चेहराकलां, जागरण संवाददाता। कटहारा ओपी क्षेत्र के ताल सेहान गांव स्थित गैस एजेंसी के चालक की वितरण के दौरान करंट लगने से मौत हो गई। जबकि खलासी बुरी तरह जख्मी हो गया। घटना के बाद चालक के शव का एवं गंभीर रूप से जख्मी बालक का लगभग आठ घंटे तक कोई पता नहीं चल सका है। दोनों के स्वजन एवं ग्रामीण उग्र हो कर सड़क पर उतर गए।

देर शाम तक दोनों का पता नहीं चल सका था। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। घटना के संबंध में बताया गया है कि रौशन गैस एजेंसी की गाड़ी ताल सेहान गांव में मो. मुर्तजा के घर के समीप गैस सिलेंडर लेकर पहुंची। गाड़ी पर से चालक एवं खलासी गैस सिलेंडर उतार कर उपभोक्ताओं दे रहे थे। इसी क्रम में 11 हजार बोल्ट की तार काफी नजदीक होने के कारण चालक करंट की चपेट में आ गया।

गोरौल के रहने मोहन कुमार की हुई मौत

करंट की चपेट में आने से गोरौल थाना क्षेत्र के बकसामा गांव निवासी हरिलाल सिंह उर्फ नाथू सिंह के पुत्र अक्षय कुमार उर्फ मोहन कुमार की मौत घटना स्थल पर ही हो गई। वहीं खलासी खाजेचांद छपरा गांव निवासी दयाली राम का पुत्र 13 वर्षीय पुत्र नीतीश कुमार गंभीर रूप से जख्मी हो गया। लोगों का कहना है कि जैसे ही इस घटना की जानकारी गैस एजेंसी के मालिक को मिली वैसे ही मालिक घटना स्थल पर पहुंच गए।

इसके बाद दोनों को इलाज कराने के बहाने शव एवं नाबालिग खलासी को अपनी गाड़ी से लेकर फरार हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना स्थल पर जैसे ही रौशन गैस एजेंसी का चालक अक्षय कुमार गाड़ी लगाकर गैस सिलेंडर उतारने के दौरान गाड़ी के ऊपर गया तो 11 हजार बोल्ट का तार काफी नीचे रहने के कारण करंट प्रवाहित तार ने उसे अचानक ऊपर खींच लिया और कुछ देर के बाद वह जमीन पर गिर गया।

ग्रामीणों ने सड़क पर लगाया जाम

गाड़ी के उसके नीचे गिरते ही लोग घटनास्थल पर जुट गए। जब तक उसे उपचार के लिए ले जाया जाता तब तक उसकी मौत हो गई थी। घटना के बाद से स्वजन एवं ग्रामीण दोनों की बरामदगी के लिए सड़क जाम किए हुए हैं। इस घटना के बाद स्थानीय मुखिया पति नागेश्वर सहनी एवं पंचायत समिति सदस्य रविभूषण ने बताया कि बिजली विभाग की लापरवाही के कारण उक्त गांव में बड़ी घटना घटी है।

इस मामले में पंचायत समिति सदस्य रविभूषण ने बताया कि आम जनता की ओर से बिजली विभाग को कई बार लिखित रूप से जानकारी दी गई थी कि 11 हजार बोल्ट की तार बीच रास्ते पर लटकी हुई है। किसी भी समय अप्रिय घटना घट सकती है। इसके बाद भी विभाग इस ओर से उदासीन बनी रही।

Edited By: Parmendra Kumar

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