संवाद सूत्र, हाजीपुर : आंधी हो या तूफान हम त जइबे करबई, बुढि़या माई के दरबार। यही गीत गाते शुक्रवार को हजारों की संख्या में महिलाएं हरौली स्थित बुढि़या माई पूजन के लिए निकली। पूजा की थाल एवं धूप-दीप लेकर महिलाओं ने बुढि़या माई की पूजा-अर्चना की। जिले के कोने-कोने से आस्था व श्रद्धा के साथ पूजा के लिए अपने घर से निकले श्रद्धालुओं को मुसलाधार बारिश भी नहीं डिगा पायी। टेम्पो, बोलेरो, बस-कार, जीप आदि से काफी संख्या में महिलाएं हरौली स्थित बुढि़या माई पूजन के लिए पहुंची थी। हाजीपुर-लालगंज मार्ग के हरौली स्थित बुढि़या माई स्थान श्रद्धालुओं को आस्था का प्रतीक है।

बताते चलें कि यहां पुराने जमाने से ही श्रद्धालु पूजन के लिए आते रहे हैं। यह स्थान ज्येष्ठ शुक्लपक्ष दशहरा से सावन तक प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को महिला श्रद्धालुओं के आगमन से गुलजार रहता है। यहां 95 फीसदी महिलाएं पूजन के लिए आती है। जिस घर में शादी-विवाह होता है, वहां की महिलाएं तो अवश्य बुढि़या माई पूजन के लिए आती है। मान-मनौती और मुंडन आदि संस्कार भी होते हैं। महिलाओं का मानना है कि बुढि़या माई की कृपा से ही घर परिवार सुखी-संपन्न होता है। सैकड़ों दुकानें सजी है। जिले के अलावा उत्तरप्रदेश, सारण, छपरा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर आदि स्थानों से भी दुकानदार पहुंचे हैं। महिला प्रसाधन, स्टील के बर्तन, सिंदूर, मिष्टान आदि की खूब बिक्री होती है। कई दुकानदारों ने बताया कि उनकी दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ से अच्छी बिक्री हो रही है।

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