वैशाली। पुत्र की लंबी आयु के साथ अन्य कामनाओं को लेकर माताओं ने आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी रविवार को जिउतिया व्रत किया। व्रत के दौरान व्रती मां निर्जला रहीं। शाम में माताओं ने नारायणी में पवित्र स्नान किया। इसके बाद विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। काफी संख्या में महिलाओं ने नारायणी तट पर ही सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की। अपनी संतान की लंबी आयु की कामना भगवान से की। सोमवार की सुबह महिलाएं पारण करेंगी। बथना महोदत के आचार्य प्रेम कुमार पाठक के अनुसार पारण का मुहूर्त सुबह 6 बजे के बाद है।

शनिवार की देर रात व्रतियों ने सरगही की। उसके बाद से निर्जला उपवास शुरू हुआ। शाम में महिलाओं ने विधि-विधान के साथ पूजा-पाठ के बाद जीमूतवाहन की कथा सुनीं। पंडितों के अनुसार यह कथा महादेव एवं पार्वती के संवाद पर आधारित है। इसमें सियार व चिल्हौर की कथा भी शामिल है। कहा जाता है कि सियार एवं चिल्हौर दोनों ने यह व्रत रखा था। लेकिन सियार ने व्रत के दौरान अन्न ग्रहण कर लिया। जिससे उसके सात पुत्रों की असमय मौत हो गई थी। फिर चिल्हौर ने पूरे विधि-विधान के साथ व्रत रखा और सियार के सातों पुत्रों को जीवित कराया। आर्थिक मंदी के बावजूद इस बार सोने के जिउतिया की खुब बिक्री हुई। जीतिया में महिलाएं पूजा-पाठ के उपरांत अपने साम‌र्थ्य के अनुसार सोने एवं चांदी का जीतिया पहनती हैं।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप