सदर प्रतिनिधि, हाजीपुर

राष्ट्रीय स्तर पर केला की विभिन्न प्रजातियों में चीनीया, अलपान तथा मालभोग केला के लिए हाजीपुर पहले से ही प्रसिद्ध है। उसके बाद अब हाजीपुर का मैदानी और दियारा क्षेत्र अमरूद के उत्पादन में अपनी पहचान कायम कर रहा है।

यहां के सैकड़ों टोकरी अमरूद रोजाना प्रदेश के गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, बिहारशरीफ, आरा, पटना सहित कई अन्य शहरों में बिक्री हेतु निर्यात हो रहे हैं। इसके अलावा पड़ोसी प्रदेश झारखंड तथा बंगाल भी भेजा जाते हैं। जिले के किसानों ने अपनी मेहनत तथा बेहतर तकनीक के बल पर अमरूद के उत्पाद में महारत हासिल की है। सूबे की सरकार खेती के बल पर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयासरत है। यहां के किसान खेती के साथ-साथ उद्यान के रूप में अमरूद की आधुनिक प्रजाति एल 49, केजी तथा जन्दाहा किस्म के अमरूद का उत्पादन कर नौजवानों को एक नई सीख दे रहे हैं। रामाशीष चौक स्थित मंडी में बसंत एवं ग्रीष्म ऋतु में भी किसान प्रतिदिन सुबह सैकड़ों टोकरी अमरूद बिक्री हेतु लाते हैं और दूरदराज के व्यापारी इसे अच्छी रकम देकर खरीदने के बाद ले जाते हैं। मंडी के गद्दीदार मुन्ना सिंह, हरेन्द्र दास, महेश दास तथा व्यवस्थापक वीरचन्द्र राय बताते हैं कि एल 49 प्रजाति का अमरूद ऊंचे दामों पर बिक जाता है। इसकी विशेषता है कि इसका छिलका मोटा होता है तथा बाहर भेजे जाने के बाद कई दिनों तक सुरक्षित रहता है जबकि लोकल प्रजाति की जन्दाहा अमरूद भी अपने आप में मशहूर है इसमें छिलका पतला होता है तथा गुदा ज्यादा होता है। मंडी में ज्यादा मात्रा में अमरूद तेरसिया दियारा, रामभद्र, मनुआ, चकबिजगानी, क्षेत्र के किसान बिक्री के लिए लाते हैं। प्रगतिशील किसानों में झल्लू गोप, गंगा सागर राय, ओंकार नाथ सिंह, फलाहारी राय, अशोक सिंह, जयराम सिंह, शंभू सिंह, राजीव कुमार सिंह गोल्टू, रामजी दास, बालेश्वर दास, विन्देश्वर दास प्रमुख रूप से यहां अमरूद लाते हैं। इनका कहना है कि अगर कृषि विभाग से सहायता मिले तो उत्पादन में और वृद्धि हो सकती है।

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