मोतिहारी में छापामारी में बरामद पैसों को किया गायब, SP ने 4 सिपाहियों को किया बर्खास्त
मोतिहारी के गोविंदगंज थाना क्षेत्र में छापेमारी के दौरान बरामद रुपयों में हेराफेरी करने के आरोप में चार सिपाहियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
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एआई जनरेटेड फोटो
HighLights
मोतिहारी में चार सिपाही सेवा से बर्खास्त।
छापेमारी में बरामद रुपयों में हेराफेरी का आरोप।
भ्रष्ट आचरण, लापरवाही के दोषी पाए गए।
संवाद सहयोगी, मोतिहारी। गोविंदगंज थाना क्षेत्र के रडिया गांव में जालसाजी व ठगी के मामले में छापेमारी के दौरान बरामद रुपये में हेराफेरी करना चार सिपाहियों को भारी पड़ गया।
पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने कार्रवाई करते हुए सिपाही संख्या 940 संतोष कुमार, सिपाही संख्या 672 गौतम कुमार यादव, सिपाही संख्या 633 कृष्ण कुमार और सिपाही संख्या 14 ओमप्रकाश को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है।विभागीय जांच में चारों को कर्तव्य के प्रति लापरवाही, मनमानेपन, भ्रष्ट आचरण और नैतिक अक्षमता का दोषी पाया गया।
मामला गोविंदगंज थाना क्षेत्र के रडिया गांव निवासी अमरेश पांडेय उर्फ नारद पांडेय के घर से 19 लाख रुपये, दो मोबाइल व एक सोने की चेन छीने जाने से जुड़ा है।
मामले में सात से नौ अपराधियों के शामिल होने की बात सामने आई थी। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद आरोपितों की गिरफ्तारी और लूट की राशि व अन्य सामान की बरामदगी के लिए वरीय पदाधिकारी के निर्देश पर छापेमारी दल गठित किया गया था
छापामारी में 4.15 लाख रुपये हुए थे बरामद
पुलिस टीम ने 21 नवंबर 2025 की रात प्राथमिकी अभियुक्त चंदन सिंह के घर पर छापेमारी की। वहां से 4.15 लाख रुपये नकद, सोने जैसे 10 बिस्कुट और सोने जैसी एक चेन बरामद की गई।
आरोप है कि छापामारी दल में शामिल उक्त चारों सिपाहियों ने मौके का फायदा उठाकर बरामद बैग से कुछ रुपये निकाल लिए और उन्हें गायब कर दिया। बाद में पूछताछ के दौरान चारों सिपाहियों ने चंदन द्वारा बताए जाने पर तीन लाख रुपये गड्ढे में छिपाए जाने की बात कही।
उक्त राशि बरामद होने के बाद इसकी विधिवत जब्ती सूची तैयार की गई। गोविंदगंज थानाध्यक्ष सह पुनि राजकुमार मिश्रा के आवेदन पर 22 नवंबर को साहेबगंज, मुजफ्फरपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कर चारों सिपाहियों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
स्पष्टीकरण के बाद हुई विभागीय जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए चारों सिपाहियों को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई तथा उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया। उनके जवाब को असंतोषजनक पाए जाने के बाद विभागीय जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और अभिलेखों का विधिवत परीक्षण किया गया। जांच प्रतिवेदन में चारों को आरोपों के लिए पूर्णतः दोषी पाया गया।
जांच में उनके कृत्य को भ्रष्ट आचरण और नैतिक अक्षमता से परिलक्षित माना गया। पुलिस विभाग की छवि धूमिल करने तथा बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-III एवं बिहार पुलिस एक्ट, 2007 के रूल-31(ओ) के उल्लंघन को आधार बनाया गया।
इसके बाद बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14(xi) एवं पुलिस हस्तक नियम-824 के तहत चारों को सेवा से बर्खास्त करने की कार्रवाई की गई। पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने कार्रवाई की पुष्टि की है।
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