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नालंदा के किसान की बेटियां बनीं सरकारी नर्स, हाजीपुर अस्पताल में मिसाल बनीं पूजा

Published: Fri, 06 Nov 2026 09:23 PM (IST)

नालंदा के एक किसान परिवार की दो बेटियों ने सरकारी स्टाफ नर्स की नौकरी हासिल कर परिवार का सहारा बनी ...और पढ़ें

नालंदा के किसान की बेटियां बनीं सरकारी नर्स, हाजीपुर अस्पताल में मिसाल बनीं पूजा

नालंदा के किसान की बेटियां बनीं सरकारी नर्स, हाजीपुर अस्पताल में मिसाल बनीं पूजा

HighLights

  1. किसान परिवार की दो बेटियों को मिली सरकारी नौकरी।

  2. पूजा कुमारी हाजीपुर सदर अस्पताल में स्टाफ नर्स।

  3. बेटियों ने परिवार का सहारा बनकर नाम रोशन किया।

रविकांत सिंह, हाजीपुर। खेती-बाड़ी से होने वाली सीमित आमदनी के बावजूद नालंदा जिले के नूरसराय थाना क्षेत्र के पांडे चक निवासी नविन्दु प्रसाद और कविता कुमारी ने अपनी चारों बेटियों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी।

परिवार की दो बड़ी बेटियां सरकारी नौकरी में चयनित होकर अब घर का संबल बनी हैं। वे अपनी दो छोटी बहनों की पढ़ाई में भी मदद कर रही हैं। माता-पिता अपनी बेटियों को लक्ष्मी मानते हैं और उनके सम्मान में दीप जलाते हैं।

चार बहनों में दूसरे नंबर की पूजा कुमारी फिलहाल हाजीपुर सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में स्टाफ नर्स के रूप में सेवाएं दे रही हैं। उनकी बड़ी बहन का भी स्टाफ नर्स के पद पर चयन हुआ है और वह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, गया में तैनात हैं। पूजा के पिता किसान हैं और मां कविता कुमारी एक गृहिणी हैं।

पूजा की प्रारंभिक शिक्षा एसएस गर्ल्स सेकेंडरी स्कूल, बिहारशरीफ में हुई। वहां से दसवीं पास करने के बाद उन्होंने महाबोधि कॉलेज, नालंदा से इंटर की पढ़ाई पूरी की। चिकित्सा क्षेत्र में रुचि होने के कारण उन्होंने पैरामेडिकल का फॉर्म भरा और प्रवेश परीक्षा में चयनित हुईं।

इसके बाद उन्होंने सरकारी जीएनएम स्कूल, जहानाबाद से जीएनएम नर्सिंग का कोर्स पूरा किया। अनुभव हासिल करने के लिए पूजा ने पटना के खेमनीचक स्थित एक निजी अस्पताल में करीब तीन वर्षों तक काम किया। उनकी मेहनत रंग लाई और वर्ष 2026 में सरकारी सेवा में स्टाफ नर्स के रूप में उनका चयन हो गया।

नौकरी की खबर से परिवार में खुशी छा गई। सदर अस्पताल, हाजीपुर में कार्यभार संभालने के बाद उन्हें इमरजेंसी वार्ड की जिम्मेदारी दी गई, जहां वह पूरी निष्ठा से काम कर रही हैं।

पूजा ने बताया कि इमरजेंसी में तेजी से काम करना और हर समय सक्रिय रहना जरूरी होता है, क्योंकि यहां ऐसे मरीज आते हैं जिन्हें तुरंत इलाज की जरूरत होती है। रातभर जागकर काम करने के बावजूद उन्हें अच्छा महसूस होता है, क्योंकि मरीजों की देखभाल और उनके स्वास्थ्य की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि उनके स्टाफ नर्स बनने पर माता-पिता को बेहद गर्व है। उन्होंने काफी मेहनत से पढ़ाया और आज उनकी बेटी अपने पैरों पर खड़ी है।

पूजा के अनुसार, नर्सिंग केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, सेवा और मानवता का कर्तव्य है। वहीं, अस्पताल प्रशासन का भी कहना है कि पूजा जैसी युवा और कर्मठ नर्सें सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की असली ताकत हैं।

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