाएगा। - डॉ. एके तिवारी, प्रभारी उपाधीक्षक, अनुमंडलीय अस्पताल, बगहा
यह भी पढ़ें- शादी का झांसा देकर युवती को रेड लाइट एरिया में बेचा, केसरिया पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार
