बिहार की शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलता सुपौल का एक स्कूल, 8 कक्षाएं; 340 बच्चे और मात्र 4 कमरे
सुपौल के अनंतपुर ब्राह्मण टोला स्थित मध्य विद्यालय गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। 340 छात्रों के लिए मात्र 6 ...और पढ़ें

फाइल फोटो
HighLights
340 छात्रों पर मात्र 6 शिक्षक, 4 कमरे उपलब्ध।
जर्जर भवन में पढ़ाई, कभी भी हो सकता है हादसा।
6 साल से विकास निधि नहीं, अभिभावक चिंतित।
संवाद सूत्र, जदिया (सुपौल)। मध्य विद्यालय अनंतपुर ब्राह्मण टोला इन दिनों गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का दावा करने वाली सरकारी व्यवस्था यहां जमीनी हकीकत से कोसों दूर नजर आ रही है। विद्यालय में वर्ग एक से आठवीं तक की पढ़ाई होती है, लेकिन संसाधनों की भारी कमी के कारण बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
विद्यालय में कुल 340 बच्चे नामांकित हैं, जबकि उनके शिक्षण के लिए मात्र छह शिक्षक पदस्थापित हैं। यही नहीं, इतने बड़े छात्र-छात्राओं की संख्या के अनुपात में विद्यालय में केवल चार कमरे ही उपलब्ध हैं।
जर्जर और पुराने भवन में पढ़ने को मजबूर
मजबूरीवश बच्चों को पढ़ाने के लिए एक जर्जर और पुराने भवन का भी उपयोग किया जा रहा है, जो कभी भी हादसे को दावत दे सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भवन वर्षों पुराना है और इसकी हालत इतनी खराब है कि बरसात के दिनों में यहां बच्चों को बैठाना खतरे से खाली नहीं। बुधवार को विद्यालय में कुल 165 बच्चे ही उपस्थित पाए गए।
इस संबंध में विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक धीरेन्द्र कुमार ने बताया कि सरस्वती पूजा एवं गणतंत्र दिवस को लेकर बच्चों की उपस्थिति कम रही। उन्होंने बताया कि विद्यालय में न सिर्फ शिक्षकों की भारी कमी है, बल्कि बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है।
स्कूल को नहीं मिले आवश्यक सामग्री
प्रधानाध्यापक ने बताया कि सरकार द्वारा प्रत्येक विद्यालय को उपलब्ध कराई जाने वाली आवश्यक सामग्री जैसे डेस्क-बेंच, कृषि टेबल, गोदरेज आदि आज तक इस विद्यालय को नहीं मिल सकी है। इससे न केवल पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है, बल्कि विद्यालय की व्यवस्था भी चरमरा गई है।
उन्होंने यह भी बताया कि बीते लगभग छह वर्षों से विद्यालय को विद्यालय विकास मद की राशि नहीं मिली है, जिसके कारण मरम्मत, साफ-सफाई और अन्य आवश्यक कार्य ठप पड़े हैं। स्थानीय अभिभावकों में भी इस स्थिति को लेकर गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
उनका कहना है कि सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने की बात तो करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। यदि समय रहते विद्यालय की जर्जर हालत पर ध्यान नहीं दिया गया तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
अभिभावकों ने जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग से मांग की है कि विद्यालय में अविलंब अतिरिक्त कक्षाओं का निर्माण कराया जाए, शिक्षकों की नियुक्ति हो तथा लंबित विकास राशि शीघ्र उपलब्ध कराई जाए, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सके।
